अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास का महत्त्व !

अधिक मास आत्मशुद्धि एवं परोपकार के लिए विशेष काल होता है । इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि इस वर्ष का ज्येष्ठ अधिक मास आध्यात्मिक साधना, भक्ति, व्रत, उपवास, त्योहार, स्वास्थ्य एवं परोपकार इत्यादि के दृष्टिकोण से विशेष लाभकारी है ।

अक्षय तृतीया विशेष

इस दिन की जानेवाली कृतियों का क्षय न होकर वे बढती हैं; इसलिए इस दिन सोना, चांदी इत्यादि मूल्यवान वस्तुएं खरीदी जाती हैं, साथ ही इस दिन नया व्यवसाय आरंभ करना अथवा दान देना श्रेष्ठ माना जाता है ।

अक्षय तृतीया का त्योहार कैसे मनाया जाए ?

अक्षय तृतीया के दिन पवित्र जल में स्नान, भगवान श्रीविष्णु की पूजा, जप, होम, दान एवं पितृ-तर्पण किया जाता है । इस दिन ‘अपिंडक श्राद्ध’ करना चाहिए और यदि वह संभव न हो, तो कम से कम तिल-तर्पण अवश्य करना चाहिए ।

अक्षय तृतीया एवं खेती !

अक्षय तृतीया वर्षा ऋतु के कुछ दिन पूर्व आती है । महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में गुढीपडवा के शुभमुहूर्त पर हल चलाई कृषिभूमि में जोताई पूर्ण करने की प्रथा है ।

अक्षय तृतीया के दिन पुण्य कैसे  प्राप्त किया जा सकता है ?

वैशाख शुक्ल तृतीया अर्थात अक्षय तृतीया ! हिन्दू धर्म में यह एक पवित्र एवं महत्त्वपूर्ण त्योहार माना जाता है । इस वर्ष १९ अप्रैल को अक्षय तृतीया है ।

हनुमानजी का पंचमहाभूतों से संबंधित कार्य तथा उनकी आध्यात्मिक विशेषताएं

हनुमानजी ११वें रुद्र हैं तथा वे शिवस्वरूप हैं । त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम के अवतारी कार्य में सहभागी होकर श्रीराम की सहायता करने हेतु शिवजी ने हनुमानजी का अवतार धारण किया था ।

नव संवत्सर

नवीन वस्तु की खरीदारी, व्यवसाय का प्रारंभ, नव उपक्रमों का प्रारंभ, स्वर्ण की खरीदारी इत्यादि कार्य किए जाते हैं । माना जाता है कि द्वार पर लगाई गई ध्वजा विजय    एवं समृद्धि का प्रतीक है । १९ मार्च के दिन नव संवत्सरारंभ दिन है । उस सन्दर्भ में जानकारी इस विशेषांक में दी गई है ।

होली का इतिहास, मनाने की विधि एवं उसके विषय में किए जानेवाले दुष्प्रचार का खंडन

दुष्ट प्रवृत्तियों एवं अमंगल विचारों का नाश कर सत्प्रवृत्ति का मार्ग दिखानेवाला उत्सव है होली !

शिवजी को बिल्वपत्र अर्पित करने की पद्धति का अध्यात्मशास्त्रीय आधार

बिल्वपत्र तारक शिवतत्त्व का वाहक है और बिल्वपत्र का डंठल मारक शिवतत्त्व का वाहक है ।

महादेव को त्रिपुंड क्यों लगाते हैं ?

शिवशंकर की पूजा में भक्तगण त्रिपुंड अवश्य लगाते हैं । शिवलिंग पर त्रिपुंड सदैव देखने को मिलता है ।