परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी अवतारी पुरुष हैं ! – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी

सनातन के साधक अत्यंत भाग्यशाली हैं कि उन्हें परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी जैसे सद्गुरु प्राप्त हुए हैं । इस आश्रम में साधक सद्गुरु के मार्गदर्शन में अपना आत्ममूल्यांकन कर रहे हैं ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘जो बुद्धिजीवी भगवान को नहीं मानते, क्या उन्हें भक्तों को होनेवाली चिरंतन आनंद की अनुभूति कभी आ सकती है ?’

साधको, शब्दशक्ति के माध्यम से संदेह फैलाने हेतु सक्रिय सातवें पाताल की बडी अनिष्ट शक्तियों की चाल पहचानकर साधना बढाओ !

यदि सनातन संस्था, उसके संतों और साधकों के विषय में कोई आपत्तिजनक लेखन अथवा वक्तव्य करता हुआ दिखाई दे, तो इसकी जानकारी अपने क्षेत्र के उत्तरदायी धर्मप्रचारक संतों को दें । – न्यासी, सनातन संस्था.

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा साधकों के लिए व्यष्टितथा समष्टि स्तर पर किए आध्यात्मिक उपचारों का अध्यात्मशास्त्र

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा व्यष्टि स्तर पर साधकों के लिए किए गए उपचारों का अध्यात्मशास्त्रीय आधार

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

कहां प्रत्येक क्षेत्र में सर्वाेच्च स्तर का ज्ञान देनेवाला हिन्दू धर्म, तो कहां आंगनबाडी की भांति शिक्षा देनेवाले पाश्चात्य देश !

मुंबापुरी में सहस्रों के समष्टि संकल्प से राष्ट्ररक्षा हेतु प्राप्त हुआ आध्यात्मिक बल !

सनातन संस्था की ओर से तपोभूमि भारत को सुरक्षा-कवच प्राप्त हो तथा भारत की सर्वांगीण उन्नति हो, इस व्यापक उद्देश्य से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की प्रेरणा से १७ मई अर्थात अधिक ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा को श्री राजमातंगी महायज्ञ प्रभादेवी, मुंबई में संपन्न हुआ !

मथुरा (उत्तर प्रदेश) में रामराज्य की स्थापना हेतु की गई सामूहिक प्रार्थना !

यहां के श्रीजी गार्डन १ सोसाइटी के हनुमान मंदिर में सुंदरकांड पाठ के उपरांत रामराज्य की स्थापना हेतु सामूहिक प्रार्थना की गई और प्रतिज्ञा ली गई ।

हिन्दुओ, तृतीय विश्वयुद्ध के दुष्परिणाम टालने के लिए यज्ञसंस्कृति का पुनरुत्थान करो !

यज्ञ आध्यात्मिक बल प्राप्त करने का सुलभ माध्यम है । उसके कारण ही प्राचीन काल से ‘यज्ञ करना’ वांछित फलप्राप्ति एवं आपत्ति निवारण का सुलभ मार्ग है । अत: यज्ञ का बडा महत्त्व है ।

यज्ञसंस्कृति को पुनर्जीवित करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी !

किसी भी कार्य को गति देने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है । रामराज्य की स्थापना की प्रक्रिया मुख्य रूप से आध्यात्मिक स्तर से संबंधित होने के कारण रामराज्य की स्थापना को गति देने के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा ही आवश्यक है ।

मुंबई में ‘शंखनाद महोत्सव’ करने समान ही फल श्री राजमातंगी महायज्ञ से प्राप्त हुआ है !

देश की सुरक्षा के लिए किया गया यह यज्ञ, एक प्रकार से महामृत्युंजय यज्ञ ही था; क्योंकि इस यज्ञ के माध्यम से गुरुदेवजी ने आनेवाले युद्धकाल के लिए साधकों को आवश्यक मृत्युंजय कवच प्रदान किया और राष्ट्र को भी कवच प्रदान किया । मुंबई में ‘शंखनाद महोत्सव’ करने समान ही फल इस यज्ञ से प्राप्त हुआ है ।