श्री. महादेव जयराम जोशी, अर्थात श्री. अप्पा जोशी को बचपन से ही देवी-देवता, देश, धर्म एवं सामाजिक बंधुत्व की भावना में विशेष रुचि है । ‘समाज के लिए हमें कुछ तो करना चाहिए’, इस विचार से अप्पा ने पूरा जीवन पालघर जिले के तलासरी नामक वनवासी क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा का कार्य किया । उन्होंने इन बच्चों पर शिक्षा के साथ ही राष्ट्र, धर्म एवं भाईचारा के संस्कार अंकित किए । उन्होंने जिन विद्यार्थियों को पढाया था, वे आज विविध क्षेत्रों में सफल हो चुके हैं । उनके कुछ विद्यार्थी अब सामाजिक कार्य कर रहे हैं । श्री. अप्पा ८० वर्षाें के होते हुए भी कर्मनिवृत्त न होकर वे उन विद्यार्थियों के कार्य में जीतोड सहायता कर रहे हैं । अब हम ऐसे कर्मयोगी श्री. अप्पा द्वारा स्वयं की दी हुई जानकारी देखेंगे ।

विशेष स्तंभ

छत्रपति शिवाजी महाराजजी के हिन्दवी स्वराज्य के लिए मावळे (शिवाजी के सैनिकों) एवं योद्धाओं द्वारा किया त्याग सर्वोच्च है, उस अनुसार आज भी अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रप्रेमी नागरिक धर्म-राष्ट्र की रक्षा के लिए ‘योद्धा’ के रूप में कार्य कर रहे हैं । उनकी तथा उनके हिन्दू धर्मरक्षा के संघर्ष की जानकारी देनेवाले ‘हिन्दुत्व के योद्धा’ स्तंभ द्वारा अन्यों को भी प्रेरणा मिलेगी । इन उदाहरणों से हमारी चिंता दूर होकर उत्साह जागृत होगा ! – संपादक
१. बचपन, शिक्षा तथा नौकरी
श्री. अप्पा जोशी का जन्म ४ फरवरी १९४६ को रत्नागिरी जिले के देवरुख के किसान परिवार में हुआ । १०वीं तक की शिक्षा देवरुख में होने के पश्चात ११वीं उन्होंने चिपळूण से किया । तदुपरांत उन्होंने मिरज में अगली शिक्षा लेना जारी रखा; परंतु घर की आर्थिक स्थिति विकट होने से वे अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर सके । तदुपरांत गुहागर में हेदवी के एक विद्यालय में उन्होंने २ वर्ष शिक्षक के रूप में नौकरी की ।
२. पूर्णकालिक संघप्रचारक एवं कार्य में अडचन
समाज के लिए कार्य करने का भान बचपन से ही था । संघ के कार्य की जानकारी थी । इसलिए उन्होंने संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में कार्य करने का निश्चय किया । वर्ष १९६७ से १९६९, ये २ वर्ष उन्होंने रोहा, मुरुड एवं पाली तालुकाओं में संघ प्रचारक के रूप में कार्य किया । तब उनके बडे भाई ने उनसे कहा, ‘प्रचारक का कार्य रोककर घर की आर्थिक स्थिति की ओर ध्यान दो ।’ इसलिए उन्हें संघ प्रचारक के रूप में कार्य रोकना पडा ।
३. आर्थिक समस्या पर समाधान मिलने से संघकार्य कर पाना
घर की आर्थिक समस्या के कारण संघ प्रचारक का कार्य रोकने की स्थिति उत्पन्न हो गई थी । ऐसे में वरिष्ठ प्रचारक दामुअण्णा टोकेकर ने समाधान सुझाया । उस समय कल्याण नगरपालिका के तत्कालीन नगराध्यक्ष श्री. माधवराव काणे ने निवृत्ति के उपरांत तलासरी में वनवासी क्षेत्र के बच्चों के लिए छात्रावास आरंभ किया था । उसके लिए उन्हें वहां सहायता चाहिए थी । यह कार्य देशसेवा का ही था । वहां अप्पा श्री. माधवराव काणे के मार्गदर्शन में पूर्णकालिक व्यवस्थापन देखने लगे । इससे उन्हें जो मानधन मिलता था, वह राशि वे घर भेज देते थे । इसलिए घर की आर्थिक स्थिति में सहायता हुई तथा उनकी देशसेवा का कार्य चलता रहा । इस छात्रावास में उन्होंने ३२ वर्ष कार्य किया ।

