हिन्दुत्व एवं धर्म का कार्य करने की तीव्र लगन वाले मडिकेरी (कर्नाटक) के प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ता कृष्णमूर्ति पी. !

‘मडिकेरी, कर्नाटक के प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ता कृष्णमूर्ति पी. (आयु ४७ वर्ष) देवीभक्त हैं तथा पिछले १४ वर्षाें से साधना कर रहे हैं । वे वर्ष २०२१ से २ वर्ष विश्व हिन्दू परिषद के कोडगु जिला अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे, तदुपरांत दायित्व से मुक्त हुए । अनेक निरपराध हिन्दू कार्यकर्ताओं को अनावश्यक ही उलझा दिया गया है । ऐसे विविध कानूनी प्रकरणों में वे सक्रियरूप से सहभागी हैं । हिन्दू धर्म एवं हिन्दुत्व के कार्य के प्रति उनमें बहुत लगन है । ७ वर्ष पूर्व वे सनातन संस्था के संपर्क में आए । सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी पर उनकी अपार श्रद्धा है । उनका आध्यात्मिक स्तर ६४ प्रतिशत है ।

अधिवक्ता कृष्णमूर्ति पी.

विशेष स्तंभ


छत्रपति शिवाजी महाराजजी के हिन्दवी स्वराज्य के मावळे (छत्रपति शिवाजी के सैनिक) एवं योद्धाओं द्वारा किया त्याग सर्वोच्च है, उसके अनुसार आज भी अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रप्रेमी नागरिक धर्म-राष्ट्र की रक्षा के लिए ‘योद्धा’ के रूप में कार्य कर रहे हैं । उनकी एवं उनके हिन्दू धर्मरक्षा के संघर्ष की जानकारी देनेवाले ‘हिन्दुत्व के योद्धा’ स्तंभ द्वारा अन्यों को भी प्रेरणा मिलेगी । इन उदाहरणों से हमारे मन की चिंता दूर होगी, साथ ही विश्वास एवं उत्साह जगृत होगा ! – संपादक

१. अधिवक्ता कृष्णमूर्ति को हिन्दुत्व का कार्य करने की मिली प्रेरणा

मैं बचपन से हमारे घर के बडे-बूढों से रामायण एवं महाभारत की कथा सुनता आ रहा था । जबसे मुझे लिखना-पढना आया, तभी से मैंने महापुरुषों एवं स्वतंत्रता संग्राम के सैनिकों के किस्से-कहानियां पढना आरंभ कर दिया था । उसी प्रकार बचपन से ही मेरा झुकाव हिन्दुत्व एवं राष्ट्र-धर्म की ओर था । ऐसा प्रतीत होता है कि भगवान की इच्छा एवं गुरु की कृपा होने से मुझे हिन्दुत्व के कार्य में रुचि जागृत हो गई ।

२. अधिवक्ता कृष्णमूर्ति पी. द्वारा हिन्दुत्व का निरपेक्ष कार्य

अ. न्यायालय में हिन्दुत्वनिष्ठों के पक्ष में अभियोग चलाकर उस पर विजय पाना : हिन्दुत्व के कार्य में अधिवक्ता कृष्णमूर्ति का सक्रिय सहभाग है । एक बार मडिकेरी में टीपू सुलतान जयंती के समय दंगे हुए । इस प्रकरण में अनेक हिन्दुओं को फंसाया गया था । हिन्दुत्वनिष्ठों की ओर से अधिवक्ता कृष्णमूर्ति ने न्यायालय में यह अभियोग चलाया एवं इसमें विजय पाई । इस प्रकार हिन्दुत्वनिष्ठों को किसी भी प्रकार की अडचन आने पर वे तत्परता से उनकी सहायता करते हैं ।

आ. हिन्दुत्व के कार्य के लिए त्याग करने की वृत्ति : हिन्दुत्व का कार्य करते समय उन्हें विविध अभियोगों के लिए ‘मडिकेरी से बेंगळुरू’ अथवा अन्य स्थानों पर चौपहिया वाहन से जाना पडता है । तब वे यात्रा में होनेवाला व्यय (खर्च) किसी से भी नहीं लेते हैं, अपना ही त्याग करते हैं ।

