संपादकीय : राष्ट्र के लिए त्याग करें !

प्रधानमंत्री द्वारा किए गए आवाहन का कार्यान्वयन केवल दिखावे के लिए न कर, अपितु उसका अनुकरण कर राष्ट्रहित का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए !

भाजपा की भी कल्पना से परे, इस प्रकार हुआ बांग्ला हिन्दुओं का ‘संगठित’ मतदान !

कुछ ही दिन पूर्व बंगाल विधानसभा चुनाव में १५ वर्ष सत्ता में रही तथा कट्टर हिन्दूद्वेषी राजनीतिक दल तृणमूल कांग्रेस की अर्थात ममता बनर्जी की करारी हार हुई । बंगाल के लोगों ने २९४ में से २०६ सीटों पर अर्थात ७१ प्रतिशत सीटों पर भाजपा को जिताया ।

हिन्दूबहुल तमिलनाडु में हिन्दूजागृति की आवश्यकता !

तमिल लोगों ने सनातन धर्म का बहुत अनुकरण किया है । वहां ८० प्रतिशत हिन्दू, १३ प्रतिशत मुसलमान और ७ प्रतिशत लोग ईसाई हैं । वहां के हिन्दुओं को यह समझ ही नहीं आता कि वे ‘हिन्दू’ हैं । वे गर्व से बताते हैं कि ‘हम तमिल हैं’ । तमिल और हिन्दू  में कोई भेद नहीं है; परंतु सभी राजनीतिक दल उन्हें बताते हैं कि ‘तमिल हिन्दुओं से अलग हैं’ ।

यज्ञसंस्कृति को पुनर्जीवित करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी !

किसी भी कार्य को गति देने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है । रामराज्य की स्थापना की प्रक्रिया मुख्य रूप से आध्यात्मिक स्तर से संबंधित होने के कारण रामराज्य की स्थापना को गति देने के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा ही आवश्यक है ।

राजमातंगीदेवी के विषय में

देवी मातंगी आदिशक्ति की प्रधानमंत्री होने के कारण उन्हें ‘राजमातंगी’ कहा गया है । वर्तमान में संपूर्ण विश्व पर युद्ध का संकट मंडरा रहा है । ऐसे समय में तपोभूमि भारत की रक्षा के लिए ‘राजमातंगी’ देवी का कवच अत्यंत आवश्यक है ।

मुंबई में ‘शंखनाद महोत्सव’ करने समान ही फल श्री राजमातंगी महायज्ञ से प्राप्त हुआ है !

देश की सुरक्षा के लिए किया गया यह यज्ञ, एक प्रकार से महामृत्युंजय यज्ञ ही था; क्योंकि इस यज्ञ के माध्यम से गुरुदेवजी ने आनेवाले युद्धकाल के लिए साधकों को आवश्यक मृत्युंजय कवच प्रदान किया और राष्ट्र को भी कवच प्रदान किया । मुंबई में ‘शंखनाद महोत्सव’ करने समान ही फल इस यज्ञ से प्राप्त हुआ है ।

यज्ञ करने के पीछे सच्चिदानंद परब्रह्म डॉक्टरजी का व्यापक एवं उदार उद्देश्य !

वैदिक धर्मपरंपरा में यज्ञ केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं है, अपितु उसे समष्टि के कल्याण हेतु दिव्य साधना माना गया है । हमारे ऋषि-मुनियों ने यज्ञसंस्कृति के द्वारा विश्वकल्याण का मार्ग दिखाया । उस परंपरा को आगे बढाते हुए गुरुदेवजी ने अब तक विभिन्न यज्ञों का आयोजन किया है ।

गोवंश की हत्या के विरोध में उत्तर प्रदेश पुलिस, प्रशासन एवं उच्च न्यायालय की उचित भूमिका !

इस प्रकरण की विशेषता यह है कि जंगल में घटित गोवंश की हत्या के विषय में भी उत्तर प्रदेश के हिन्दुत्वनिष्ठों ने जागरूकता से आंदोलन किया । उसका संज्ञान लेते हुए पुलिस एवं प्रशासन ने आरोपियों पर तुरंत बंदी बनाने की कार्रवाई की । दुर्भाग्य से महाराष्ट्र में ऐसा होना दुर्लभ है ।’

वास्तु लाभकारी होने के लिए ध्यान में रखने योग्य सूत्र !

कुंडली अर्थात हमारे जन्म के समय आकाश की ग्रहस्थिति का मानचित्र ! उसमें हम परिवर्तन नहीं कर सकते । वह हमारे जीवन के अंत तक वैसी ही बनी रहती है; परंतु हम वास्तु में अपने लिए अनुकूल परिवर्तन कर उसे लाभकारी बना सकते हैं ।

वास्तु में सनातन-निर्मित ‘वास्तुशुद्धि संच’ अवश्य लगाएं !

सनातन संस्था ने अध्यात्मशास्त्रीय प्रयोगों द्वारा शोधकार्य कर देवताओं की सात्त्विक नामजप पट्टियों की निर्मिति की है, जिनका उपयोग वास्तुशुद्धि हेतु किया जा सकता है ।