प्रधानमंत्री मोदी के अपमान के विरुद्ध उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय की कठोर भूमिका !

‘पाकिस्तानी आतंकियों ने २२.४.२०२५ को कश्मीर के पहलगाम में हिन्दू पर्यटकों पर आतंकी आक्रमण किया, जिसमें २६ हिन्दू पर्यटकों की मृत्यु हुई । भारत ने इसका मुंहतोड उत्तर दिया ।

बंकीमचंद्र चट्टोपाध्याय ने ऐसे रचा ‘वन्दे मातरम् ।’

वर्ष १९३१ में कराची में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ । उसमें गठित उपसमिति में हिन्दू-मुसलमान सदस्य थे । चर्चा के उपरांत समिति ने ‘वन्दे मातरम्’ को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया । इस ‘वन्दे मातरम्’ की रचना का क्या इतिहास था ?, यह यहां दे रहे हैं ।

महर्षि अरविंद !

१५ अगस्त को महर्षि अरविंदजी का जन्मदिवस अर्थात उनकी जयंती ! १९वीं एवं २०वीं शताब्दी में भारतवर्ष में दो महर्षि हुए । उनमें एक थे महर्षि दयानंद सरस्वतीजी तथा दूसरे थे महर्षि अरविंद ! इसीलिए एक लोकोत्तर महर्षि के चरित्रचिंतन के लिए ही इस लेख का यह प्रयोजन है !

काम के कारण होनेवाली थकान के लिए (‘बर्न-आउट’ के लिए) क्या व्यायाम की आवश्यकता है ?

व्यायाम के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का यह प्रयास प्रेरणादायक सिद्ध होगा । इस लेख में हम ‘काम के कारण होनेवाली थकान में (बर्न-आउट में) क्या व्यायाम आवश्यक है ?’, इस विषय में समझ लेंगे ।

भाई एवं बहन के मध्य अटूट प्रेम का साक्षी ‘रक्षाबंधन’ का त्योहार !

‘रक्षाबंधन के दिन भाई की रक्षा का संकल्प साकार करने हेतु बहन भाई के घर आती है । राखी का धागा छोटासा होता है; परंतु बहन का संकल्प उसमें अद्भुत शक्ति भर देता है । ये संकल्प जितने निःस्वार्थ, निर्दाेष एवं पवित्र होते हैं, उतना ही उनका प्रभाव बढता है ।

हिन्दू जनजागृति समिति एवं सनातन संस्था की ओर से देहली, उत्तर प्रदेश एवं पूर्व-पूर्वोत्तर भारत में भावपूर्ण वातावरण में ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ संपन्न !

गुरुपूर्णिमा महोत्सव मेंं सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा, ‘‘महाभारत के समय भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि अधर्म के विरुद्ध संघर्ष करना ही धर्म है । गुरुतत्त्व को यही अपेक्षित है कि हिन्दू साधना कर आत्मिक बल बढाएं और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाएं ।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री. संजय सेठ को सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव की ओर से श्री तिरुपति बालाजी की मूर्ति, यज्ञ का प्रसाद एवं ग्रंथ भेंट !

सनातन संस्था को २५ वर्ष पूर्ण होने तथा संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के ८३वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में कुछ समय पूर्व ही गोवा में भव्य ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का आयोजन किया गया था ।

रक्षाबंधन के दिन बहन को चिरंतन ज्ञानामृत से युक्त सनातन के ग्रंथ भेंट कर, साथ ही राष्ट्र-धर्म के प्रति अभिमान बढानेवाले सनातन प्रभात का पाठक बनाकर अनोखा उपहार दीजिए !

‘श्रावण पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन ! इस वर्ष रक्षाबंधन ९.८.२०२५ को है । हिन्दू संस्कृति के अनुसार इस दिन का महत्त्व अनन्य है । इस दिन बहन अपने भाई की आरती उतारकर उसके दाहिने हाथ पर राखी बांधती है ।

‘यदि कृतज्ञभाव में रहें, तो निराशा नहीं आएगी और मन आनंदी होकर साधना और अच्छे से कर सकेंगे !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

‘साधक स्वभावदोषों की सूची लिखते हैं । वे स्वभावदोष दूर हों, इसलिए स्वसूचनाएं देते हैं । यदि साधकों ने केवल इतना ही किया होता, तो वह उपयुक्त होता; परंतु बहुत-से साधक उन स्वभावदोषों का पूरे दिन स्मरण करते रहते हैं और दुःखी होते हैं ।
कुछ साधक दूसरों के गुणों से या प्रगति से तुलना कर ‘हम उनके पीछे हैं’, ऐसा सोचकर दुःखी होते रहते हैं ।