न्यायव्यवस्था भारतीय ही चाहिए !

स्वतंत्रता के उपरांत भारत की प्राचीन न्यायदान की प्रक्रिया अपनाने के स्थान पर पाश्चात्य न्यायतंत्र का ही बना रहना भारतीयों का दुर्भाग्य है !

RSS Shatabdi 2025 : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ शताब्दी वर्ष नहीं मनाएगा  ! – प. पू. सरसंघचालक मोहन भागवत

संघ १०० वर्ष पूर्ण होने का उत्सव मनाने और कुछ गतिविधियां चलाने नहीं आया है । संघ समाज को बदलना चाहता है और मानता है कि समाज की जीत धन प्राप्ति से नहीं, बल्कि धर्म की कसौटी पर मापी जानी चाहिए।

राष्ट्रसेवा योगी बनकर करनी चाहिए, भोगी होकर नहीं ! – प.पू. प्रेमानंद महाराज

हमारा ध्वज और हमारा राष्ट्र हमारे लिए ईश्वर है । आप तप के माध्यम से भजन द्वारा (नामजप द्वारा) लाखो लोगों की बुद्धि शुद्ध कर सकते हैं । एक भजन लाखो लोगों का उद्धार कर सकता है । आप भजन कीजिए, इंद्रियों पर विजय प्राप्त कीजिए और राष्ट्रसेवा भी कीजिए । राष्ट्र की सेवा के लिए प्राण समर्पित करें ।

हम ‘धर्म विजय’ में विश्वास करते हैं ! – प.पू. सरसंघचालक

हमने ‘धन विजय’ एवं ‘असुर विजय’ का अनुभव किया है । धन विजय का अर्थ है; स्थूल वस्तु से मिलने वाला आनंद किंतु उसमें हेतु योग्य नहीं ! यह आत्मकेंद्रित होने समान है ।

World Hindu Congress 2023 : माता अमृतानंदमयी, प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत, योगी आदित्यनाथ आदि मान्यवर बैंकाक में होनेवाली ‘वर्ल्ड हिन्दू कांग्रेस’ को करेंगे संबोधित !

२४ से २६ नवंबर के कालखंड में यहां पर ‘वर्ल्ड हिन्दू कांग्रेस २०२३’ का आयोजन किया गया है । इस तीन दिवसीय वैचारिक संमेलन के लिए संसार के विविध क्षेत्रों में कार्यरत हिन्दुओं को आमंत्रित किया गया है ।

The World Hindu Congress 2023 : ४ वर्ष में एक बार आयोजित होने वाला हिंदुओं का वैश्विक मंच ‘द वर्ल्ड हिन्दू कांग्रेस’ इस वर्ष थाईलैंड में है !

२४-२६ नवंबर की कालावधि में आयोजित !
हिन्दू श्रद्धालुओं से हिन्दू महा मेले में उपस्थित रहने का आवाहन !

मणिपुर में हिंसा अनायास घटित नहीं हो रही है बल्कि निर्माण की जा रही है ! – प. पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत

वह यहां संघ के विजयादशमी समारोह में बोल रहे थे । इस अवसर पर प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे ।

सांस्कृतिक शक्ति एवं क्षमता के बल पर भारत विश्व के लिए आशा की किरण बनने में सक्षम !

भारत विश्व को ज्ञान, शुद्धता, समृद्धि एवं समर्पण सिखाने में सक्षम है ।  हम सूर्य की पूजा करते हैं, इसलिए हमारे देश को ‘भारत’ के नाम से संबोधित किया जाता है । 

वेदरक्षण की परंपरा के विस्तार की आवश्यकता ! – प. पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत

आने वाला समय भारत और सनातन धर्म का है । वेद ज्ञान के भंडार हैं । वेदों में सभी कुछ है । नियमित होने वाले आक्रमणों के कारण सभी ओर विशेषत: उत्तर भारत में वैदिक ज्ञान की बडी हानि हुई । अग्निहोत्र के अनुयायियों ने युगों- युगों से इस ज्ञान की रक्षा की है ।

भारत का इस्लाम सबसे अधिक सुरक्षित ! – प. पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत

‘इस्लाम खतरे में है’, ऐसी बांग देने वाले धर्मांध मुसलमान नेता, उसी प्रकार ‘भारत में मुसलमान असुरक्षित जीवन जी रहे हैं, ऐसी आवाज उठाने वाले लोगों को इस पर उत्तर पूछना चाहिए !