अनेक बार वे निर्धन (जरूरतमंद) हिन्दू कार्यकर्ताओं को अनाज एवं वस्तु उनके घर जाकर देते हैं । एक गोशाला के प्रमुख ने अधिवक्ता कृष्णमूर्ति से सहायता मांगी, उन्होंने तुरंत उनकी सहायता की ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की कृपा से दो बार मृत्यु के संकट से बच पाया !

१. एक अभियोग की सुनवाई हो जाने पर मैं अपने सहयोगी के साथ बेंगळुरू जा रहा था । तब एकाएक पीछे से एक ट्रक ने आकर गाडी को जोरदार टक्कर दी । इसमें हमारी गाडी का बायां भाग कट गया । यह दुर्घटना इतनी बडी थी कि गाडी को देखने के पश्चात कोई कह नहीं सकता था कि जो भी व्यक्ति इस गाडी में था वह जीवित बच पाया होगा । यह तो केवल और केवल सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की कृपा से मैं एवं मेरे सहयोगी सुरक्षित थे । इसलिए हमें सतत भगवान के सान्निध्य में रहना चाहिए, ऐसा मैंने अनुभव किया ।

गाडी का पंचनामा करता हुई पुलिस पथक और (गोल में दिखाया) गाडी से बाहर निकाला गया गोली लगा आसन

२. कथित पत्रकार गौरी लंकेश हत्या प्रकरण के अभियोग में भी मैं संदिग्ध आरोपियों की ओर से लड रहा हूं । वर्ष २०२३ में मुझ पर कुछ अज्ञात लोगों ने गोलीबारी की । अरोपी ने मेरे इतने पास से गोली चलाई थी कि मेरा जीवित रहना असंभव था । केवल सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की कृपा से ही मैं बच गया ।

– अधिवक्ता कृष्णमूर्ति

३. विनम्र तथा अहंशून्य स्थिति में रहकर न्यायालयीन कामकाज करनेवाले अधिवक्ता कृष्णमूर्ति !

अ. कोई मुवक्किल (client) अधिवक्ता कृष्णमूर्ति को कोई अभियोग सौंप दे, तो उन्हें उस विषय में विचार नहीं करना पडता । वे स्वयंप्रेरणा से सब कुछ करते हैं तथा आत्मीयता से अभियोग चलाते हैं ।

आ. अधिवक्ता कृष्णमूर्ति को कानून तथार धर्मकार्य के विषय में अच्छा अनुभव है, तब भी उनके व्यवहार से ‘अधिकारवाणी अथवा मुझे अधिक समझ में आता है’, ऐसा कभी प्रतीत नहीं होता । वे सभी के साथ नम्रता से बातें करते हैं ।

उनके साथ जो कनिष्ठ अधिवक्ता कार्य करते हैं, वे नम्रता से उनका मत भी जान लेते हैं । उनके इस बर्ताव से अधिवक्ता उत्साहित होते हैं, साथ ही उन्हें उनका आधार भी लगता है । वे जब न्यायालय में प्रतिवाद करते हैं, तब वहां का वातावरण पूर्णरूप से निःशब्द हो जाता है । न्यायाधीश उनकी बात शांति से सुनते हैं एवं उनसे आदरपूर्वक बर्ताव करते हैं । न्यायालय में अन्य लोगों का बर्ताव भी उनके साथ आदरपूर्ण है ।

राष्ट्र एवं धर्म प्रेमी अधिवक्ताओं के लिए संदेश

राष्ट्र एवं धर्म संबंधी प्रकरणों में अधिवक्ताओं के लिए ‘साधक’ अथवा ‘हिन्दू’ अधिवक्ता के रूप में साहसी तथा निर्णयात्मक कृति करना आवश्यक !

