Baglamukhi Temple Fund Theft : मध्यप्रदेश के माँ बगलामुखी शक्तिपीठ में दान की चोरी – ३ वर्षों से झूठी (फर्जी) समिति चढ़ावा एकत्र कर रही थी ।
मंदिरों का प्रबंधन भक्तों के हाथों में सौंपना क्यों आवश्यक है ?, इसे रेखांकित करने वाली घटना ।
मंदिरों का प्रबंधन भक्तों के हाथों में सौंपना क्यों आवश्यक है ?, इसे रेखांकित करने वाली घटना ।
महाराष्ट्र सरकार के आधिकारिक अन्वेषण के अनुसार, निजाम शासन ने श्री तुळजाभवानी मंदिर संस्थान को १,६६८ हेक्टेयर (अर्थात् ४१२२.०७ एकड) भूमि दी थी, जबकि इसका विवरण तुळजापूर मंदिर संस्थान के पास न होना प्रशासन के अक्षम कार्यप्रणाली का सटीक उदाहरण है ।
राजस्व मंत्री का जिलाधिकारी को आदेश I
महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के निरंतर प्रयासों को सफलता I
श्रीराम मंदिर की वर्तमान परिस्थिति को देखना किसी भी सनातनी व्यक्ति के लिए अत्यंत असहनीय है । श्रीराम मंदिर में ऐसी परिस्थिति देखकर भक्तों के मन को क्या वेदना हो रही होगी ?, इसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है ।
श्रीराममंदिर के निर्माण के उपरांत हम सभी ने वहां प्रभु श्रीराम की स्थापना की । उस समय सभी ने ‘पूरे देश में यह एक आदर्श मंदिर बने’, यह विचार किया था ।
धार्मिक विषयों में प्रशासनिक अधिकारियों का हस्तक्षेप अयोग्य होने का मत l
श्रद्धालुओं की श्रद्धा से संबंधित निर्णय लेते समय पारदर्शिता रखने की मांग !
श्रीराम मंदिर में दान की चोरी के उपरांत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास को निरस्त करके वहां वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर नई व्यवस्था का निर्माण किए जाने की संभावना जताई जा रही है ।
अब तक गाय पर अनेक बार संशोधन (शोध) हुआ है तथा आगे भी होता रहेगा । देवताओं एवं ऋषि-मुनियों ने भी गाय की महिमा का वर्णन किया है । अंग्रेज गाय की चर्बी कारतूसों में उपयोग करने वाले थे; इसलिए क्रांतिकारी मंगल पांडे ने बलिदान दिया ।
पंढरपूर स्थित श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मूर्ति पर पुरातत्व विभाग द्वारा २३ तथा २४ जून को नियोजित रासायनिक वज्रलेपन प्रक्रिया का वारकरी संप्रदाय एवं महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने तीव्र विरोध किया है ।
मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय समन्वयक श्री सुनील घनवट ने कहा कि “यह लडाई मंदिरों की अस्मिता की है” एवं २ जून को विभागीय आयुक्तों को ज्ञापन देकर राज्यभर में आंदोलनों का प्रारंभ किया जाएगा, सरकार के प्रति ऐसी चेतावनी भी दी ।