NCERT History Reclaimed : बाबर, औरंगजेब आदि मुगलों ने हिन्दुओं के मंदिर तोडे तथा उनके धर्मांतरण किए !

नवीनतम एन.सी.ई.आर.टी. कक्षा ८ वीं की समाजशास्त्र की पुस्तक से उपलब्ध जानकारी

(एन.सी.ई.आर.टी. का अर्थ है राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद)

नई दिल्ली: एन.सी.ई.आर.टी. की कक्षा ८ की समाजशास्त्र की नवीनतम पाठ्यपुस्तक के अनुसार, मुगल शासक बाबर अत्यंत क्रूर एवं निर्दयी था । उसने अनेक नगरों में हिन्दुओं का अत्यंत क्रूरतापूर्वक वध किया एवं उनका धर्मांतरण कराया । अकबर का शासन क्रूर एवं सहिष्णु दोनों था, जबकि औरंगजेब ने मंदिरों एवं गुरुद्वारों को नष्ट किया । इसमें मुगलों एवं मराठों के इतिहास को समाहित किया है । इस जानकारी को ‘इतिहास का काला अध्याय’ कहा गया है । उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में इतिहास की घटनाओं के लिए किसी को भी उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता ।’

१३वीं से १७वीं शताब्दी तक के इतिहास की जानकारी

इस पुस्तक में ‘भारत के राजनीतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण’ नामक एक खंड सम्मिलित है । इसमें १३वीं से १७वीं शताब्दी तक हुई प्रमुख घटनाओं का उल्लेख है । इस पुस्तक में दिल्ली साम्राज्य, विजयनगर साम्राज्य, मुगल शासन, सिखों के आगमन, सभी का उल्लेख है । ‘उस समय गांवों एवं नगरों की संरचना कैसी थी ?’ इसमें इसका भी उल्लेख किया गया है कि कैसे मुगल सेना ने अनेक गांवों एवं नगरों को लूटा, मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों को नष्ट किया ।

पुस्तक में दी गई कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

१. बाबर एक बहुत ही क्रूर शासक था । उसने नगरों पर आक्रमण किए, सहस्त्रों लोगों को मार डाला एवं महिलाओं एवं बच्चों को बंदी बना लिया ।

२. अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति मलिक काफूर ने श्रीरंगम, मदुरै, चिदंबरम एवं रामेश्वरम जैसे मंदिरों पर आक्रमण किए ।

३. औरंगजेब ने मथुरा एवं सोमनाथ में हिन्दू मंदिरों के साथ-साथ जैन मंदिर को भी नष्ट किया । उसने सिख गुरुद्वारों पर भी आक्रमण किए ।

४. मुगलों ने हिन्दुओं, बौद्धों एवं जैनियों के मंदिरों एवं मूर्तियों को नष्ट कर लूटा ।

५. हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया गया। मुगलों द्वारा हिन्दुओं का अपमान करते हुए, बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कर इस्लाम स्वीकार करने का आदेश दिया गया ।

संपादकीय भूमिका 

यह इतिहास का ‘भगवाकरण’ नहीं है, अपितु इतिहास के ‘हरित करण’ को हटाकर वास्तविक इतिहास प्रतिष्ठित करने का प्रयास है । यह तो प्रारंभ है, अभी बहुत कुछ करना शेष है !