सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !

गुरुदेवजी को देखकर सभी भावविभोर हो गए । उसी प्रकार, सभी को सामने देखकर गुरुदेवजी के मुखमंडल पर भी आनंद एवं कृतज्ञभाव दिखाई दे रहा था । महोत्सव अंतर्गत गुरुदेवजी की यह अत्यंत मनमोहक भावमुद्रा है !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु विभिन्न स्तरों पर कार्य !

वर्ष १९९८ में सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी (गुरुदेवजी) ने ५६ वर्ष की आयु में सार्वजनिक रूप से विचार रखा, ‘भारत में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना’, ही हिन्दुओं की सामाजिक, राष्ट्रीय एवं धार्मिक समस्याओं का एकमात्र उपाय है ।’

‘प्राच्यम् स्टुडियो’ के, अर्थात जगत के प्रथम ‘हिन्दू ओटीटी’के उद्गाता एवं ‘निर्भय हिन्दुत्वयोद्धा’ कैप्टन प्रवीण चतुर्वेदी (निवृत्त) !

हिन्दू धर्म पर होनेवाले जागतिक आक्रमणों का सामना करने के लिए धार्मिकता एवं आध्यात्मिकता का मिलाप कर संगठितरूप से उसका सामना करना चाहिए ।

संत-महात्माओं के आशीर्वाद से हिन्दू राष्ट्र निश्चित ही साकार होगा !

‘उद्योगपतियों का स्वयं का जीवन समृद्ध होगा, उनके व्यवसाय का विस्तार होगा, साथ ही देश के सर्वांगीण विकास में भी उनका योगदान रहेगा; इसका मैंने स्वयं अनुभव किया है । इसलिए इसी अनुभव पर आधारित लेखमाला का आरंभ कर रहा हूं ।

‘श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी महिमा’ विशेष !

‘ज्ञान एवं भक्ति’ के अद्वितीय संगम से युक्त श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी

Shankhnad Mahotsav Delhi : सनातन राष्ट्र की निर्मिति हेतु ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद’ महोत्सव में सहभागी हों ! – संजय शेठ, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री

देहली में गूंजेगा सनातन राष्ट्र का शंखनाद !
रांची में पत्रकार वार्ता

‘घर में, साथ ही खेत में आनेवाले उपद्रवी कीडों तथा प्राणियों को मारने से पाप लगता है अथवा नहीं’, इस संबंध में आध्यात्मिक विश्लेषण !

स्वयं की अथवा वास्तु की रक्षा के लिए मारना पडता है । तो क्या उन्हें मारनेवाले व्यक्ति को पाप लगता है ?’ इस विषय में ईश्वर की कृपा से मुझे प्राप्त ज्ञान आगे दिया गया है ।

साधको, साधनायात्रा भले ही संघर्षपूर्ण लगे, तब भी आश्वस्त रहें कि ‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉक्टरजी जैसे गुरु पत्थर रूपी जीव से देवत्व से युक्त सुंदर मूर्ति अवश्य तराशेंगे !’

शिल्पकार के घाव सहन न करनेवालेपत्थर का मंदिर के बाहर धूप में वैसे ही पडे रहना, जबकि घाव सहन करनेवाले पत्थर सेशिल्पकार द्वारा देवता की सुंदर मूर्ति बनाई जाना

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

भारत के सात्त्विक लोगों के अनुचित दृष्टिकोण के कारण ही रज तम-प्रधान विदेशी भारत पर सैकडों वर्ष राज्य कर पाए !

हिन्दुत्व एवं धर्म का कार्य करने की तीव्र लगन वाले मडिकेरी (कर्नाटक) के प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ता कृष्णमूर्ति पी. !

‘मडिकेरी, कर्नाटक के प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ता कृष्णमूर्ति पी. (आयु ४७ वर्ष) देवीभक्त हैं तथा पिछले १४ वर्षाें से साधना कर रहे हैं । वे वर्ष २०२१ से २ वर्ष विश्व हिन्दू परिषद के कोडगु जिला अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे, तदुपरांत दायित्व से मुक्त हुए ।