Maharashtra Hostel Scam : बनावटी छात्र संख्या दिखाकर छात्रावासों के नाम पर करोडों रुपये के अनुदान का दुरुपयोग हुआ !

  • महाराष्ट्र के अनुदानित छात्रावासों में आर्थिक घोटाला !

  • सरकारी अधिकारियों ने सरकार को मिथ्या प्रतिवेदन प्रस्तुत किए !

(‘कैग’ का अर्थ है नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक)

श्री प्रीतम नाचणकर, विशेष प्रतिनिधि, दैनिक सनातन प्रभात

छात्रावासों की खराब स्थिति

मुंबई, १६ जुलाई — जालना, लातूर एवं बुलढाणा जिलों में बंद पडे नौ छात्रावासों में छात्रों का बनावटी पंजीकरण दिखाकर करोडों रुपये की अनुदान राशि निकाली गई है । छात्रों के काल्पनिक नाम दिखाकर उनका अनुदान लिया गया, एवं अधीक्षक, सुरक्षा परिचारक, रसोइया कार्यरत होने का दिखावा करके उनका मानदेय हडप लिया गया । सूत्रों के अनुसार सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों ने इन बंद छात्रावासों को चालू बताकर वरिष्ठ अधिकारियों को मिथ्या प्रतिवेदन दिए एवं २०१८ से २०२४ के बीच सरकार से प्राप्त आर्थिक अनुदान हडप लिया, यह अत्यंत गंभीर है । कैग के लेखा परीक्षकों द्वारा किए गए साक्षात निरीक्षण में इस भ्रष्टाचार का भंडाफोड हुआ जिसने सरकारी तंत्र की पोल खोल दी।

वर्तमान विधानसभा के मानसून सत्र में ‘कैग’ ने इस संबंध में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है। जालना, लातूर एवं बुलढाणा के इन तीनों जिलों में छात्रावासों के अनुदान एवं कर्मचारियों के मानदेय हडपने की एक समान पद्धति उजागर हुई है । यह एक जैसी पद्धति देखकर माना जा रहा है कि राज्य के अन्य छात्रावासों में भी ऐसे भ्रष्टाचार की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

६ छात्रावासों में पाए गए चौंकाने वाले तथ्य:

श्री. प्रीतम नाचणकर

१. जालना का महात्मा ज्योतिबा फुले छात्र छात्रावास कई वर्षों से बंद है, स्थानीय लोगों ने बताया।

२. इन किसी भी छात्रावास में पाठ्यपुस्तकें, छात्रों के जूते, कपड़े आदि कोई सामग्री नहीं मिली।

३. राजर्षि शाहू महाराज कन्या छात्रावास की उपस्थिति सूची में एक ही छात्रा का नाम तीन वर्ष तक एक ही कक्षा में दिखाया गया था।

४. छात्रावासोंमें भोजन के लिए एक मास का अन्न-धान्य का भंडार होना अनिवार्य है । वास्तविकता में किसी भी छात्रावास में अन्न-धान्य का एक दाना भी नहीं मिला ।

५. सभी छात्रावासों में अधीक्षक, रसोइया एवं सुरक्षा परिचारक जैसे पद सक्रिय दिखाए गए थे; पर किसी भी छात्रावास में ये पदस्थ कर्मचारी उपस्थित नहीं थे ।

६. जालना के ज्ञानदीप पिछडा-वर्गीय बालकों के छात्रावास शौचालय एवं स्नानगृह के कबाड से भरे हुए थे। इस छात्रावास की २०२१ से २०२४ तक की छात्रों की बायोमैट्रिक उपस्थिति सूची अधीक्षक ने प्रस्तुत की थी किंन्तु वास्तव में वहां बायोमैट्रिक प्रणाली उपलब्ध ही नहीं थी ।

जांच में उजागर हुई बनावटी छात्रावासोंकी जानकारी:

सरकार द्वारा पिछडा वर्ग के छात्रों के लिए दिए गए करोडों रुपये भ्रष्ट अधिकारियों की जेब में चले गए हैं। राज्य में कुल २,३८८ अनुदानित छात्रावास गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा संचालित हैं। इनमें बनावटी छात्रों को दिखाकर अनुदान निकालने की प्रवृत्ति होने की संभावना नकारी नहीं जा सकती है। ‘कैग’ के इस प्रतिवेदन के आधार पर सरकार क्या संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई करेगी, यह यक्ष प्रश्न है।

‘कैग’ के प्रतिवेदन पर आगे क्या कार्रवाई होती है ?

राज्यपाल के माध्यम से ‘कैग’ का प्रतिवेदन विधानसभा के पटल पर रखा जाता है। प्रतिवेदन में सुझाई गई अनियमितताएं एवं वित्तीय हानि जैसी बातें विधानसभा की लोकलेखा समिति के संज्ञान में आती हैं, जो संबंधित विभाग के सचिवों की सुनवाई करती है। ‘कैग’ की प्रतिवेदन एवं उस पर हुई सुनवाई सहित लोकलेखा समिति अपने प्रतिवेदन विधानसभा को प्रस्तुत करती है। लोकलेखा समिति के प्रतिवेदन पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाइयों के अनुपालन प्रतिवेदन विधानसभा में प्रस्तुत किए जाते हैं। ‘कैग’ द्वारा सरकारी योजनाओं का लेखा परीक्षण करके प्रतिवेदन बनाए जाते है; उसके आधार पर आगे की कार्रवाई सरकार द्वारा निश्चित की जाती है।

संपादकीय भूमिका

बंद छात्रावासों के नाम पर अधिकारी इतना बडा भ्रष्टाचार करते हैं, यह 'कैग' के ध्यान में आया; पर तत्कालीन जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन के संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की दृष्टि कैसे नहीं पडी ? क्या अब इन अधिकारियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जाएगी ?