हमें अपनी स्वार्थी वृत्ति छोडकर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए सभी हिन्दू संगठनों को एकत्र कर, अपना उद्देश्य साध्य करने के लिए संघर्ष करना चाहिए । यह करने के लिए हमें न्यायव्यवस्था को समझकर परिणामकारक ढंग से उसका उपयोग करना चाहिए । राष्ट्र एवं धर्म संबंधी प्रकरणों में अधिवक्ताओं को साहसी तथा निर्णयात्मक कृति करनी चाहिए ।

भगवान पर हमारी इतनी श्रद्धा होनी चाहिए कि यदि हम पर कोई संकट आ जाए, तो भगवान हमारी सहायता करेंगे । भगवान हमारे सर्वस्व हैं । भगवान के भक्त को चिंता करने की आवश्यकता नहीं । सतत नामजप करते हुए न्यायालयीन काम करने चाहिए । भगवान का नामजप करते हुए कार्य करने से भगवान हमें शक्ति देते हैं । इससे हमें अनुभूति होती है कि भगवान सतत हमारे साथ हैं । कानून के अध्ययन के साथ-साथ साधना करते हुए न्यायालयीन प्रकरण लडने पर कार्य को गति मिलती है । भगवान से प्रार्थना करके ही घर से बाहर निकलना चाहिए । साधना करने से ‘भगवान सतत हमारे साथ हैं’, इसकी अनुभूति होगी । ‘साधक अधिवक्ता’ तथा ‘हिन्दू अधिवक्ता’ बनकर ही हमें न्यायालयीन लडाई लडनी है ।

– अधिवक्ता कृष्णमूर्ति

४. ‘सब कुछ ईश्वरेच्छा से होता है’, इस भाव में रहनेवाले अधिवक्ता कृष्णमूर्ति पी. !

अधिवक्ता कृष्णमूर्ति प्रत्येक प्रसंग में शांत एवं सकारात्मक रहते हैं । एकबार एक अभियोग की सुनवाई के लिए वे मडिकेरी से २७५ कि.मी. की यात्रा कर बेंगळुरू गए; परंतु उस दिन न्यायालय में न्यायाधीश के अनुपस्थित होने से सुनवाई रद्द (कैंसिल) हो गई । तब उन्हें कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई । उनके साथ आए अधिवक्ताओं ने उनसे पूछा, ‘आपको कुछ भी नहीं लगा क्या ?’ तब वे बोले, ‘सब कुछ ईश्वरेच्छा से होता है ।’ इस प्रकार कोई भी प्रसंग आए, वे हर परिस्थिति को स्वीकारते हैं । घर में भी कोई प्रतिकूल परिस्थिति निर्माण होने पर वे शांत एवं सकारात्मक रहते हैं ।

Spiritual Journeys of Legal Support for Hindu Activists | Adv. Krishnamoorthy P

५. साधना करनेवाले एवं संतों के प्रति भाव रखनेवाले अधिवक्ता कृष्णमूर्ति ! 

अ. अधिवक्ता कृष्णमूर्ति प्रतिदिन नामजप एवं प्रार्थना करते हैं । वे कहते हैं कि भले ही कहीं भी हों, तब भी नामजप सतत चलता रहता है । वाहन से प्रवास करते समय अथवा न्यायालय में भी मैं नामजप करता हूं ।

आ. अधिवक्ता कृष्णमूर्ति सदैव सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के विषय में बोलते हैं । ‘गुरुदेव’ शब्द सुनते ही उनका भाव जागृत हो जाता है । तब भावजागृति होने की अवस्था में वे बोल भी नहीं पाते । वे हमेशा कहते हैं कि मुझसे होनेवाली प्रत्येक कृति मैं नहीं अपितु गुरुदेव ही करते हैं ।

इ. एक बार सनातन संस्था के संत पू. रमानंद गौडाजी से उनकी भेट हुई । तब उनसे बातें करते समय सतत २० मिनट तक अधिवक्ता कृष्णमूर्ति की भावजागृति होती रही थी । इसलिए वे ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे ।