केरल में दीपप्रज्वलन का विवाद : राष्ट्रीय व्यक्तित्व की आत्मा संस्कृति है या धर्म ?
भारतीय संस्कृति विशिष्ट है । यह भूमि पौरात्य धर्मों और पंथों की जन्मभूमि होने के कारण यहां उन धर्म-पंथों के अनुकूल संस्कृति का होना स्वाभाविक है । फिर यहां अन्य धर्मावलंबियों को संविधान द्वारा भी अच्छा संरक्षण प्राप्त है । भारत में तीन मुसलमान राष्ट्रपति हुए हैं, इससे यह बात स्पष्ट होनी चाहिए ।
हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए आदर्श जीवन-पद्धति का महत्त्व !
‘हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं को साधना का स्तर बढाना चाहिए । मेरे गुरुदेव ने मुझसे कहा, ‘आप स्वरक्षा प्रशिक्षण देते हैं; परंतु एक कार्य और करना चाहिए । यदि हम केवल एक हाथ में भाला लेकर निकलेंगे, तो हमारा कल्याण नहीं होगा । हमें दूसरे हाथ में जपमाला लेकर भी चलना चाहिए ।’
श्रीकृष्ण नीति एवं लडाकू वृत्ति के माध्यम से हिन्दू धर्म की रक्षा !
हिन्दू स्त्रियों पर प्रतिदिन इतने अत्याचार हो रहे हैं, तब भी हिन्दू समाज की ओर से विशेष प्रतिकार होता हुआ दिखाई नहीं देता; क्योंकि हम इस शिक्षा को पूर्णतः भूल चुके हैं । अब पुनः उसकी ओर लौटने का समय आ गया है । जब तक हम लडाकू वृत्ति का विकास नहीं करेंगे, तब तक हमें मुक्ति नहीं मिलेगी । इसके लिए अपने बच्चों को सैन्य प्रशिक्षण देना आवश्यक है ।
अमेजन के ’अमेजन नाउ’ विज्ञापन द्वारा महान वैज्ञानिक आर्यभट्ट का अक्षम्य अपमान !
इस विज्ञापन के कारण भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक धरोहर पर गर्व करनेवाले नागरिकों में तीव्र आक्रोश की लहर दौड गई है ।
धर्मांतरण रोकने में मठ और मंदिरों का योगदान !
शुद्ध कर्म, ज्ञान और भक्ति से ही हिन्दू राष्ट्र की स्थापना संभव !
ध्यान के प्रमुख शारीरिक उपयोग !
ध्यान के कारण शरीर में स्थित ‘स्ट्रेस हार्माेन’ (मानवीय शरीर में तनाव उत्पन्न करनेवाला संप्रेरक) ‘कोर्टिसोल’ का स्तर अल्प होता है । इससे चिंता, निराशा एवं चिढचिढाहट दूर होने में सहायता मिलती है ।
आंखों का स्वास्थ्य सुधारने हेतु तलवों को घी लगाएं !
प्रतिदिन रात को सोने से पूर्व तलवों को आधा चम्मच देसी गाय के घर में बने घी से ५ मिनट तक मालिश करें । इससे आंखों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है, शांत नींद भी आती है ।
भारत पहले से ही जिस जीवन-पद्धति का पालन करता आया है, वही अब पाश्चात्य देश खोजकर अपना रहे हैं !
यह स्वास्थ्यविज्ञान मेरे लिए प्रयोगशाला में आरंभ नहीं हुआ था । इसका आरंभ मेरी अपनी दादी की शांत अनुशासित दिनचर्या से हुई थी । प्रतिदिन वे प्रातः ४ बजे से पहले उठ जाती थीं ।