४. श्री. अप्पा की धर्मपत्नी का पूर्ण सहयोग
लडकों का छात्रावास आरंभ होने के पश्चात कुछ वर्षाें में ही लडकियों के लिए भी छात्रावास आरंभ हो गया । उस समय उन्होंने विवाह करने का निर्णय लिया । उनका विवाह कोकण के एक परिचित परिवार की एक लडकी से हुआ । इसलिए लडकियों के छात्रावास के लिए पूरे समय सहायिका की बाधा दूर हो गई । श्री. अप्पा की धर्मपत्नी श्रीमती वसुधाताई ने २८ वर्ष लडकियों के छात्रावास में कार्य किया । इस अवधि में उन्हें ३ कन्यारत्न हुए । उन सभी ने छात्रावास के वातावरण में ही अपनी शिक्षा उत्तम ढंग से पूर्ण कर श्री. अप्पा एवं श्रीमती वसुधाताई के कार्य में एक प्रकार से उत्तम सहयोग किया ।
५. साम्यवादियों का वर्चस्ववाले तलासरी में संघ का कार्य करना आवाहनात्मक !
तलासरी, यह आज के पालघर जिले के गुजरात की सीमा से लगा गांव है । यहां साम्यवादियों का वर्चस्व है । यह वनवासी क्षेत्र है तथा बाह्य जगत से अलिप्त है । यहां शहर की साधन-सुविधाओं का अभाव था । इसलिए यहां का वनवासी समाज शिक्षा, संस्कृति एवं सुधार से वंचित था । ऐसे स्थान पर कार्य करते समय साम्यवादियों का प्रखर विरोध सहन करना पडा । एक बार तो १५ से २० लोगों की टोली ने छात्रावास में घुसकर श्री. अप्पा, श्रीमती वसुधाताई एवं एक विद्यार्थी कीे भयंकर पिटाई की । तब श्री. अप्पा के सिर पर गंभीर चोट लगी थी । वह घाव इतना बडा था कि १०० से भी अधिक टांके पडे । ईश्वर की कृपा से वे बच गए ।
६. तलासरी वनवासी क्षेत्र के अनुभव
अ. वनवासियों को हिन्दू धर्म से तोडने का षड्यंत्र तथा उस कार्य का विरोध : हिन्दू वनवासी समाज को हिन्दू धर्म से तोडने का साम्यवादियों का षड्यंत्र चलता ही रहा था । यहां साम्यवादियों के प्रभाव के कारण हिन्दू त्योहार लगभग बंद ही हो गए थे । साधन-सुविधाओं के अभाव के कारण मूलतः हिन्दू वनवासियों को हिन्दू धर्म से अलिप्त करने में साम्यवादियों को सफलता मिल रही थी; इसीलिए उस भाग में वे छात्रावास के कार्य का विरोध करते थे ।
आ. बच्चों में राष्ट्र-धर्म के विचारों का रोपण : छात्रावास का कार्य संभालते हुए श्री. अप्पा वहां के लोगों में जाकर उन्हें राष्ट्र-धर्म के प्रति जागृत करते थे । श्रीरामनवमी, हनुमान जयंती, गणेशोत्सव, रक्षाबंधन जैसे त्योहार वहां मनाए जाने लगे । बच्चों के माध्यम से त्योहारों की जानकारी उन्होंने घर-घर में पहुंचाई । त्योहारों के समय मारुतिस्तोत्र एवं रामरक्षास्तोत्र पढे जाने लगे । इससे बच्चों में अच्छे संस्कारों का बीजारोपण हुआ । कुछ विद्यार्थी स्वयं आकर उन्हें बताते हैं कि उन्हें आज भी इसका लाभ हो रहा है ।
श्री. अप्पा को मिले पुरस्कार
श्री. अप्पा को अब तक डॉ. हेडगेवार स्मारक सेवा पुरस्कार, स्व. बाबासाहेब साठे पुरस्कार एवं नानासाहेब दांडेकर सार्वजनिक न्यास पुरस्कार आदि अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है । इसमें डॉ. हेडगेवार स्मारक सेवा पुरस्कार में मिलनेवाली १ लाख रुपए की राशि उन्होंने नहीं स्वीकारी । ‘छात्रावास में कार्य करते समय जो मानधन मिल रहा है, उससे अधिक मुझे संघ से कुछ नहीं चाहिए’, ऐसा उन्होंने निश्चय किया था ।
७. आयु के कारण निवृत्त हो जाने पर भी कर्मयोग चल ही रहा है !
