पंढरपुर के विट्ठल मंदिर का सरकारीकरण रहित करने के लिए उच्चतम न्यायालय प्रविष्ट  होगी याचिका! – डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी, भाजपा

मंदिर सरकारीकरण के कारण मंदिर व्यवस्थापन  के कुप्रबंधन की असंख्य घटनाएं हुई हैं। मंदिर के  अर्पण व दानस्वरूप  मिलने वाले धन का सदुपयोग हिन्दू धार्मिक कार्यों के लिए किया जाना चाहिए, अत: मंदिर शीघ्रातिशीघ्र भक्तों के नियंत्रण में दिया जाए ऎसी हिन्दुऒ की अपेक्षा है ।

देवदर्शन हेतु श्रद्धालुओं से पैसे लेकर त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ने एक दिन में ही १० लाख रुपए अर्जित (कमाए) किए !

पैसे लेकर श्रद्धालुओं को दर्शन देना अशास्त्रीय पद्धति है ! दर्शन हेतु शुल्क आंकने के लिए मंदिर कोई मनोरंजन का स्थान नहीं है ! सरकारीकरण हुए मंदिरों
को प्रशासन ‘पैसे कमाने का साधन’ के रूप में देखता है । इसीलिए यह दुःस्थिति हुई है !

धर्मकार्य में पैर जमाकर खडे रहना आवश्यक – अधिवक्ता भारत शर्मा, संरक्षक, धरोहर बचाओ समिति, राजस्थान

‘‘जिस प्रकार अंगद ने रावण की राजसभा में स्वयं भूमि पर पैर जमाया, उसी प्रकार हिन्दुत्वनिष्ठों को धर्मकार्य करने के लिए पैर जमाकर खडे रहना चाहिए, तभी जाकर हम हिन्दू राष्ट्र की स्थापना में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं’’, ऐसा प्रतिपादन अधिवक्ता भारत शर्मा ने किया ।

श्री तुळजाभवानी मंदिर में भ्रष्टाचार करनेवालों पर तुरंत अपराध प्रविष्ट करें ! – अधिवक्ता (पू.) सुरेश कुलकर्णी, संस्थापक सदस्य, हिन्दू विधिज्ञ परिषद

महाराष्ट्र की कुलदेवी मानी जानेवाली श्री तुळजाभवानी मंदिर में करोडों रुपयों का भ्रष्टाचार करनेवाले निलामीधारक और शासकीय अधिकारियों पर ‘सीआईडी’ के ब्योरे (रिपोर्ट) के अनुसार शीघ्रता से अपराध प्रविष्ट कर उनपर कठोर कार्रवाई करें, ऐसी मांग हिन्दू विधिज्ञ परिषद के संस्थापक सदस्य और मुंबई उच्च न्यायालय के अधिवक्ता (पू.) सुरेश कुलकर्णी जी ने की ।

विकास के नाम पर तीर्थस्थलों को पर्यटनस्थल मत बनाइए !

प्राचीन काल में अंकोर वाट, हम्पी, आदि भव्य मंदिरों का निर्माण करनेवाले राजा-महाराजाओं ने उनका उत्तम व्यवस्थापन किया था । इन मंदिरों के माध्यम से गोशालाओं, अन्नछत्रों, धर्मशालाओं, शिक्षाकेंद्रों आदि चलाकर समाज की अमूल्य सहायता की जाती थी ।

गोवा के विध्वंसित मंदिरों के विषय में न्यायालयीन लडाई लडने के लिए प्रमाण देने का आवाहन

राष्ट्रीयस्तर पर मुघलों, पोर्तुगीजों आदि आक्रांताओं ने केवल श्रीराममंदिर, काशी, मथुरा, कुतुबमिनार, ताजमहल और भोजशाला ही नहीं, अपितु सहस्रों अन्य मंदिर भी गिराए हैैं । भारत को स्वाधीनता मिली; परंतु हिन्दुओं के प्राचीन धार्मिक स्थल उसी प्रकार से विदेशी गुलामी में रह गए

धर्मकार्य में पैर जमाकर खडे रहना आवश्यक – अधिवक्ता भारत शर्मा, संरक्षक, धरोहर बचाओ समिति, राजस्थान

सनातन धर्म वैज्ञानिक कैसा है, यह समाज के सामने लाने के लिए हमने ‘अखिल भारतीय विज्ञान दल’की स्थापना की । इस माध्यम से हमने अनेक लोगों को सनातन धर्म के अध्ययन के लिए प्रवृत्त किया । जन्मदिवस के दिन केक न काटकर औक्षण करना, यज्ञ संस्कृति का पालन करना आदि छोटे-छोटे कृत्यों से हम समाज में सनातन धर्म की पुनः स्थापना करेंगे ।

श्री सिद्धिविनायक मंदिर के पैसों का उपयोग करनेवाले राजनीतिज्ञों और संस्थाचालकों से पैसे वापस करने के विषय में चेतावनी दीजिए ! – डॉ. अमित थडाणी, निदेशक, निरामय चिकित्सालय, मुंबई

महाराष्ट्र की अनेक संस्थाओं को श्री सिद्धिविनायक मंदिर की ओर से लाखों रुपए मिलते हैं । इसमें सभी राजनीतिक दलों के नेताओं का समावेश है । इन राजनेताओं ने मंदिरों का पैसा क्यों लिया और वे उसे कब वापस देनेवाले हैं ?, इस विषय में उन्हें पूछना आवश्यक है ।

VIDEO :‘… तो भारतीय संस्कृति के उत्तराधिकारी कौन हैं ?’, इस पर हिन्दू विचार करें ! – एम्. नागेश्वर राव, पूर्व प्रभारी महानिदेशक, सीबीआई

यह देश धर्मनिरपेक्ष होने के कारण विद्यालयों में इस प्राचीन ग्रंथों की शिक्षा नहीं दी जाती । विद्यालयों में न भगवद्गीता सिखाई जाती है और न वेदों का अध्ययन किया जाता है । हिन्दुओं की इस महान संस्कृति का प्रसार नहीं हुआ, तो हिन्दू धर्म का प्रचार कैसे होगा ? और हिन्दू धर्म का प्रसार नहीं होगा, तो भारतीय संस्कृति के उत्तराधिकारी कौन होंगे ?,

चेन्नई में ‘अयोध्या मंडपम’ धार्मिक स्थल का सरकारीकरण !

ध्यान दें, कि ऐसी सरकार कभी भी गिरजाघरों और मस्जिदों का सरकारीकरण करने का साहस नहीं करती !