Chhattisgarh High Court : ‘हिन्दू एक गाली है, जिसका अर्थ चोर, डाकू, लुटेरा तथा गुलाम होता है’ ऐसा कहने वाले ईसाई संगठन के ११ लोगों के विरुद्ध प्रविष्ट अपराध निरस्त नहीं होगा ।

न्यायालय ने कहा कि इस प्रकरण में ऐसे प्रश्न सम्मिलित हैं, जिनका निर्णय केवल संपूर्ण मुकदमे के समय साक्ष्यों की जांच के पश्चात ही किया जा सकता है ।

Sheikh Hasina Bangladesh : शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की घोषणा की !

‘बांग्लादेश लौटने पर मेरी हत्या भी की जा सकती है’, ऐसी आशंका भी व्यक्त की !

Chhattisgarh High Court : विद्यालयों में गायत्री मंत्र के पाठ संबंधी निर्देश देनेवाले परिपत्र को चुनौती देनेवाली याचिका उच्च न्यायालय ने निरस्त की !

नैतिक शिक्षा पर कोई प्रतिबंध नहीं है !

UCC Maharashtra : शीतकालीन सत्र में ‘समान नागरिक संहिता’ का प्रारूप प्रस्तुत किया जाएगा ! – देवेन्द्र फडणवीस, मुख्यमंत्री

संविधान में प्रत्येक राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने के निर्देश दिए गए हैं । वर्ष २०२६ के बजट सत्र में इस विधि हेतु समिति स्थापित करने की घोषणा की गई थी ।

‘मुस्लिम पर्सनल लॉ’ देश के कानून से ऊपर नहीं है ! – इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ’ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, २००६ तथा लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, २०१२ (पॉक्सो) के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर सकता ।

Canada Nijjar killing: खलिस्तानी आतंकवादी निज्जर की हत्या में भारतीय अधिकारियों का कोई हाथ नहीं था !

अमेरिकी जांच सुरक्षा संस्थाओं ने कनाडा का मिथ्या कथन उजागर किया !
हत्या में लॉरेंस बिश्नोई एवं गोल्डी बरार, गुडों की टोली का हाथ l

China Bribery Case : ३० वर्षों में ३ सहस्र करोड रुपये की रिश्वत लेने वाले चीन के पूर्व अधिकारी को फांसी का दंड

भारत में रिश्वतखोरों को ऐसा दंड कब मिलेगा ?

गुजरात उच्च न्यायालय ने ३८ जिहादी आतंकवादियों की फांसी एवं ११ आरोपियों का आजीवन कारावास दंड अविचल रखा !

२६ जुलाई २००८ को यहां निरंतर हुए २२ बम विस्फोटों के प्रकरण में विशेष कनिष्ट न्यायालय के चार वर्ष पुराने निर्णय को गुजरात उच्च न्यायालय ने अविचल रखा है ।

Taj Mahal Survey : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) से उत्तर मांगा !

ताजमहल को तेजोमहालय मंदिर घोषित किए जाने की मांग करनेवाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ६ जुलाई को केंद्र सरकार एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से उनका पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया ।

‘तमिल राष्ट्र’ की ६० वर्ष की मांग वर्तमान में इतिहास के रूप में बताना ‘देशद्रोह’ नहीं है । – Madras High Court

किसी पुस्तक में वर्ष १९६७ की स्वतंत्र तमिलनाडू की मांग का केवल ऐतिहासिक उल्लेख करना वर्तमान समय में ‘देशद्रोह’ नहीं मन जा सकता । किसी ऐतिहासिक घटना का वर्णन करना तथा वर्तमान में अलगाववाद को बल देना इन दोनों बातों में स्पष्ट अंतर है ।