अ. भूतपूर्व विद्यार्थी द्वारा आरंभ किया गया महाविद्यालय उनकी आकस्मिक मृत्यु के उपरांत भी चलते रहने के लिए अथक प्रयत्न करनेवाले श्री. अप्पा ! : श्री. अप्पा ने छात्रावास में ३२ वर्ष सेवा की तथा वे वहां से निवृत्त हुए, तब भी वे अपनी कर्मभूमि में सक्रिय हैं । उनके एक विद्यार्थी ने तलासरी में एक महाविद्यालय आरंभ किया; परंतु कुछ समय पूर्व एक दुर्घटना में उस विद्यार्थी का निधन हो गया । इस महाविद्यालय में ३५० विद्यार्थी पढ रहे हैं । यह महाविद्यालय आगे चलता रहे, इसके लिए अप्पा आगे आए । अपना अनुभव, पहचान तथा भूतपूर्व विद्यार्थियों की सहायता से इस विद्यालय को जारी रखने के लिए वे प्रयत्नशील हैं ।

आ. गोमाता का महत्त्व समझाने के लिए गोमय उत्पादों का उपयोग एवं बिक्री : हिन्दू संस्कृति में गोमाता का अनन्य महत्त्व है । गोमाता के दूध तथा दुग्धजन्य पदार्थ ही नहीं, अपितु उसके गोबर अथवा गोमूत्र से भी अनेक उत्पाद बनते हैं । श्री. अप्पा स्वयं उनका उपयोग करते हैं तथा उनकी बिक्री भी करते हैं । इससे हिन्दुओं को गोमाता का महत्त्व बताने के लिए उनका प्रामाणिक प्रयत्न होता है ।
इ. वनवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए उनका सर्वाेपरि मार्गदर्शन : वनवासी बच्चों की शिक्षा के साथ ही उन्होंने उनके परिवार से भी निकटता साधी । उन्होंने अपनी कर्मभूमि पर लोगों को दुग्ध प्रकल्प, वर्मी-कम्पोस्ट प्रकल्प, सोकपिट प्रकल्प तथा बालसंस्कार वर्ग का आग्रह कर, उस विषय में मार्गदर्शन किया । बरगद, पीपल, नीम जैसे वृक्ष लगाने के लिए वे सदैव लोगों को प्रवृत्त करते हैं ।
परिवार व्यवस्था, धर्मसंस्था एवं शिक्षाप्रणाली को साम्यवाद से संकट !
अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास का महत्त्व !
Kerala ‘Vande Mataram’ : (और इनकी सुनिए) ‘वन्दे मातरम्’ का पूर्ण गायन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नीति का हिस्सा – पिनराई विजयन
Savarkar Sadan : डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के लंदन स्थित घर के समान महाराष्ट्र के ‘सावरकर सदन’ को खरीद कर उसका संवर्धन किया जाए !
(और इनकी सुनिए…) “भारत को इतिहास के पन्नों में धकेल देंगे !” – Khawaja Asif
हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से अमृता विश्वविद्यापीठम् के निदेशक डॉ. यु. कृष्णकुमार से सद्भावना भेंट !