अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास का महत्त्व !

अधिक मास आत्मशुद्धि एवं परोपकार के लिए विशेष काल होता है । इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि इस वर्ष का ज्येष्ठ अधिक मास आध्यात्मिक साधना, भक्ति, व्रत, उपवास, त्योहार, स्वास्थ्य एवं परोपकार इत्यादि के दृष्टिकोण से विशेष लाभकारी है ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की विभिन्न कृतियों से प्रक्षेपित स्पंदनों का अध्ययन

‘मनुष्य की विभिन्न कृतियां प्रधानता से सत्त्वगुणी, रजोगुणी अथवा तमोगुणी होती हैं । उन गुणों के अनुसार संबंधित कृति से स्पंदन प्रक्षेपित होते रहते हैं । ‘उच्च आध्यात्मिक स्तर के अर्थात ‘परात्पर गुरु’ स्तर के संतों के संदर्भ में यह कैसे होता है ?’, इसका अध्ययन किया गया ।

समर्थ रामदासस्वामीजी को अभिप्रेत भारत की अद्वितीय मंदिर संस्कृति !

ईश्वरदर्शन मानव जीवन का प्रधान प्रयोजन सुनिश्चित होने पर भारतीयों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन में मंदिर संस्थाएं एकदम से केंद्रस्थान पर जाकर बैठ गईं ।

सनातन के ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधकों की भांति सूक्ष्म से ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधक पृथ्वी पर अत्यल्प होने के कारण

‘‘कु. मधुरा भोसले, श्री. निषाद देशमुख और श्री. राम होनप जैसे सनातन के ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधकों की भांति सूक्ष्म से ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधक पृथ्वी पर कितने हैं ? यदि उनकी संख्या विशेष नहीं है, तो उसके क्या कारण हैं ?’’

‘यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर’ उपकरण के माध्यम से आध्यात्मिक शोध करते समय आनेवाली सीमाओं को ध्यान में रखते हुए, ‘महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय’ द्वारा आध्यात्मिक शोध में ‘लोलक परीक्षण’ (Pendulum Testing) को जोडना

वर्ष २०२१-२०२२ के मध्य ‘यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर’ उपकरण द्वारा परीक्षण करते समय, कुछ घटकों का प्रभामंडल (Aura) २३०० मीटर से भी अधिक पाया गया। स्थान की कमी के कारण इतनी विशाल दूरी को सटीक रूप से मापना संभव नहीं हो पा रहा था।

अक्षय तृतीया विशेष

इस दिन की जानेवाली कृतियों का क्षय न होकर वे बढती हैं; इसलिए इस दिन सोना, चांदी इत्यादि मूल्यवान वस्तुएं खरीदी जाती हैं, साथ ही इस दिन नया व्यवसाय आरंभ करना अथवा दान देना श्रेष्ठ माना जाता है ।

अक्षय तृतीया का त्योहार कैसे मनाया जाए ?

अक्षय तृतीया के दिन पवित्र जल में स्नान, भगवान श्रीविष्णु की पूजा, जप, होम, दान एवं पितृ-तर्पण किया जाता है । इस दिन ‘अपिंडक श्राद्ध’ करना चाहिए और यदि वह संभव न हो, तो कम से कम तिल-तर्पण अवश्य करना चाहिए ।

अक्षय तृतीया एवं खेती !

अक्षय तृतीया वर्षा ऋतु के कुछ दिन पूर्व आती है । महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में गुढीपडवा के शुभमुहूर्त पर हल चलाई कृषिभूमि में जोताई पूर्ण करने की प्रथा है ।

अक्षय तृतीया के दिन पुण्य कैसे  प्राप्त किया जा सकता है ?

वैशाख शुक्ल तृतीया अर्थात अक्षय तृतीया ! हिन्दू धर्म में यह एक पवित्र एवं महत्त्वपूर्ण त्योहार माना जाता है । इस वर्ष १९ अप्रैल को अक्षय तृतीया है ।

हनुमानजी का पंचमहाभूतों से संबंधित कार्य तथा उनकी आध्यात्मिक विशेषताएं

हनुमानजी ११वें रुद्र हैं तथा वे शिवस्वरूप हैं । त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम के अवतारी कार्य में सहभागी होकर श्रीराम की सहायता करने हेतु शिवजी ने हनुमानजी का अवतार धारण किया था ।