हिन्दू धर्मप्रेमी युवक-युवतियों, ऋषि-मुनियों तथा देवताओं द्वारा की जानेवाली स्थूल कृतियों के पीछेका सूक्ष्म धर्मशास्त्र समझे बिना उनका अनुकरण न करें ! – श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळ

समाज की युवतियों द्वारा ‘दुर्गादेवी ने केश खुले छोडे हैं’, ऐसा कहकर स्वयं के केश भी खुले छोडना

‘श्रीसत्‌शक्ति, श्रीचित्‌शक्ति और सच्चिदानंद’ अध्यात्म के शब्दब्रह्म हैं तथा उनमें अत्यधिक शक्ति विद्यमान होती है और उन शब्दों का उच्चारण करने पर उनसे शक्ति, चैतन्य एवं तत्त्व प्राप्त होता है ! – श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी

कोई भी शब्द उच्चारित किया जाए, तो उसके साथ उसकी शक्ति भी आती है । अर्थात प्रकृति के नियमानुसार ‘शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध और शक्ति’ इनका सहअस्तित्व होता है । ‘श्रीसत्शक्ति’ कहने पर उन शब्दों में स्थित चैतन्य तत्काल हमारे शरीर में प्रवेश करता है ।

यज्ञसंस्कृति को पुनर्जीवित करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी !

किसी भी कार्य को गति देने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है । रामराज्य की स्थापना की प्रक्रिया मुख्य रूप से आध्यात्मिक स्तर से संबंधित होने के कारण रामराज्य की स्थापना को गति देने के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा ही आवश्यक है ।

मुंबई में ‘शंखनाद महोत्सव’ करने समान ही फल श्री राजमातंगी महायज्ञ से प्राप्त हुआ है !

देश की सुरक्षा के लिए किया गया यह यज्ञ, एक प्रकार से महामृत्युंजय यज्ञ ही था; क्योंकि इस यज्ञ के माध्यम से गुरुदेवजी ने आनेवाले युद्धकाल के लिए साधकों को आवश्यक मृत्युंजय कवच प्रदान किया और राष्ट्र को भी कवच प्रदान किया । मुंबई में ‘शंखनाद महोत्सव’ करने समान ही फल इस यज्ञ से प्राप्त हुआ है ।

१२ ज्योतिर्लिंगों में प्रथम मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंश सनातन संस्था को अर्पित !

श्रीचित्शक्ति श्रीमती अंजली मुकुल गाडगीळजी द्वारा लाए गए ४ शिवलिंगों का साधकों ने भोलेनाथ के जयघोष एवं वेदमंत्रोच्चार के साथ भावपूर्ण स्वागत किया । इस समय श्रीसत्शक्ति श्रीमती बिंदा सिंगबाळजी ने शिवलिंगों का पूजन एवं औक्षण किया ।

श्री राजमातंगी महायज्ञ के निर्विघ्न संपन्न होने हेतु श्री सिद्धिविनायक के चरणों में सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरुओं तथा संतों द्वारा प्रार्थना !

‘वर्तमान युद्धकाल में तपोभूमि भारत को संरक्षण कवच प्राप्त हो तथा भारत की सर्वांगीण उन्नति हो’, इस हेतु सनातन संस्था की ओर से १७ मई को मुंबई के प्रभादेवी स्थित नर्दुल्ला टैंक मैदान में ‘श्री राजमातंगी महायज्ञ’ का भव्य आयोजन किया गया ।

श्री राजमातंगी महायज्ञ के निर्विघ्न संपन्न होने हेतु श्री सिद्धिविनायक के चरणों में सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरुओं तथा संतों द्वारा प्रार्थना !

‘वर्तमान युद्धकाल में तपोभूमि भारत को संरक्षण कवच प्राप्त हो तथा भारत की सर्वांगीण उन्नति हो’, इस हेतु सनातन संस्था की ओर से १७ मई को मुंबई के प्रभादेवी स्थित नर्दुल्ला टैंक मैदान में ‘श्री राजमातंगी महायज्ञ’ का भव्य आयोजन किया गया ।

Raja Matangi Yadnya : राष्ट्ररक्षार्थ मुंबई में हुआ ‘श्री राजमातंगी महायज्ञ’ !

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी ने जिस नगरी से धर्मकार्य का श्रीगणेश किया था, वह मुंबापुरी (मुंबई) अधिक ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा को वेदमंत्रों के घोष से गूंज उठी !

Shri Rajamatangi Mahayagya : राष्ट्र की अभिवृद्धि के लिए १७ मई को मुंबई में होगा श्री राजमातंगी महायज्ञ !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी तथा श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी की दिव्य उपस्थिति में होनेवाले इस महायज्ञ का लाभ सहस्रों देवीभक्त प्राप्त करेंगे ।

आपातकाल की बढती तीव्रता में स्थिर रहने के लिए तीव्र साधना आवश्यक है ! – श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळ

इटली में रहनेवाली और एक संप्रदाय के अनुसार साधना करनेवाली एक दीदी का मुझे फोन आया । उन्होंने कहा, ‘‘यहां की वर्तमान स्थिति देखकर मेरा मन बहुत ही विषण्ण (दु:खी) हो गया है । (उस समय पूरे विश्व में कोरोना नामक विषाणुजन्य महामारी फैली हुई थी । – संकलनकर्ता) मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है । इटली की गंभीर स्थिति पूरे विश्व को ज्ञात है । भारत में दो साधुओं की हत्या हुई, यह भी सुना । चारों ओर जो हाहाकार मचा है, उसे देखकर मैं और भी निराश हो गई हूं ।