परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा साधकों को किया गया अनमोल मार्गदर्शन !
हमें रामनाथी आश्रम के समान सर्वत्र हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करनी है ।
हमें रामनाथी आश्रम के समान सर्वत्र हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करनी है ।
‘मनुष्य की विभिन्न कृतियां प्रधानता से सत्त्वगुणी, रजोगुणी अथवा तमोगुणी होती हैं । उन गुणों के अनुसार संबंधित कृति से स्पंदन प्रक्षेपित होते रहते हैं । ‘उच्च आध्यात्मिक स्तर के अर्थात ‘परात्पर गुरु’ स्तर के संतों के संदर्भ में यह कैसे होता है ?’, इसका अध्ययन किया गया ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के माथे पर अंकित कमल सुस्पष्ट दिखाई देने का क्या कारण है ? वर्ष २०११ एवं वर्ष २०१२ की अवधि में उस कमल की ४ पंखुडियां अस्पष्ट दिखाई देती थीं तथा वर्ष २०१३ में वे सुस्पष्ट दिखाई देने लगी । ‘कमल का सुस्पष्ट होना’ क्या दर्शाता है ?
ऐसे महान अवतारी गुरु के श्री चरणों में साधकों की श्रद्धा कैसी होनी चाहिए ? गुरु के अस्तित्व अथवा उनके कार्य पर तनिक भी संदेह न करते हुए, ‘मेरे गुरु जो कर रहे हैं, वह मेरे कल्याण के लिए ही है’, ऐसा दृढ भाव मन में रखना ही श्रद्धा है ।
दूसरा बांग्लादेश बनने की संभावना बताए जा रहे बंगाल के एक प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ नेता ने ‘सनातन प्रभात’ को बंगाल में हिन्दुत्वनिष्ठ भाजपा का शासन आने के विषय में एक विशेष जानकारी दी ।
इस अवसर पर समिति के प्रति अपनी भावना व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ‘हिन्दू जनजागृति समिति का कार्य अत्यंत महत्त्वपूर्ण है; इसलिए वह प्रत्येक हिन्दू तक पहुंचना चाहिए ।’
अनेक लोगों को उनके द्वारा पढे गए लेखन से महत्त्वपूर्ण सूत्रों को अलग निकालकर रखने की तथा कतरनों को संदर्भ के रूप में संजोकर रखने की आदत होती है । उससे उनके गुण भी प्रकट होते हैं; परंतु इससे केवल ईश्वर ही अन्यों को अनुभूति दे सकते हैं । इस सेवा के माध्यम से अन्यों में गुणवृद्धि करनेवाले तथा उन्हें चैतन्य प्रदान करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमात्र हैं ।
पू. डॉ. शिवकुमार ओझाजी विज्ञान के प्रसिद्ध शोधकर्ता होते हुए भी उन्होंने संस्कृत, हिन्दी, अध्यात्मशास्त्र एवं भारतीय संस्कृति के विषयों पर अनेक ग्रंथ लिखे हैं । उनके ग्रंथों में समाहित प्रत्येक पंक्ति अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । इसके कारण वे ‘कलियुग के प्रथम वेदऋषि हैं’, इसका मुझे तीव्रता से बोध हुआ ।’
‘वर्ष २०२६ की महाशिवरात्रि से अर्थात १५.२.२०२६ से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने साधकों को श्रीराम की उपासना (नामजप, स्तोत्र का पाठ इत्यादि) करने के लिए कहा है । इस संदर्भ में सूक्ष्म ज्ञान से प्राप्त जानकारी आगे दी गई है ।
वर्तमान में सातवें पाताल की बडी अनिष्ट शक्तियां साधकों की श्रद्धा को भंग करके उन्हें साधना से दूर करने के लिए ‘शब्दशक्ति’ के माध्यम से बडे स्तर पर सूक्ष्म युद्ध कर रही हैं। लिखित और वाणी में प्रयुक्त शब्दों के माध्यम से संस्था, संत और साधकों के विषय में नकारात्मकता फैलाने की घटनाएं हो रही … Read more