‘Kar Seva’ Mathura : श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए ९ अगस्त को कारसेवा होगी ।

  • ‘अब नहीं, तो कभी नहीं ’ - हरिद्वार में ६०० से ७०० संतों की बैठक में उद्घोषणा

  • प्रकरण के न्यायालय के विचाराधीन (न्यायप्रविष्ट) होने का तर्क देकर विहिप ने कारसेवा से दूरी बनाई ।

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की ।

(‘कारसेवा’ अर्थात् श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्राप्ति के लिए संघर्ष)

मथुरा (उत्तर प्रदेश) – यहां की श्रीकृष्ण जन्मभूमि तथा शाही ईदगाह मस्जिद विवाद को लेकर संतों ने आगामी ९ अगस्त को कारसेवा करने की घोषणा की है । यहां श्रीकृष्ण का जन्म जिस स्थान पर हुआ था, उसी स्थान पर ईदगाह मस्जिद का निर्माण किया गया है । संतों के इस आह्वान से विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने आधिकारिक रूप से दूरी बना ली है । विहिप के ब्रज प्रांत अध्यक्ष कन्हैयालाल अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि यह प्रकरण वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के विचाराधीन है, अतः संतों को विधिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए । (श्रीराम जन्मभूमि का प्रकरण जब न्यायालय के विचाराधीन था, तब भी विहिप ने वहां कारसेवा करने की घोषणा की थी । इसलिए श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विषय में यह भूमिका यदि किसी को भिन्न प्रतीत हो, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए – संपादक) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा इस आह्वान पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई है । इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है ।

चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने इस कारसेवा में सम्मिलित होने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों से भी एकत्रित होने का आह्वान किया है । अखिल भारतीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने भी इस कारसेवा का समर्थन किया है तथा समस्त भक्तों से ‘चलो मथुरा चलें’ का आह्वान किया है । काली सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप ने ९ अगस्त की कारसेवा के समर्थन में देश भर के संतों से संगठित होने का आह्वान किया है । हरिद्वार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के पश्चात् संतों ने ‘अब नहीं, तो कभी नहीं’ की उद्घोषणा की । इस बैठक में महंत रवींद्र पुरी, आनंद अखाडे के महामंडलेश्वर जगद्गुरु स्वामी सच्चिदानंद तथा स्वामी बालकानंद मुख्य रूप से उपस्थित थे ।

स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने मथुरा के निर्मोही अखाडे में संतों के साथ बैठक कर कारसेवा की रणनीति निर्धारित की है । निर्मोही अखाडे के संतों ने भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति अभियान का समर्थन किया है । इस बैठक के उपरांत कारसेवा से संबंधित भित्तिचित्र (पोस्टर) भी प्रसारित किए गए हैं । स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा कि अगस्त क्रांति का मास है । हमने वर्ष १९९० में भगवान श्री रामलला के लिए हुई कारसेवा की पद्धति पर ही श्रीकृष्ण की मुक्ति के लिए आंदोलन की सिद्धता (तैयारी) की है । प्रारंभ में ‘बृजवासी कारसेवा’ होगी । ब्रज के लोग बांके बिहारी के लिए एकत्रित होंगे एवं तत्पश्चात् अन्य स्थानों के लोग आकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त करेंगे ।

अखिलेश यादव भी आंदोलन का भाग बनें – सीताराम दास महाराज

निर्मोही अखाडे के राष्ट्रीय प्रवक्ता संत सीताराम दास महाराज

निर्मोही अखाडे के राष्ट्रीय प्रवक्ता संत सीताराम दास महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए समस्त सनातनी हिन्दुओं को एकत्रित होना होगा । समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव श्रीकृष्ण के वंशज हैं । अतः उन्हें भी इस आंदोलन का भाग बनना चाहिए ।

मथुरा में कारसेवा की घोषणा को अयोध्या के संत समाज का समर्थन ।

अयोध्या के संत समाज ने कारसेवा की घोषणा का स्वागत किया है । जिस प्रकार अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ है, उसी पद्धति पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भी भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा, ऐसा विश्वास साधु-संतों ने व्यक्त किया है । अयोध्या के साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने कहा कि जिस प्रकार कारसेवकों तथा संतों ने अयोध्या में कारसेवा करके विवादित ढांचे को ध्वस्त किया था, उसी प्रकार के आंदोलन का समय अब आ गया है । यह सनातनियों की श्रद्धा का विषय है ।

श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी महंत सत्येंद्र दास जी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार संतों ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का प्रारंभ किया था तथा आज ५०० वर्षों का कलंक मिटाकर अयोध्या में भव्य मंदिर साकार हुआ है, उसी भावना से अयोध्या के संतों ने देश भर के संतों के साथ मथुरा के लिए भी निर्णय लिया है ।

प्रसिद्ध कथावाचक चंद्रांशु महाराज ने कहा कि हम सदैव ‘अयोध्या तो केवल झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है’ ऐसे उद्घोष करते आए हैं । अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण हो चुका है तथा अब अगला प्रस्थान पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के लिए है ।

यदि सरकार ने मंदिर निर्माण की घोषणा की, तो कारसेवा की आवश्यकता नहीं होगी ।

स्वामी आनंद स्वरूप ने स्पष्ट किया कि ९ अगस्त का दिन देश में ‘क्रांति दिन’ के रूप में मनाया जाता है । इसलिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है । यदि सरकार ने इससे पूर्व ही मंदिर निर्माण की आधिकारिक घोषणा कर दी, तो कारसेवा की आवश्यकता नहीं होगी । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व में ही कहा है कि श्रीकृष्ण मंदिर निश्चित रूप से निर्मित होगा । यदि ९ अगस्त से पूर्व इसकी तिथि घोषित नहीं की गई, तो संत समाज कारसेवा के माध्यम से शांतिपूर्ण मार्ग से अपनी भावनाएं व्यक्त करेगा । इस कारसेवा के लिए केवल हरिद्वार से ही ६०० से ७०० संत मथुरा जाएंगे ।

सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन

श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है । इसके साथ ही, संबंधित १८ वादों (मुकदमों) की सुनवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भी चल रही है, जिसमें शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने तथा मंदिर की पुनर्स्थापना करने की मांग की गई है ।