मंदिरों की भूमि अधिग्रहित करनेवालों को ‘गुंडा कानून’ के अंतर्गत बेडियां पहनाएं !

मंदिरों के धन का अनुचित उपयोग करना भी एक अपराध ही है । राज्य सरकार को इस विषय में संबंधित लोगों के विरुद्ध अपराध प्रविष्ट कर अभियोग चलाना चाहिए ।

मध्य प्रदेश के शंकरपुर में सरकारीकरण किए गए मंदिर की भूमि की अवैध बिक्री !

जानिए मंदिर सरकारीकरण के दुष्परिणाम ! न केवल मध्य प्रदेश में, अपितु, भारत भर में अनेक मंदिरों की भूमि को इस प्रकार हडपा जा रहा है । इस कदाचार को रोकने के लिए, मंदिरों का सरकारीकरण समाप्त होना चाहिए !

(कहते हैं) तमिलनाडू के मंदिरों का सोना बैंकों में रखकर, उससे मिलनेवाले ब्याज की राशि का उपयोग मंदिरों के मौलिक सुविधाओं के लिए किया जाएगा !’ – पी.के. सेकरबाबू

मस्जिदों और चर्च का सरकारीकरण कर, उससे प्राप्त धन का उपयोग मौलिक सुविधाओं के लिए करने का विचार धर्मनिरपेक्ष सरकारों द्वारा क्यों नहीं किया जाता ? क्या द्रमुक की सरकार इसका उत्तर देगी ?

मल्लपुरम (तमिलनाडु) में, श्री थलसायाना पेरुमल के प्राचीन मंदिर के सानिध्य में शौचालय बनाने का षड्यंत्र !

तमिलनाडु में मनमानी से मंदिरों के संबंध में निर्णय लेने वाली द्रमुक सरकार का निषेध । तमिलनाडु में हिन्दुओं को इसके विरोध में संगठित होकर संवैधानिक मार्ग से लडना चाहिए !

राजस्थान के मंदिरों के सरकारीकरण के विरोध में आंदोलन करेंगे ! – श्री राजपूत करणी सेना की घोषणा

मंदिर सरकारीकरण के विरोध में आंदोलन करने का निर्णय लेने वाली श्री राजपूत करणी सेना का अभिनंदन ! मंदिरों का सरकारीकरण कर उसकी आय पर डाका मारने की इच्छा रखने वाली कांग्रेस सरकार के विरोध में हिन्दुओं का संगठित होना आवश्यक !

चारधाम का प्रस्तावित सरकारीकरण रद्द करने की मांग

हिन्दुओं के मंदिरों का सरकारीकरण करने वाले चर्च और मस्जिद का सरकारीकरण करने का साहस क्यों नही दिखाते ?

मद्रास उच्च न्यायालय ने मंदिरों में मुख्य पुजारियों की नियुक्ति का प्रकरण ‘यथावत’ रखने का आदेश दिया  !

ध्यान रखें, जब मंदिरों का सरकारीकरण हो जाता है, तब किसी को भी मंदिर का पुजारी एवं सेवक नियुक्त कर, सरकार हिन्दू परंपराओं का हनन करती है !

महंत श्री किशोर पुरी महाराज के देहत्याग के बाद राजस्थान की कांग्रेस सरकार मेहंदीपुर बालाजी मंदिर का सरकारीकरण करने की तैयारी में !

मंदिर का व्यवस्थापन संभालने के लिए भक्तों को ही आगे आकर ‘मंदिर सरकार के नहीं, भक्तों के नियंत्रण में होने चाहिएं’, यह उन्हें कांग्रेस सरकार को कठोरता से बताना चाहिए । इसके लिए धार्मिक संस्थाओें को भी आगे आना चाहिए !