अपने ओजस्वी भाषण से युवकों में राष्ट्र एवं धर्म के कार्य की ज्वलंत प्रेरणा जागृत करनेवाले राष्ट्रनिष्ठ अभिनेता शरद पोंक्षे !

श्री. शरद पोंक्षे को वर्ष २०१९ में कैंसर हुआ । कैंसर कहते ही मनुष्य जीने की आशा छोड देता है; परंतु कैंसर का निदान होने के १०-११ महिनों तक श्री. शरद पोंक्षे ने इस कठिन बीमारी से सफलतापूर्ण लडाई लडी ।

हिन्दुत्व एवं धर्म का कार्य करने की तीव्र लगन वाले मडिकेरी (कर्नाटक) के प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ता कृष्णमूर्ति पी. !

‘मडिकेरी, कर्नाटक के प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ता कृष्णमूर्ति पी. (आयु ४७ वर्ष) देवीभक्त हैं तथा पिछले १४ वर्षाें से साधना कर रहे हैं । वे वर्ष २०२१ से २ वर्ष विश्व हिन्दू परिषद के कोडगु जिला अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे, तदुपरांत दायित्व से मुक्त हुए ।

योग एवं आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर ले जानेवाले हरिद्वार (उत्तराखंड) के योगऋषि रामदेवबाबा !

भारत को एक बलशाली एवं विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हमें उसे अपनी जडों से जोडकर हमारी संस्कृति संजोनी चाहिए । हमारा भारत एक ऐसा राष्ट्र बने, जो संपूर्ण विश्व के लिए एक उदाहरण हो !

हिन्दुत्व, तत्त्वनिष्ठ पत्रकारिता एवं सामाजिक परिवर्तन की पथप्रदर्शक सुश्री (कु.) डॉ. वैदेही ताम्हण !

धर्मरक्षा के लिए समर्पित एक निर्भीक आवाज, सत्यरक्षक तथा शक्ति का चलता-फिरता, साथ ही बोलता रूप, यह है उनकी पहचान । सुश्री (कु.) डॉ. वैदेही ताम्हण के कार्य के विषय में उनके सहयोगी श्री. अक्षय रेडीज द्वारा दी गई जानकारी यहां प्रस्तुत है ।

कश्मीर में विस्थापित हिन्दुओं के पुनर्वास के लिए संघर्ष करनेवाले श्री. सुशील पंडित !

तब से लेकर आज तक कश्मीरी हिन्दू उनकी मातृभूमि को वापस नहीं जा पाए हैं । श्री. सुशील पंडित हिन्दुओं का विस्थापन तथा मातृभूमि में लौटने के उनके ३५ वर्षाें के संघर्ष के साक्षी हैं ।

शिक्षा से वंचित वनवासी बच्चों पर शैक्षिक एवं धार्मिक संस्कार कर उन्हें मुख्य प्रवाह में लानेवाले  श्री. महादेव उपाख्य अप्पा जोशी !

श्री. अप्पा ८० वर्षाें के होते हुए भी कर्मनिवृत्त न होकर वे उन विद्यार्थियों के कार्य में जीतोड सहायता कर रहे हैं । अब हम ऐसे कर्मयोगी श्री. अप्पा द्वारा स्वयं की दी हुई जानकारी देखेंगे ।

शिवकार्य सर्वसामान्य लोगों तक पहुंचाने के लिए पूरा जीवनभर जीतोड प्रयत्न करनेवाले कर्मयोगी बाळकृष्ण उपाख्य आप्पा परब (आयु ८४ वर्ष) !

‘हिन्दुत्व का अभिमान एवं स्वराज्य का स्वाभिमान निर्माण करनेवाला यह इतिहास ऐसे ही ओठों पर नहीं आता, अपितु अंत:करण में अंकित होने पर ही आता है ।’ ऐसे श्री. आप्पा का अंत:करण ही तेजस्वी इतिहास का संग्रहालय है ।

स्वदेशी उत्पादों की निर्मिति, देव-देश-धर्म को श्रेष्ठ मानकर धर्मकार्य हेतु कार्यरत ठाणे के समर्पित उद्योगपति डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई !

गोपालन, गोरक्षा, गो-उत्पादन ये सभी डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई के आत्मीय विषय हैं ।  नि:स्वार्थ सेवाभाव से गोमाताओं की सेवा एवं सुरक्षा करने हेतु रवींद्रजी कटिबद्ध हैं ।

प्राचीन मंदिरों के संदर्भ में शोध, उनकी रक्षा एवं संवर्धन में योगदान देनेवाले ओडिशा के श्री. अनिल धीर !

ओडिशा के श्री. अनिल धीर एक व्यावहारिक शोधकर्ता एवं लेखक हैं, जो उनके ऐतिहासिक शोध के लिए जाने जाते हैं । वे बांग्लादेशी घुसपैठियों के विरुद्ध समाज में जागृति लानेवाले ‘भारत रक्षा मंच’ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं ।

इस्लाम के कट्टरवाद की निर्भयता से आलोचना करनेवाले एवं हिन्दुओं के अधिकार के लिए लडनेवाले देहली के ‘हिन्दुत्व के योद्धा’ डॉ. आनंद रंगनाथन् !

डॉ. रंगनाथन् को सार्वजनिक मान्यता मिलने का मुख्य कारण है इस्लाम के कट्टरतावाद एवं धार्मिक मूलतत्त्ववाद के विषय में निर्भयता से आलोचना ! जिस काल में अनेक बुद्धिमान लोग इस विषय पर बेधडक बोलना टालते थे, तब डॉ. रंगनाथन् बेधडक बोलते थे ।