यदि मुसलमान अपने पूर्वजों की परंपराओं को स्वीकार करें, तो उन्हें हिन्दू राष्ट्र में किसी प्रकार का कोई संकट नहीं होगा ! – Yogrishi Ramdev baba

  • योगऋषि रामदेव बाबा का मुसलमानों से आह्वान l

  • मुस्लिम धर्मगुरुओं, राजनीतिक नेताओं और संगठनों ने इस वक्तव्य का विरोध किया ।

योगऋषि रामदेवबाबा

नई दिल्ली – कुछ लोग कहते हैं, “यदि हिन्दू राष्ट्र बन गया, तो मुसलमान कहां जाएंगे ?” मैं उनसे कहूंगा कि मुसलमान अपने पूर्वजों की परंपराओं को अपनाएं । जो अपने बाप (पूर्वजों) का नहीं हो सका, वह किसी का भी नहीं हो सकता । अपने पूर्वजों और ऋषि-मुनियों की परंपरा का सम्मान करें । आप दाढी रखें, मूंछें काटें, जैसी चाहें टोपी पहनें, जैसी चाहें पगडी बांधें, कोई भी वस्त्र धारण करें; परंतु आपका चरित्र आपके पूर्वजों जैसा होना चाहिए । तब भारत में मुसलमानों को किसी प्रकार का कोई संकट नहीं होगा । यह बात योगऋषि रामदेव बाबा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में कही ।

हम सबके पूर्वज सनातनी हिन्दू हैं !

रामदेव बाबा ने आगे कहा कि हरिद्वार के निकट स्थित देवबंद मदरसे में उन्हें वर्ष २००९ में आमंत्रित किया गया था । वहां उन्होंने कहा था कि हमारे धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं । जब हम प्रवेश द्वार से अंदर आए, तो वहां भी लिखा था और यहां भी लिखा है कि हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा से किसी को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है । हम सबके पूर्वज सनातनी हिन्दू हैं ।

(और इनकी सुनिए…) “भारत हिन्दू राष्ट्र नहीं है !” – नसीम सिद्दीकी

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने कहा कि मैं इस वक्तव्य की कडी आलोचना करता हूं । सबसे पहले, भारत हिन्दू राष्ट्र नहीं है । भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जो सभी धर्मों के समान सम्मान के सिद्धांत पर आधारित है । प्रत्येक व्यक्ति को अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करने की पूर्ण स्वतंत्रता है । इस प्रकार के बयान देश की एकता और अखंडता के लिए गंभीर संकट उत्पन्न करते हैं ।

(और इनकी सुनिए…) “शायद रामदेव बाबा स्वयं ही डरे हुए हैं !” – जमीयत उलेमा-ए-हिन्द

जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना सिराज खान ने कहा कि कौन डरा हुआ है ? किसे भय है ? शायद रामदेव बाबा स्वयं ही डरे हुए हैं । यह देश संविधान के अनुसार चलेगा । (यदि भविष्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से संविधान में संशोधन कर भारत को “हिन्दू राष्ट्र” घोषित किया जाए, तो क्या यही लोग उसका पालन करेंगे ? संविधान की आड लेकर मनचाहा आचरण करने की स्वतंत्रता अब तक ली जाती रही है । पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर होनेवाले अत्याचारों पर ये लोग क्यों नहीं बोलते ? – संपादक) किसी को भी इसके विरुद्ध बोलने का अधिकार नहीं है । सबसे पहले तो यह प्रश्न है कि ऐसे बयान देनेवाले वे होते कौन हैं ? उनकी बात को गंभीरता से लेने का कोई कारण नहीं है ।

धर्म के आधार पर होनेवाले भेदभाव का हमने हमेशा विरोध किया है ! – मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली

लखनऊ (उत्तर प्रदेश) स्थित ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि मुसलमान कभी डरते नहीं हैं और न ही विचलित होते हैं, क्योंकि वे अल्लाह की इबादत करते हैं । वास्तव में सभी मनुष्यों के पूर्वज एक ही हैं । हमने हमेशा धर्म के आधार पर होनेवाले भेदभाव का विरोध किया है । उत्तराखंड में मस्जिदें गिराए जाने और मदरसा बोर्ड समाप्त किए जाने से मुसलमानों को अत्यधिक पीडा और कष्ट हो रहे हैं । (यदि अवैध निर्माण हटाए जा रहे हैं, तो उससे मुसलमानों को कष्ट क्यों हो रहा है ? क्या वे संविधान का सम्मान नहीं करते ? – संपादक)

(और इनकी सुनिए…) “हमारा विचार वही है, जो संविधान कहता है !” – कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि यदि सभी पहले सनातनी ही थे, तो फिर समाज में इस प्रकार की खाई उत्पन्न करने का प्रयास क्यों किया जा रहा है ? मैं कांग्रेस की विचारधारा के अतिरिक्त किसी अन्य विचार से सहमत नहीं हूं । हमारा विचार वही है, जो संविधान कहता है । हमें संविधान पर पूर्ण विश्वास है और पूरे देश को भी उस पर विश्वास है । उसमें सभी लोगों की आस्था समाहित है । (सुविधा के अनुसार संविधान का समर्थन करनेवाले ढोंगी मुसलमान ! – संपादक)

संपादकीय भूमिका

  • भारत का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था और मुसलमानों की मांग पर उन्हें पाकिस्तान दिया गया । शेष भारत हिन्दुओं का राष्ट्र रहा । तत्पश्चात कांग्रेस ने उसे तकनीकी रूप से धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाया । आनेवाले वर्षों में भारत आधिकारिक रूप से हिन्दू राष्ट्र बनेगा, यह मुसलमानों को ध्यान में रखना चाहिए ।
  • वर्तमान मुसलमानों के हिन्दू पूर्वजों ने भयवश इस्लाम स्वीकार किया था, यह इतिहास का विषय है और अधिकांश मुसलमान इससे परिचित हैं । ऐसे में वे कब तक इस धार्मिक गुलामी का बोझ उठाते रहेंगे और पिछडे रहेंगे ? अब उन्हें इस पर विचार करने का समय आ गया है ।