मानवाधिकारों के उल्लंघन का गढ होने वालों को हमें उपदेश नहीं देना चाहिए ! – India’s Ministry of External Affairs
इस्लामी धार्मिक स्थलों के विषय में भारत पर टिप्पणी करने वाले पाक के राष्ट्रपति को भारत ने खरी-खरी सुनाई !
इस्लामी धार्मिक स्थलों के विषय में भारत पर टिप्पणी करने वाले पाक के राष्ट्रपति को भारत ने खरी-खरी सुनाई !
यह घटना नई नहीं है । जनवरी २०२६ में भी नेरेडमेट के विनायक नगर क्षेत्र में बिना अनुमति स्थापित की गई छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को लेकर पुलिस द्वारा कार्यवाही किए जाने से विवाद उत्पन्न हुआ था।
धर्मनिरपेक्षतावादी होने का ढोंग करनेवाले बांग्लादेश ने इस्लामी धार्मिक गुटों के दबाव में आकर हिन्दू मंदिरों का निर्माण कार्य रोक दिया है , इसके लिए भारत को उससे उत्तर मांगना चाहिए । इसके लिए भारत के प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा सरकार पर दबाव बनाना आवश्यक है !
कानूनी प्रावधानों में सम्मिलित का लाभ उठाकर ऐसे आरोपी जमानत पर रिहा हो जाते हैं तथा उसके पश्चात पुनः आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए जाते हैं । यह स्थिति कब तक बनी रहेगी ?
मुस्लिम विद्यार्थियों ने ऐसा दुस्साहस किया, इसका अर्थ है कि उन्हें ऐसा ही सिखाया जा रहा है । ये वयस्क होकर जिहाद करेंगे, यह स्पष्ट है ! ऐसी घटनाओं के संबंध में निधर्मीवादी, तथाकथित पुरो(अधो)गामी लोग मुंह नहीं खोलते, यह ध्यान दें!
मंदिर परिसर में संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर आयोजित यात्रा में एक महिला द्वारा क्रय की गई चादर पर ‘मेड इन पाकिस्तान’ (पाकिस्तान में निर्मित) का लेबल पाए जाने की बात महिला ने कही है ।
सर्वधर्मसमभाव के गीत गानेवाले ईसाईयों का हिन्दूद्वेष कितना तीव्र है, यही इससे ध्यान में आता है । इससे ईसाई संगठन, चर्च, वहां के पादरी एवं ईसाई धर्मप्रचारक हिन्दुओं के देवताओं के प्रति समाज में कितना द्वेष फैलाते होंगे, इसे हिन्दू ध्यान में लें ।
हिन्दू मंदिरों का अपमान करने के उपरांत दंगे करने वाले मुसलमानों पर प्रविष्ट अभियोग वापस लेकर कांग्रेस सरकार ने उन्हें संरक्षण दिया है तथा हिन्दुओं को यह भान कराया है कि वे मानो पाकिस्तान में रह रहे हों । ऐसी सरकार को सत्ता में बैठानेवाले हिन्दुओं को अब तो जागना चाहिए क्या ?
यदि वे हिन्दू रहते हुए डरपोक थे, तो मुसलमान बनने के उपरांत उनमें से अनेक लोग जिहादी, आतंकवादी एवं अपराधी प्रवृत्ति के हो गए, ऐसा ही कहना पडेगा !
मार्च माह में गंगानदी में एक नौका पर इफ्तार पार्टी का आयोजन करने के प्रकरण में १४ मुसलमान पुरुषों पर अपराध पंजीकृत किया गया था । उनमें से ५ लोगों को जमानत देते समय न्यायाधीश राजीव लोजन शुक्ला ने यह टिप्पणी की ।