सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार
‘डॉक्टर अधिक से अधिक व्याधि कम करते हैं; परंतु मृत्यु नहीं टाल सकते । इसके विपरीत, संत जन्म-मृत्यु के चक्र से ही मुक्त करते हैं !’
‘डॉक्टर अधिक से अधिक व्याधि कम करते हैं; परंतु मृत्यु नहीं टाल सकते । इसके विपरीत, संत जन्म-मृत्यु के चक्र से ही मुक्त करते हैं !’
हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को निचले तबके तक जाकर धर्म का प्रसार करना आवश्यक !
अयोध्या में श्रीराम मंदिर पर ध्वजारोहण !
‘बीबीसी’ की नीति सदैव भारत विरोधी एवं हिन्दू विरोधी ही रही है । इस समाचार संस्थान में पाकिस्तानी अथवा धर्मांध पत्रकारों का समावेश है । इसलिए उनका भारत के प्रति विद्वेष झलकता रहता है ।
भाजप–जनता दल (संयुक्त) सरकार का यह प्रशंसनीय निर्णय है । इसका आदर्श लेकर देश के प्रत्येक राज्य को ऐसा प्रयास करना चाहिए, ऐसा ही हिन्दुओं का मत है !
सम्मानपूर्वक फहरानेवाला यह धर्मध्वज बता रहा है कि ‘आनेवाले कुछ वर्षाें में ‘आर्थिक महासत्ता’ बननेवाला भारत ‘आध्यात्मिक महासत्ता’ कहलाएगा । उसकी पुकार सुनकर उसका यथोचित सम्मान रखने के लिए अब शासन के साथ प्रत्येक देशभक्त और देवभक्त को संगठित रूप से रामनाम का जयघोष अपने अंतरंग में बसाना चाहिए !
पारंपरिक आतंकवाद के परे जाकर उच्च शिक्षित, व्यावसायिक और सुसंस्कृत दिखनेवाले व्यक्तियों का सहभाग बढता जा रहा है । वे केवल कट्टर विचारधारा के साथ ही नियोजन, आर्थिक व्यवस्थापन और कार्यवाही के क्षेत्रों में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं ।
‘यौन अपराधों से बच्चों की रक्षा’ अर्थात ‘पॉक्सो’ (POCSO) कानून के अंतर्गत वर्तमान समय में यौन संबंध बनाने के लिए प्रावधित १८ वर्ष की आयु को १६ वर्ष करने के प्रस्ताव के इस संदर्भ में केवल कानूनी ही नहीं, अपितु भारतीय धर्मशास्त्र एवं आधुनिक मानसशास्त्र के आधार पर विचार मंथन करनेवाला यह लेख है ।
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने साधकों को हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से ‘हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभा’ लेने के लिए कहा । इस प्रकार की सहस्रों सभाएं आयोजित की गईं । परिणामतः पूरे भारत में राष्ट्र और धर्म रक्षा के लिए हिन्दुओं का संगठन हो रहा है । इसके परिणामस्वरूप अब गोवा में ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ संपन्न हुआ ।