सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कहां प्रत्येक क्षेत्र में सर्वाेच्च स्तर का ज्ञान देनेवाला हिन्दू धर्म, तो कहां आंगनबाडी की भांति शिक्षा देनेवाले पाश्चात्य देश !
कहां प्रत्येक क्षेत्र में सर्वाेच्च स्तर का ज्ञान देनेवाला हिन्दू धर्म, तो कहां आंगनबाडी की भांति शिक्षा देनेवाले पाश्चात्य देश !
‘वर्तमान विद्यालयीन शिक्षा में स्वभावदोषों एवं दुर्गुणों पर कैसे विजय प्राप्त करनी चाहिए, इस विषय में कभी भी सिखाया नहीं जाता । यह वर्तमान शिक्षाप्रणाली का प्रमुख दोष है । अभिभावको, सनातन संस्था अपने बालसंस्कारवर्गाें के माध्यम से यह सिखा रही है ।’
अनुकूलता में कृपा एवं प्रतिकूलता में परम कृपा होती है !
‘हिन्दुओ, गत ९०० वर्षों की परतंत्रता का लज्जाजनक इतिहास मिटाने के लिए अब जागृत हो जाओ !’
‘बुद्धिप्रमाणवादियो में जिज्ञासा न होने से, उन्हें जितना ज्ञान है, उतने तक ही वे स्वयं को सीमित रखते हैं । उन्हें आगे की सूक्ष्म या उच्च बातों का ज्ञान नहीं हो पाता ।’
नववर्ष के शुभ मुहूर्त पर आइए, घर के बाहर ब्रह्मध्वज स्थापित करने के साथ-साथ रामराज्य के सिद्धांतों पर आधारित राष्ट्ररचना के लिए योगदान देने और साधना करने का संकल्प लें ।
‘बंगाल एवं केरल के हिन्दुओं ने ३० वर्ष से भी अधिक समय से साम्यवाद का स्वीकार किया है; इसलिए वे हिन्दुत्व से दूर हो गए । अत: उनमें धर्माभिमान नहीं बचा । इसलिए आज की स्थिति में वे मुसलमानों तथा ईसाइयों के आक्रमणों का सामना नहीं कर पा रहे हैं ।’
‘एक एटम बम में लाखों बंदूकों का सामर्थ्य होता है, उसी प्रकार आध्यात्मिक बल में भौतिक, शारीरिक एवं मानसिक बल सेअनंत गुना सामर्थ्य होता है । इसी कारण धर्मप्रेमी यह चिंता न करें कि‘संख्याबल अल्प होने पर भी हिन्दू राष्ट्र कैसे साकार होगा ?’
बंदूकें, बारूद विमान आदि सबकुछ आयात किया जा सकता है; परंतु राष्ट्रप्रेमी एवं धर्मप्रेमी नेता कहां से आयात करें ?’’
‘मानव का जन्म क्यों हुआ ? जन्म के पूर्व वह कहां था ? मृत्यु के उपरांत वह कहां जाएगा ? इत्यादि विषयों की थोडी-बहुत भी जानकारी न रखनेवाले पश्चिमी तथा साम्यवादी क्या कभी मानवजाति की समस्याएं दूर कर पाएंगे ?