हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के लिए यज्ञ समारोह एवं समष्टि धर्मप्रसार !

श्री राजमातंगी महायज्ञ का फल आगामी युद्ध काल में भारत की रक्षा होने पर सभी को दिखाई देगा ! आदिशक्ति की ‘प्रधानमंत्री’ श्री राजमातंगी देवी ने इस यज्ञ के माध्यम से जो आध्यात्मिक तेज एवं ओज प्रदान किया, वह राष्ट्र को विजयपथ पर ले जाएगा !

विश्वकल्याण के लिए हिन्दू राष्ट्र का उद्घोष करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी का संक्षिप्त चरित्र

आनंदमय जीवन के लिए साधना, साथ ही राष्ट्र एवं धर्मकार्य करने हेतु प्रेरणा एवं दिशा प्रदान करनेवाला यह ग्रंथ एक चैतन्यमय प्रासादिक धरोहर ही है ! 

‘पितांबरी’ उद्योगसमूह के प्रबंध निदेशक डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई की कृषि विषयक पुस्तकों का राज्यपाल के हाथों विमोचन ।

प्रगतिशील खेती के नए-नए प्रयोगों को समाहित करनेवाली ये पुस्तकें आधुनिक खेती के लिए युवाओं को प्रेरित करनेवाली हैं ।

इंद्रप्रस्थ सांस्कृतिक महोत्सव में सनातन संस्था की ग्रंथ-प्रदर्शनी को जिज्ञासुओं ने दिया उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर

‘संगम टॉक्स’ के श्री. राहुल दीवान एवं ‘गरुड प्रकाशन’ के श्री. संक्रांत सानू के अथक प्रयासों से देहली में पहली बार आयोजित इस महोत्सव के कारण राजधानी के नागरिकों को उनकी जडों से जुड जाने का अवसर प्राप्त हुआ ।

धार्मिक कृत्य उचित पद्धति से करने हेतु मार्गदर्शक सनातन के ग्रंथ !

पंचोपचार एवं षोडशोपचार पूजन का अध्यात्मशास्त्रीय आधार, देवालय में देवता के प्रत्यक्ष दर्शन से पूर्व के कृत्यों का अध्यात्मशास्त्र

अधिक मास में सनातन संस्था के ग्रंथ और लघुग्रंथ अन्यों को देकर सर्वश्रेष्ठ ज्ञानदान का फल प्राप्त करें !

शास्त्रकारों ने बताया है कि ‘अधिक मास में मंगलकार्य न कर विशेष व्रत और पुण्यदायी कृत्य करने चाहिए ।’ इस मास में दान देने से उसका अनेक गुना फल मिलता है । इसलिए इस काल में वस्त्रदान, अन्नदान एवं ज्ञानदान करने का विशेष महत्त्व है । भारतीय संस्कृति में ‘ज्ञानदान देना’, सर्वश्रेष्ठ माना गया है; इसलिए अनेक लोग इसके लिए प्रयासरत रहते हैं ।

मथुरा में आयोजित ‘विशाल नववर्ष मेले’ में सनातन संस्था की ओर से प्रदर्शनी का आयोजन !

इस प्रदर्शनी में प्रतिकात्मक ब्रह्मध्वज लगाए गए तथा उसके माध्यम से शास्त्र के अनुसार नववर्ष कैसे मनाना चाहिए ?, इस विषय में उद्बोधन किया गया ।

त्योहार मनाने की उचित पद्धतियां एवं अध्यात्मशास्त्र

हिन्दू धर्म के त्योहार, उत्सव एवं व्रतों के विषयों में धर्मशास्त्र सिखानेवाला सनातन का ग्रंथ !

सनातन के ग्रंथों-लघुग्रंथों की १ करोड से अधिक प्रतियां प्रकाशित !

मार्च २०२६ तक हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी, गुजराती, कन्नड, तेलुगु, मलयालम, बांग्ला, ओडिया, असमिया, पंजाबी एवं नेपाली, इन १३ भाषाओं में सनातन के ३७० ग्रंथ-लघुग्रंथ प्रकाशित हुए हैं तथा उनकी १ करोड २ लाख प्रतियां प्रकाशित हुई हैं ।

फरीदाबाद (हरियाणा) में रा.स्व. संघ की ओर से आयोजित हिन्दू अधिवेशन में सनातन संस्था के ग्रंथों एवं सात्त्विक उत्पादों की प्रदर्शनी का आयोजन

पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने सनातन संस्था की प्रदर्शनी से ग्रंथ एवं सात्त्विक उत्पाद खरीदे, साथ ही अन्य अनेक लोगों ने भी इसका सकारात्मक प्रत्युत्तर किया ।