परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी ‘हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु सगुण रूप में अवतरित सच्चिदानंद स्वरूप निर्गुण’ !
परात्पर गुरु डॉक्टरजी परमेश्वरीय तत्त्व में विलीन होने के लिए प्रयत्न कर रहे हैं । उसी प्रकार वे सगुण के भी कारक हैं (उन्हें हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए सक्रिय रहना आवश्यक है); इसलिए वे ऋषि-मुनि बनकर साधकों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सभी संतों से प्रयत्न करवा रहे हैं । इस कार्य के लिए वे नीचे खींचे जा रहे हैं । (उन्हें सगुण में भी रहना पड रहा है) ।