भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए पूरा जीवन समर्पित करनेवाले बेंगलुरू (कर्नाटक) के पू. डॉ. शिवकुमार ओझाजी !

पू. डॉ. शिवकुमार ओझाजी विज्ञान के प्रसिद्ध शोधकर्ता होते हुए भी उन्होंने संस्कृत, हिन्दी, अध्यात्मशास्त्र एवं भारतीय संस्कृति के विषयों पर अनेक ग्रंथ लिखे हैं । उनके ग्रंथों में समाहित प्रत्येक पंक्ति अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । इसके कारण वे ‘कलियुग के प्रथम वेदऋषि हैं’, इसका मुझे तीव्रता से बोध हुआ ।’ 

देशविरोधी उग्रवादियों तथा आतंकियों पर लगाम लगानेवाले कूटनितिज्ञ अधिकारी : लेफ्टनंट जनरल (डॉ.) डी.बी. शेकटकर (सेवानिवृत्त) !

छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिन्दवी स्वराज के लिए जिस प्रकार उनके सैनिकों तथा सेनापतियों द्वारा किया गया त्याग सर्वोच्च है, उस प्रकार आज भी अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ तथा राष्ट्रप्रेमी नागरिक हिन्दू धर्म एवं राष्ट्र की रक्षा हेतु ‘सैनिक’ के रूप में कार्य कर रहे हैं ।

राजीव मल्होत्रा : ‍वर्तमान काल के प्रखर विद्वान तथा हिन्दुत्व के अपराजित प्रहरी !

श्री. राजीव मल्होत्रा जी ने अत्यंत परिश्रम कर हिन्दुओं को उनके धर्म का महत्त्व बताया और हिंदूविरोधकों का षड्यं‌त्र विफल किया । ३ दशकों में उन्होंने धर्म के लिए अति व्यापक वैचारिक कार्य ‍किया है ।

 हिन्दू संस्कृति के प्रसार के लिए ‘अपवर्ड फाऊंडेशन’ एवं ‘प्रग्याता’के माध्यम से कार्यरत देहली के श्री. आशीष धर !

श्री. आशीष धर एक ‘मेकैनिकल एंजिनियर’ (यांत्रिकी अभियंता) तथा सामाजिक उद्यमी हैं । (सामाजिक उद्यमी केवल लाभ के लिए कार्य नहीं करते, अपितु समाज में परिवर्तन लाना उनका मुख्य उद्देश्य होता है) श्री. आशीष धर ने भारतीय ज्ञानपरंपरा में समाहित गुलामी के प्रतीकों को मिटाकर हिन्दू संस्कृति की रक्षा हेतु समर्पित अनेक मंचों को आकार दिया है ।

धर्म एवं संस्कृति के पुनरजीवन के लिए समर्पित भाव से कार्य करनेवाले राहुल दीवान !

‘संगम टॉक्स’ हिन्दू धर्म एवं संस्कृति की रक्षा, इतिहास, तत्त्वज्ञान, विरासत, भारतीय ज्ञान प्रणाली, विज्ञान, गणित, अर्थशास्त्र, कला, पर्यावरण एवं प्रवास इत्यादि के लिए एक बडा व्यासपीठ बन गया है ।

बंगाल में योद्धासंन्यासी पद्मश्री स्वामी प्रदीप्तानंद महाराजजी !

भारत सेवाश्रम संघ के स्वामी प्रदीप्तानंद महाराजजी उपाख्य कार्तिक महाराजजी किशोरावस्था में भारत सेवाश्रम संघ की ओर आकर्षित हुए ।

‘प्राच्यम् स्टुडियो’ के, अर्थात जगत के प्रथम ‘हिन्दू ओटीटी’के उद्गाता एवं ‘निर्भय हिन्दुत्वयोद्धा’ कैप्टन प्रवीण चतुर्वेदी (निवृत्त) !

हिन्दू धर्म पर होनेवाले जागतिक आक्रमणों का सामना करने के लिए धार्मिकता एवं आध्यात्मिकता का मिलाप कर संगठितरूप से उसका सामना करना चाहिए ।

कर्नाटक विधान परिषद की पूर्व सदस्या डॉ. एस्.आर्. लीला : हिन्दू संस्कृति की रक्षा का कार्य करनेवाली आधुनिक रणरागिनी !

डॉ. लीला का जन्म १७ जनवरी १९५० को कर्नाटक के कोलार जिले के मालूर तहसील में स्थित संपंगेरे गांव में हुआ । उन्होंने संस्कृत में एम्.ए. एम्.फील एवं पीएच. डी की उपाधियां प्राप्त की ।

हिन्दुत्व, धर्म, अध्यात्म, क्रांतिकारियों एवं राष्ट्र इन पर आंधी के समान प्रखर भाष्य करनेवाले व्याख्याता डॉ. सच्चिदानंद सुरेश शेवडे !

डोंबिवली के डॉ. सच्चिदानंद सुरेश शेवडे भारताचार्य पू. (प्रा.) सु.ग. शेवडेजी (आयु ८९ वर्ष) के (वर्तमान समय में रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में निवास) बडे पुत्र हैं । डॉ. सच्चिदानंद शेवडे राष्ट्र एवं धर्म के विषय पर आधारित विभिन्न पुस्तकें लिखने के साथ ही, वे विभिन्न विषयों पर आधारित परिचर्चाओं में भी भाग लेते हैं ।

हिन्दू धर्म, मंदिरों की रक्षा के साथ ‘लव जिहाद’ के विरोध में तथा जातिभेद मिटाने के लिए कार्य करनेवाले कर्नाटक के प्रखर वक्ता श्री. चक्रवर्ती सुलीबेले !

श्री. चक्रवर्ती सुलीबेले कर्नाटक के प्रसिद्ध विचारक, लेखक तथा प्रखर वक्ता हैं । उनके देशप्रेम, सामाजिक जागृति तथा युवकों को प्रेरणा देने के कार्य के लिए वे कर्नाटक में जाने जाते हैं । वे ‘युवा ब्रिगेड’ नामक संस्था के माध्यम से १० वर्षों से कार्य कर रहे हैं ।