कश्मीर में विस्थापित हिन्दुओं के पुनर्वास के लिए संघर्ष करनेवाले श्री. सुशील पंडित !

श्री. सुशील पंडित ने देहली विश्वविद्यालय से ‘बी.एससी.’ (अर्थशास्त्र) तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से ‘एम.ए.’ (चीनी भाषा) की उपाधियां प्राप्त कीं । उन्होंने कोलकाता के ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ तथा ‘टेलिग्राफ’ जैसे समाचारपत्रों में काम किया । उसके उपरांत उन्होंने ‘मास मीडिया’ के ग्राहकों के लिए संप्रेषण (संवाद) व्यवस्थापित करनेवाले कुछ ‘एम.एन.सी.’ नेटवर्क में काम किया । वर्ष २००० में उन्होंने अपने स्वयं के ‘हाईव कम्युनिकेशन इंडिया प्रायवेट लिमिटेड’ संस्थान की स्थापना की । वे ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ एवं ‘नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एडवर्टाइजिंग’ में ‘स्ट्रैटेजिक मीडिया प्लैनिंग’ सिखाने का काम करते हैं । इसके साथ ही वे ‘कश्मीर की संस्कृति एवं पहचान’ के संबंध में प्रकाशित होनेवाली त्रैमासिक पत्रिका ‘प्रजनाथ’ के संपादक हैं । श्री. सुशील पंडित एक कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं । वे वर्ष १९९० के दशक में कश्मीर से विस्थापित हिन्दू पंडितों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं । उन्होंने इसके लिए ‘रुट्स इन कश्मीर’ नाम का संगठन स्थापित किया है । वे इस संगठन के संस्थापक हैं ।

श्री. सुशील पंडित

वर्ष १९९० के दशक में जिहादी धर्मांधों के आक्रमण में १ लाख से अधिक हिन्दू पंडितों का नरसंहार हुआ, साथ ही उनके महिलाओं के साथ बलात्कार किए गए । उसके कारण ४ लाख से अधिक हिन्दुओं को अपना घर-बार छोडकर विस्थापित होना पडा । तब से लेकर आज तक कश्मीरी हिन्दू उनकी मातृभूमि को वापस नहीं जा पाए हैं । श्री. सुशील पंडित हिन्दुओं का विस्थापन तथा मातृभूमि में लौटने के उनके ३५ वर्षाें के संघर्ष के साक्षी हैं ।

विशेष स्तंभ

छत्रपति शिवाजी महाराज के हिन्दवी स्वराज हेतु उनके सैनिकों का त्याग सर्वोच्च है, उस प्रकार आज भी अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रप्रेमी नागरिक धर्म-राष्ट्र की रक्षा हेतु ‘वीर योद्धा’ के रूप में कार्यरत हैं । उनकी तथा हिन्दू धर्मरक्षा के उनके संघर्ष की जानकारी देनेवाले ‘हिन्दुत्व के वीर योद्धा’ स्तंभ से अन्यों को भी प्रेरणा मिलेगी ! – संपादक

१. कश्मीरी हिन्दुओं के लिए प्रयासरत श्री. सुशील पंडित 

कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार करनेवालों को दंड मिले तथा अनुच्छेद ३७० को हटाया जाए, ये उनकी प्रमुख मांगें रही हैं । वर्तमान में अनुच्छेद ३७० को हटाया गया है; परंतु वहां विस्थापित हिन्दू पंडितों का पुनर्वास हो पाएगा, ऐसे कोई लक्षण दिखाई नहीं देते । श्री. पंडित एक विचारक हैं; इसलिए उन्हें विभिन्न समाचारवाहिनियों पर आयोजित की जानेवाली परिचर्चाओं में उनके विचार व्यक्त करने के लिए आमंत्रित किया जाता है । विगत अनेक वर्षाें से वे विभिन्न मंचों से कश्मीर में हिन्दुओं पर हुए अत्याचारों के विषय में जनजागरण कर रहे हैं । कश्मीर में जिहादी आतंकियों द्वारा किए गए ‘हिन्दुओं के वंशविच्छेद’ को ‘नरसंहार’ घोषित किया जाए, यह उनकी मांग है । इसके साथ ही कश्मीर से विस्थापित हिन्दुओं का वहां सम्मानपूर्वक पुनर्वास किया जाए, इसके लिए वे प्रयासरत हैं ।

२. श्री. सुशील पंडित की हत्या का प्रयास

श्री. सुशील पंडित हिन्दुत्वनिष्ठ हैं, साथ ही वे हिन्दू पंडितों का कश्मीर में पुनर्वास हो; इसके लिए वे विभिन्न मंचों से प्रयास कर रहे हैं । उसके कारण उन्हें विरोध का भी सामना करना पडा है । वर्ष २०२१ में सुखविंदर सिंह (आयु २५ वर्ष) तथा लखन राजपूत (आयु २१ वर्ष) को श्री. सुशील पंडित की हत्या का षड्यंत्र रचने के आरोप में देहली पुलिस ने बंदी बनाया था ।

सनातन के गोवा, रामनाथी सनातन आश्रम के अवलोकन का आध्यात्मिक स्तर पर लाभ लेनेवाले श्री. सुशील पंडित !

