
सांगली (महाराष्ट्र) – ‘‘अध्यात्म में प्रगति के लिए साधना के प्रयासों के साथ-साथ अहंकार तथा स्वभावदोषों का उन्मूलन करना तथा माया के प्रति आसक्ति को न्यून करना भी आवश्यक है । इसे ध्यान में रखते हुए, यदि श्री गुरु के चरणों में श्रद्धा रखकर उन्हें अपेक्षित व्यष्टि (व्यक्तिगत) तथा समष्टि (समाजगत) साधना करते रहें, तो हिन्दू राष्ट्र दूर नहीं है ।’’ यह बहुमूल्य मार्गदर्शन सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी ने किया । वे १२ जुलाई को हरिदास भवन, सांगली में साधकों का मार्गदर्शन कर रही थीं । इस मार्गदर्शन का लाभ सांगली तथा कोल्हापुर जिलों के २०० से अधिक साधकों ने लिया ।
श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी ने आगे कहा,
‘जितने व्यक्ति, उतनी प्रकृतियां, उतने साधनामार्ग’, यह सनातन धर्म का सिद्धांत है । अनेक संप्रदायों तथा योगमार्गों के अनुसार, साधना इस ब्रह्मांड की एक स्वयंभू व्यवस्था है । इसके प्रति कृतज्ञ रहते हुए, हमें अपने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए साधना करना आवश्यक है ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?