श्रीलंका में सरकारी स्तर पर बडे प्रमाण पर हिन्दू मंदिरों पर आक्रमण हो रहे हैं !
श्रीलंकाई सरकार द्वारा किए गए आक्रमण अत्यंत निंदनीय हैं और भारत को इस संबंध में श्रीलंका सरकार से इसका प्रतिउत्तर मांगना चाहिए !
श्रीलंकाई सरकार द्वारा किए गए आक्रमण अत्यंत निंदनीय हैं और भारत को इस संबंध में श्रीलंका सरकार से इसका प्रतिउत्तर मांगना चाहिए !
कठिन समय में अत्यावश्यक वस्तुओं के आयात के लिए भारत द्वारा प्राप्त ४ बिलियन अमेरिकी डॉलर्स के ऋण की सहायता से हमें कुछ मात्रा में आर्थिक स्थिरता प्राप्त हो सकी ।
श्रीलंका को कर्ज देकर चीन ने उसे अपनी ओर मोड लिया है । इस कारण चीन जैसा बताएगा, श्रीलंका उसी प्रकार बर्ताव करेगा । यह ध्यान में लेकर भारत को श्रीलंका से चर्चा करने की अपेक्षा चीन के विरोध में आक्रामक नीति अपनाना आवश्यक !
भारतीय मछुआरे सदैव इस प्रकार से समुद्री सीमा का उल्लंघन करने के आरोप में बंदी बनाए जाते हैं, इसलिए भारत सरकार को इन मछुआरों को भारतीय सीमा के बारे में जागरूक करने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है !
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने ८ तमिल हिन्दू बंदियों को क्षमा करते हुए उन्हें छोड दिया है । इन सभी को, ‘लिबरेशन टायगर ऑफ तिमल ईलम्’ से (‘लिट्टे’ से) संबंध होने के कारण बंदी बनाया गया था । ये सभी पिछले कुछ वर्षों से जेल में थे ।
जाफना के एक प्राचीन हिन्दू मंदिर की भूमि पर बौद्ध विहार का अवैध निर्माण काम करने के विरोध में आंदोलन करने वाले २ प्रमुख तमिल कार्यकर्ताओं को श्रीलंका सरकार ने बंदी बनाया है । इस बंदी के विरोध में तमिल हिन्दुओं ने मुल्लेतिवू और जाफना में प्रदर्शन किए ।
भारत के विरोध के उपरांत भी श्रीलंका के अनुमति देने पर चीन की ‘युआन वांग-५’ यह गुप्तचरी करनेवाली नौका १६ अगस्त को सवेरे श्रीलंका के हंबनटोटा बंदर पहुंची । यह नौका २२ अगस्त तक वहां होगी ।
एक ओर श्रीलंका ने पाक की युद्धनौका और चीन की गुप्तचर नौका को उसके बंदरगाह पर आने की अनुमति देने पर भी भारत द्वारा श्रीलंका को इस प्रकार की सैनिकी सहायता करना कितना योग्य है , ऐसा प्रश्न सामने आता है !
श्रीलंका के नवनियुक्त पर्यटन दूत और पूर्व क्रिकेट खिलाडी सनथ जयसूर्या का आश्वासन
जहाज के दौरे को भारत का विरोध कायम