संपादकीय : राष्ट्र के लिए त्याग करें !
प्रधानमंत्री द्वारा किए गए आवाहन का कार्यान्वयन केवल दिखावे के लिए न कर, अपितु उसका अनुकरण कर राष्ट्रहित का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए !
प्रधानमंत्री द्वारा किए गए आवाहन का कार्यान्वयन केवल दिखावे के लिए न कर, अपितु उसका अनुकरण कर राष्ट्रहित का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए !
आज का आर्थिक अनुशासन एवं संयमित जीवनशैली, भविष्य की महंगाई एवं आर्थिक संकट का प्रभावी उत्तर है !
हिन्दुओं ने राम मंदिर अयोध्या के लिए ५०० वर्षों तक संघर्ष किया, भोजशाला के लिए १०० वर्षों तक संघर्ष किया, फिर भी काशी विश्वनाथ मंदिर तथा श्री कृष्ण जन्मभूमि की पूर्ण मुक्ति अभी शेष है ।
कई लोगों को लगेगा कि ६० वर्ष पहले की इस घटना को बताने का क्या उद्देश्य है ? तो यह प्रश्न ही तर्कसंगत नहीं है । १०० करोड हिन्दुओं के देश में स्वतंत्रता को ८ दशक होनेवाले हैं, तब भी हिन्दुओं की प्राणप्रिय गोमाता का राज्यसत्ता द्वारा संरक्षण नहीं हो रहा, यह एक विडंबना है ।
तमिलनाडु के कल्पक्कम् के ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ ने ‘क्रिटिकैलिटी’ साध्य की है, जो भारत के लिए अत्यंत गर्व का विषय है । परमाणु परियोजना तथा उसके कार्य से संबंधित वैज्ञानिक परिभाषा सामान्य लोगों की समझ में आना थोडा कठिन होता है ।
जिस कानून के आधार पर न्याय दिया जाता है, वह कानून मूलतः नैतिकता के आधार पर हो, यही समाज व्यवस्था की दृष्टि से हितकारी है !
आधुनिक युद्ध का परिवर्तित स्वरूप देखते हुए रणनीति में परिवर्तन करना, कालानुसार भारत के लिए आवश्यक !
जो भारत दे सकता है, वह अन्य कोई भी देश नहीं दे सकता। अतः युवक इस ‘विश्वगुरु’ भारत को छोडने से पहले विचार करें !
‘वन्दे मातरम्’ के अनिवार्य होने का हर्ष मनाते हुए, हमें भविष्य में इसे राष्ट्रगान बनाने हेतु सार्थक प्रयास करने चाहिए !
रक्षा एवं आर्थिक क्षेत्र में शक्तिशाली होने पर भारत महासत्ता बन सकता है, यह ध्यान में रखते हुए प्रयास करना आवश्यक !