सनातन प्रभात पत्रिकाओं के बारे में जानकारी लेते हुए श्री. सुशील पंडित (बाएं) और अधिवक्ता योगेश जलतारे उन्हें जानकारी समझाते हुए

१५.१.२०१८ को श्री. सुशील पंडित रामनाथी आश्रम के अवलोकन हेतु आश्रम पधारे थे । उन्होंने इस अवलोकन के प्रत्येक चरण का आध्यात्मिक स्तर पर लाभ उठाया । बीच-बीच में उनका ध्यान लग रहा था । आश्रम के प्रत्येक सूत्र को केवल जानकर ही नहीं, अपितु वे उसे अनुभव करने का प्रयास कर रहे थे । आश्रम में दर्शनार्थियों को पंचतत्त्वों में से एक-दूसरी अनुभूति होती है, उदा. सुगंध प्रतीत होना अथवा प्रकाश दिखाई देना इत्यादि; परंतु श्री. सुशील पंडित को आश्रम की दीवार को स्पर्श करने पर हल्केपन की अनुभूति हुई अर्थात वायुतत्त्व की भी अनुभूति हुई । ध्यानमंदिर जाने पर अपनेआप ध्यान लगने से खडे-खडे ही उनकी आंखें बंद होने लगीं । उसके कारण वे तुरंत कुर्सी में बैठ गए तथा उस समय उन्होंने ध्यान का आनंद उठाया । उन्होंने बताया कि ध्यानमंदिर से बाहर निकलने का उनका मन नहीं कर रहा था । आश्रम के प्रत्येक स्थान पर उनके मुख से केवल एक ही वाक्य निकल रहा था, ‘‘अद्भुत ! सबकुछ अद्भुत !!’’

– श्री. योगेश जलतारे, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा.

३. हिन्दू जनजागृति समिति के उपक्रमों में रहा है सहभागश्री. सुशील पंडित

हिन्दू जनजागृति समिति के विभिन्न उपक्रमों तथा आंदोलनों में सहभागी होते हैं, साथ ही वे इससे पूर्व गोवा में होनेवाले ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ में सहभागी हुए हैं । श्री. सुशील पंडित ने सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित ‘चर्चा हिन्दू राष्ट्र की’, इस विशेष संवाद के अंतर्गत ‘क्या हम तृतीय विश्वयुद्ध की दिशा में बढ रहे हैं ?’ इस ‘ऑनलाइन’ संवाद में भाग लिया है ।

🚩 विशेष संवाद :🌏 क्या हम तृतीय विश्वयुद्ध की दिशा में बढ रहे हैं ?

इसके साथ ही वे ‘भारत का विकृत सेक्युलैरिजम’ विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में भी सहभागी थे, जिसका ‘फेसबुक’ एवं ‘यू ट्यूब’ के माध्यम से प्रसारण किया गया था ।

पीडित कश्मीरी हिन्दुओं की मांगें मानी जाने तक वे लडते ही रहेंगे !

‘वर्ष १९९० में कश्मीर में हिन्दुओं का सामूहिक नरसंहार किया गया, जिसे सरकार ‘नरसंहार’ घोषित करे, इस नरसंहार के उत्तरदायी सभी दोषियों को कठोर दंड दिया जाए, इन नरसंहार में वहां के धर्मांधों ने जो पीडित हिन्दुओं की भूमि तथा संपत्ति हडप ली है; उन्हें हिन्दुओं को वापस दी जाए तथा विस्थापित हिन्दुओं को कश्मीर में पुनः बसने के लिए विशिष्ट भूमि आवंटित की जाए’, केंद्र सरकार से उनकी ये मांगें हैं । हम कश्मीरी हिन्दू कभी नहीं झुकेंगे तथा हमारी मांगें मानी जाने तक हम लडते ही रहेंगे !

Sushil Pandit talks about a Genocide which is not acknowledged by the world. Kashmiri Hindu Genocide

(सौजन्य : IndUS Lens)

४. गोवा के सनातन के आश्रम के विषय में श्री. सुशील पंडित के उद्गार 

‘रामनाथी (गोवा) का सनातन का आश्रम एक उत्तम स्थान है तथा यहां का वातावरण अद्भुत है । आश्रम के साधक श्रद्धावान हैं । वे सात्त्विक हैं तथा मुझे उनमें साधना के प्रति श्रद्धा प्रतीत हुई । सभी को इन साधकों की भांति जीवन में अनुशासन लाने के प्रयास करने चाहिए । वर्तमान में जहां लोग धर्मज्ञान के संवर्धन का कार्य नहीं कर रहे हैं, ऐसी स्थिति में सनातन संस्था यह कार्य कर रही है, जो अतुलनीय है ।’

– श्री. सुशील पंडित, संस्थापक, ‘रुट्स इन कश्मीर’

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