सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘कहां अर्थ और काम पर आधारित पश्चिमी संस्कृति और कहां धर्म और मोक्ष पर आधारित हिन्दू संस्कृति ! हिन्दू पाश्‍चात्यों का अंधानुकरण कर रहे हैं, इसलिए वे तीव्र गति से विनाश की ओर बढ रहे हैं !’

सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी श्रेष्ठतम गुरुपद पर आरूढ हैं । इस पद पर स्थित होकर वे धर्मनिष्ठों का धर्मगुरु, साधकों का मार्गदर्शक गुरु, शिष्यों का आत्मगुरु व संपूर्ण विश्व का विश्वगुरु के रूप में निरंतर मार्गदर्शन कर रहे हैं ।

संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।

हमारे जीवन में गुरु का महत्त्व कितना है, यह शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता । सनातन धर्म के अनुसार गुरु का महत्त्व लौकिक दृष्टि से अल्प, तो पारमार्थिक दृष्टि से सर्वोच्च है ।

प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !

डॉ. जयंत आठवलेजी आपको मार्गदर्शक के रूप में मिले हैं; इसलिए ‘‘आप बहुत सौभाग्यशाली हैं, अतः आप उनका लाभ उठाइए’’, ऐसा प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा बताया जाना

इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !

इरोड के श्रीमहाविष्णु के कस्तूरी रंगनाथ मंदिर में २२ से २४ जून २०२६ की अवधि में ३ दिवसीय ‘महासुदर्शन याग’ तथा २५ जून २०२६ को ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के आध्यात्मिक स्तर के अनुसार, उनके विभिन्न समय के छायाचित्र से उनके सगुण-निर्गुण स्पंदनों का सद्गुरु डॉ. मुकुल गाडगीळजी द्वारा किया अभ्यास

‘जैसे-जैसे व्यक्ति का आध्यात्मिक स्तर बढता है, वैसे-वैसे उसके स्पंदनों में परिवर्तन होता है । यह परिवर्तन उसका आध्यात्मिक स्तर बढने के साथ-साथ उसके पंचतत्त्वों में होनेवाले परिवर्तन के कारण होता है ।

अधिवक्ता रामदास केसरकर द्वारा प.पू. डॉक्टरजी का द्रष्टापन अनुभव करना !

वर्ष १९९४ में द्रष्टा प.पू. डॉक्टरजी ने मुंबई के साधकों से ‘हमें एक वकील मिले हैं, जो आगे जाकर सनातन की न्यायालयीन लडाई लडेंगे’, ऐसा कहना

‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का वाक्य ब्रह्मवाक्य होता है’, इसकी १८ वर्ष उपरांत हुई प्रतीति !

वर्ष २००७ में मुंबई में आयोजित हिन्दू धर्मजागृति सभा में आईं समस्याएं बताने पर सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी द्वारा ‘उतने ही पैर पसारिए, जितनी चादर हो’, ऐसा बताकर आश्वस्त किया जाना

आतंकवादियों को ‘उग्रवादी’ सिद्ध करनेवाला मीडिया और उनका ‘फेक नैरेटिव’ !

हिन्दू राष्ट्र की दृष्टि से संविधान में परिवर्तन करने के लिए संगठित होना आवश्यक !