
सांगली (महाराष्ट्र) – ‘‘अध्यात्म में प्रगति के लिए साधना के प्रयासों के साथ-साथ अहंकार तथा स्वभावदोषों का उन्मूलन करना तथा माया के प्रति आसक्ति को न्यून करना भी आवश्यक है । इसे ध्यान में रखते हुए, यदि श्री गुरु के चरणों में श्रद्धा रखकर उन्हें अपेक्षित व्यष्टि (व्यक्तिगत) तथा समष्टि (समाजगत) साधना करते रहें, तो हिन्दू राष्ट्र दूर नहीं है ।’’ यह बहुमूल्य मार्गदर्शन सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी ने किया । वे १२ जुलाई को हरिदास भवन, सांगली में साधकों का मार्गदर्शन कर रही थीं । इस मार्गदर्शन का लाभ सांगली तथा कोल्हापुर जिलों के २०० से अधिक साधकों ने लिया ।
श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी ने आगे कहा,
‘जितने व्यक्ति, उतनी प्रकृतियां, उतने साधनामार्ग’, यह सनातन धर्म का सिद्धांत है । अनेक संप्रदायों तथा योगमार्गों के अनुसार, साधना इस ब्रह्मांड की एक स्वयंभू व्यवस्था है । इसके प्रति कृतज्ञ रहते हुए, हमें अपने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए साधना करना आवश्यक है ।
यदि मुसलमान अपने पूर्वजों की परंपराओं को स्वीकार करें, तो उन्हें हिन्दू राष्ट्र में किसी प्रकार का कोई संकट नहीं होगा ! – Yogrishi Ramdev baba
(और इनकी सुनिए…) ‘कुंकुम इस्लामी देशों से आता है, तो क्या फिर हिन्दु तिलक लगाना बंद कर देंगे ?’ – Priyank Kharge
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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