पूर्णपुरुषोत्तम पूर्णावतार भगवान श्रीकृष्ण !
श्रीकृष्ण परम ईश्वर हैं । उनका श्रीविग्रह नित्य, चित्घन एवं आनंदस्वरूप है । वे अनादि, सर्वश्रेष्ठ तथा सभी कारणों के कारणस्वरूप गोविंद हैं ।
श्रीकृष्ण परम ईश्वर हैं । उनका श्रीविग्रह नित्य, चित्घन एवं आनंदस्वरूप है । वे अनादि, सर्वश्रेष्ठ तथा सभी कारणों के कारणस्वरूप गोविंद हैं ।
१४ अगस्त : जयपुर राजस्थान की सनातन की ८३वीं संत पू. (श्रीमती) गीतादेवी खेमकाजी का ८३वां जन्मदिन
राष्ट्रप्रेमी हिन्दुओ, ‘हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य में हम श्रीराम की वानरसेवा के वानरों की भांति सम्मिलित हैं, ऐसा भाव रखें !
उत्तराखंड सरकार ने १७ जुलाई को एक महत्वपूर्ण आदेश प्रसारित किया है । इसके अनुसार राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में प्रतिदिन प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में भगवद्गीता का एक श्लोक पढ़ा जाएगा तथा उसका अर्थ समझाया जाएगा ।
यह इतिहास का ‘भगवाकरण’ नहीं है, अपितु इतिहास के ‘हरित करण’ को हटाकर वास्तविक इतिहास प्रतिष्ठित करने का प्रयास है । यह तो प्रारंभ है, अभी बहुत कुछ करना शेष है !
वीर विनायक दामोदर सावरकर ने इटली के महान क्रांतिकारी जोसेफ मैजिनी की आत्मकथा से प्रेरणा ली थी । वर्ष १९०७ का वह काल ! वीर सावरकर ने इंग्लैंड में वर्ष १८५७ में हुए अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह के विषय पर ‘१८५७ का स्वातंत्र्य समर’ (अर्थात ‘भारत की स्वतंत्रता का प्रथम युद्ध’) इस नाम से पुस्तक लिखी ।
उत्तर भारत के विविध स्थानों पर गुरुपूर्णिमा महोत्सव संपन्न हुआ । उसमें सनातन के निन्मलिखित ग्रंथों के ‘ई-बुक’ का लोकार्पण किया गया । वाराणसी के गुरुपूर्णिमा महोत्सव में सनातन संस्था का ‘रोगियों की देखभाल कैसे करें ?’ नामक लघुग्रंथ का लोर्कापण किया गया ।
गोपालन, गोरक्षा, गो-उत्पादन ये सभी डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई के आत्मीय विषय हैं । नि:स्वार्थ सेवाभाव से गोमाताओं की सेवा एवं सुरक्षा करने हेतु रवींद्रजी कटिबद्ध हैं ।
‘जितने व्यक्ति, उतनी प्रकृतियां, उतने साधनामार्ग’, यह सनातन धर्म का सिद्धांत है । अनेक संप्रदायों तथा योगमार्गों के अनुसार, साधना इस ब्रह्मांड की एक स्वयंभू व्यवस्था है । इसके प्रति कृतज्ञ रहते हुए, हमें अपने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए साधना करना आवश्यक है ।
‘वर्ष २०१८ में केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्था के (‘एम्स’ के) ‘नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर’ के सहयोग से किए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार भारत में लगभग १६ करोड लोग मदिरा का सेवन करते हैं ।