‘अग्नि’मय पथ !

आज का विषय भी सेना से संबंधित है । संरक्षण मंत्रालय ने युवकों के लिए ‘अग्निपथ’ नामक सेना भर्ती की योजना बनाई थी । इसके अंतर्गत साढे सत्रह से १ वर्ष इस आयुवर्ग के युवक सेना में भरती हो पाएंगे । उन्हें ‘अग्निवीर’ नाम से संबोधित किया जाएगा ।

पाकिस्तान में चलते बनो !

भारत को धर्म के आधार पर विभाजित कर एक बडा भूभाग मुसलमानों को दिया गया; मात्र मोहनदास गांधी के ऐसा कहने पर कि ‘जिन मुसलमानों को भारत में रहना है, वे यहीं रह सकते हैं’, परिणामस्वरूप मुसलमानों की भारी जनसंख्या इस देश में ही रह गई । आज वही इस देश को नष्ट करने पर तुले हैं ।

सूक्ष्म स्तर पर कार्य करनेवाले एकमेवाद्वितीय !

जब-जब अधर्म बलवान होता है, तब-तब मैं अवतार लेता हूं और धर्म की पुनर्स्थापना करता हूं’, ऐसा श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने बताया है । भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण चरित्र देखें, तो उसमें विविध बातें अंतर्भूत हैं ।

‘आवाजी’ अत्याचारों के समर्थक !

वर्षाें से हिन्दुओं ने जो ‘आवाजी’ अत्याचार सहन किए, उस सूत्र में राज ठाकरे ने हाथ डाला है । उन्होंने मस्जिदों पर लगे अनधिकृत भोंगे बंद करने के लिए दी हुई समय सीमा से सरकार और पुलिस की नींद हराम हो गई ।

अनधिकृत निर्माणकार्य करनेवालों के संरक्षक !

अवैध निर्माणकार्याें के कारण मूलभूत सुविधाओं पर तनाव आता है । यह समस्या केवल नगरनियोजन तक सीमित नहीं है, अपितु राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है । ऐसे स्थानों से देशविरोधी गतिविधियां चलाए जाने की अनेक घटनाएं अभी तक सामने आई हैं ।

भ्रष्टाचारियों को निवृत्तिवेतन किसलिए ?

शासकीय कामकाज में काम निकृष्ट हो गया, तो ठेकेदार का नाम काली सूची में डाल दिया जाता है । फिर जनता के काम न किए हों, तो क्या उन जनप्रतिनिधियों के कामों का मूल्यांकन नहीं करना चाहिए ? उनके कामों के मूल्यांकन पर ही उनका वेतन और निवृत्तिवेतन निश्चित करना चाहिए ।

श्रीलंका पर छाया अन्नसंकट एवं भारत !

श्रीलंका ने भारत से अन्न आयात करने के लिए कर्ज की मांग की है । वह जैविक खेती के विषय में मार्गदर्शन भी मांगे, तो इसमें भारतीय किसान बंधु भी आनंद से सहभागी होंगे ।

कलुषित ‘विजन’ !

     शासन लोकतंत्र व्यवस्था का आधारस्तंभ है । हमारे देश में प्रत्येक ५ वर्ष में चुनाव होते हैं और शासनकर्ता बदल जाते हैं, तब भी प्रशासकीय कर्मचारी एवं अधिकारी वही होते हैं । शासनकर्ताओं द्वारा लागू की गई योजनाओं को कार्यान्वित करनेवाला प्रशासन ही होता है । अत: ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि … Read more

पाश्चात्य संगीत : प्राणों से खिलवाड !

नांदेड के मुदखेड तालुका का एक युवक व्यसनाधीन था । इससे उसकी पढाई छूट गर्स और वह निराशाग्रस्त हो गया । ऐसी निराशाग्रस्त अवस्था में उसने मूल हंगेरियन भाषा का गाना ‘ग्लूमी संडे’ (खिन्न रविवार) का हिन्दी रूपांतर सुना । यह गाना सुनने के पश्चात उसका बचा-खुचा मानसिक संतुलन भी धराशायी हो गया ।

गोल्डबर्ग का अपराध !

अमेरिकी समाज पर अभिव्यक्ति स्वतंत्रता एवं व्यक्ति स्वतंत्रता की बहुत दृढ पकड होते हुए भी गोल्डबर्ग के प्रसंग में कोई भी उनका पक्ष लेने नहीं आया । ऐसा क्यों हुआ ? ‘ज्यू का वंशविच्छेद, धार्मिक नहीं था, अपितु वांशिक था । इतना भी गोल्डबर्ग को कैसे पता नहीं ?’, ऐसा ही सुर अमेरिकी समाज के अनेक लोगों ने आलापा ।