परिवार व्यवस्था, धर्मसंस्था एवं शिक्षाप्रणाली को साम्यवाद से संकट !
शक्तिशाली लोकतांत्रिक देशों को साम्यवाद से संकट !
शक्तिशाली लोकतांत्रिक देशों को साम्यवाद से संकट !
अधिक मास आत्मशुद्धि एवं परोपकार के लिए विशेष काल होता है । इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि इस वर्ष का ज्येष्ठ अधिक मास आध्यात्मिक साधना, भक्ति, व्रत, उपवास, त्योहार, स्वास्थ्य एवं परोपकार इत्यादि के दृष्टिकोण से विशेष लाभकारी है ।
डॉ. कृष्णकुमार ने समिति के कार्यकताओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘आप सभी सनातन धर्म के लिए निःस्वार्थभाव से पूर्णकालीन जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जो बहुत ही दुर्लभ उदाहरण है तथा यही समय की मांग है ।
युद्धकाल का सामना करने के लिए तैयारी के रूप में आज ही कृति करना आवश्यक !
हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी के साथ ‘प्राच्यम्’ नामक ‘ओटीटी प्लेटफॉर्म’ के संस्थापक एवं मुख्य अधिकारी कैप्टन प्रवीण चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त) ने ‘चेंज मेकर्स’ कार्यक्रम के अंतर्गत संवाद किया ।
ईश्वरदर्शन मानव जीवन का प्रधान प्रयोजन सुनिश्चित होने पर भारतीयों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन में मंदिर संस्थाएं एकदम से केंद्रस्थान पर जाकर बैठ गईं ।
मंदिर प्रबंधन एक सर्वसमावेशक प्रक्रिया है । उनका संबंध आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं धार्मिक क्षेत्रों से होता है । इसीलिए मंदिर जीवन के प्रत्येक विषय से संबंधित हैं ।
मंदिर संस्कृति को बनाए रखने से नकारात्मकता घटेगी और हिन्दुओं को सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी । हिन्दू सात्त्विक एवं सत्त्वगुणी बनेंगे ।
छत्रपति शिवाजी महाराज एवं राजमाता अहिल्यादेवी होळकर ने मंदिरों की रक्षा की, साथ ही विदेशी आक्रांताओं द्वारा ध्वस्त किए मंदिरों का जीर्णाेद्धार भी किया । इससे मंदिरों का महत्त्व ध्यान में आता है; परंतु भारत द्वारा ‘सेक्युलर’ तंत्र अपनाए जाने के कारण मंदिरों पर नई-नई पद्धतियों से आघात हो रहे हैं ।