Vaishvik Hindu Rashtra Mahotsav Special : आध्यात्मिक संस्थाओं के माध्यम से धर्मजागरण

धर्मकार्य में योगदान से ही हमारा जीवान सार्थक होगा ! – महामंडलेश्वर नर्मदा शंकरपुरी महाराज, निरंजनी आखाडा, जयपुर, राजस्थान

सर्वस्व का त्याग ही हिन्दू राष्ट्र स्थापना की नींव है !

इस वर्ष हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन की तपपूर्ति (१२ वर्ष) हो रही है।रामराज्यरूपी धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र प्रत्यक्ष साकार होने के लिए स्वक्षमता के अनुसार तन-मन-धन एवं समय आने पर सर्वस्व का त्याग करने  अर्थात सर्वोच्च योगदान देने की आवश्यकता है। यह ध्यान में रखकर धर्मसंस्थापना का महान कार्य कीजिए !

पुलिसकर्मियों को नीति और धर्म सिखाएं !

पुलिसकर्मियों को कानून, नीति और धर्म सिखाएं, जिससे वे निर्दोषों को प्रताडित करने और झूठी रिपोर्ट बनाने का पाप नहीं करेंगे !’

विज्ञानवादियों का शोध बच्चों के खेल समान !

‘पांच ज्ञानेंद्रियों, मन और बुद्धि से परे ज्ञान देनेवाला सूक्ष्म कुछ है, यह ज्ञात न होने से विज्ञानवादियों का शोध बच्चों के खेल समान है !’

हिन्दुओं का कल्पनातीत सर्वधर्मसमभाव

‘भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्रीराम ने रावण को युद्ध में मारा । उसी रावण के भारत में २-३ स्थानों पर ‘रावण महाराज’ के नाम से मंदिर हैं ! इसलिए हिन्दुओं को कोई सर्वधर्मसमभाव न सिखाए !’

बुद्धिवादी क्या वास्तव में ʻबुद्धिवादीʼ हैं ?

‘प्रत्येक विषय के विशेषज्ञ आपस में विवाद कर सकते हैं, उदा. आधुनिक चिकित्सक (डॉक्टर) आधुनिक चिकित्सक से, वकील वकीलों से, संगणक विशेषज्ञ संगणक विशेषज्ञों से; परंतु अध्यात्म का अध्ययन न करनेवाले एवं साधना न करनेवाले बुद्धिवादी अध्यात्म के अधिकारी से विवाद करते हैं । क्या इससे अधिक मूर्खता का दूसरा उदाहरण है ?’

हिन्दुओं की स्थिति अत्यंत दयनीय होने का कारण

‘हिन्दू शब्द की व्याख्या है ‘हीनान् गुणान् दूषयति इति हिंदुः ।’, इस व्याख्या के अनुसार देखें तो हिन्दुओं में केवल 10 प्रतिशत हिन्दू ‘खरे हिन्दू’ हैं । शेष 90 प्रतिशत केवल जन्महिन्दू हैं । इसलिए हिन्दुओं की स्थिति संसार में ही नहीं, अपितु भारत में भी अत्यंत दयनीय हो गई है ।’

पांडित्य दिखानेवाले केवल पुस्तक के समान होना !

‘पुस्तक में शाब्दिक ज्ञान होता है, वह पुस्तक स्वयं नहीं समझ पाती, उसी प्रकार पांडित्य दिखाने का जिन्हें शाब्दिक ज्ञान होता है, उन्हें उस ज्ञान की अनुभूति नहीं होती ।’

हिन्दुओं का धर्मनिष्ठाहीन होने का परिणाम !

‘हिन्दुओं की धर्मनिष्ठा बुद्धिवादियों ने नष्ट कर दी है । परिणामस्वरूप धर्मनिष्ठ अल्पसंख्यक मुसलमान, ईसाई और बौद्ध बहुसंख्यक हिन्दुओं पर भारी पड रहे हैं ।