आज के इस युग में जब अर्धसत्य, इसके साथ ही राजनीतिक अथवा सामाजिक परिवर्तन लाने के लिए किए जानेवाले ऊपरी स्तर के कार्य एवं सामाजिक माध्यमों द्वारा किए जानेवाले नित्य के दिशाभ्रम का गहरा अंधकार फैला है, ऐसे में सुश्री (कु.) डॉ. वैदेही ताम्हण का नाम सर्वत्र एक तेजस्वी प्रकाश समान कार्य कर रहा है । उनके सभी कार्य निर्भय, सुदृढ एवं उद्देश्यपूर्ण हैं । सुश्री वैदेही का जन्म तेलंगाना राज्य के ब्राह्मण परिवार में हुआ था । उनका संपूर्ण जीवन तपस्या, सेवा एवं अध्यात्म का एक पवित्र संगम है । वे केवल एक पत्रकार, समाज सुधारक अथवा उपचार करनेवाली (हीलर) नहीं; अपितु उनका अपना एक अद्भुत व्यक्तित्व है । धर्मरक्षा के लिए समर्पित एक निर्भीक आवाज, सत्यरक्षक तथा शक्ति का चलता-फिरता, साथ ही बोलता रूप, यह है उनकी पहचान । सुश्री (कु.) डॉ. वैदेही ताम्हण के कार्य के विषय में उनके सहयोगी श्री. अक्षय रेडीज द्वारा दी गई जानकारी यहां प्रस्तुत है ।

विशेष स्तंभ

छत्रपति शिवाजी महाराज के हिन्दवी स्वराज्य के लिए मावळों (शिवाजी महाराजजी के सैनिकों को मावळे कहते थे) एवं धर्मयोद्धा द्वारा किया गया त्याग सर्वोच्च है, उसी प्रकार आज भी अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्र प्रेमी नागरिक राष्ट्र-धर्म की रक्षा के लिए ‘धर्मयोद्धा’ के रूप में कार्य कर रहे हैं । उनकी तथा उनके हिन्दू धर्मरक्षा के संघर्ष की जानकारी देनेवाले ‘हिन्दुत्व के धर्मयोद्धा’ के इस स्तंभ से अन्यों को भी प्रेरणा मिलेगी । इन उदाहरणों से अपने मन की चिंता दूर होकर उत्साह जागृत होगा ! – संपादक
१. कपोलकल्पित, मनगढंत एवं झूठे कथानकों (narrative)का विरोध करनेवाली सुश्री डॉ. वैदेही ताम्हण !
सुश्री डॉ. वैदेही ताम्हण की जीवनयात्रा अग्नि परीक्षा ही थी जिसका उन्होंने धैर्य से सामना किया । पक्षपाती (पूर्वाग्रह – biassed) समाचार तथा सरकार द्वारा समर्थित कपोलकल्पित अथवा मनगढंत कथाओं के सामने वे कभी भी नहीं झुकीं । जब देश के प्रमुख प्रसारमाध्यम हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों पर कीचड उछाल रहे थे, इसके साथ ही धर्मरक्षा का कार्य करनेवाले कार्यकर्ताओं को ‘कट्टर’ तथा सरलता से ‘हिन्दू आतंकवाद’ के झूठे कथानक को समर्थन एवं पुष्टि दे रहे थे, तब उसका विरोध करने के लिए सुश्री डॉ. वैदेही ताम्हण दृढता से डटी रहीं । मन में अन्याय के प्रति चिढ होने से उन्होंने अपने हाथ में लेखनी उठा ली । अपने लेखों से उन्होंने व्यवस्था को प्रश्न पूछे एवं षड्यंत्र उजागर किए । इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों को स्मरण करवाया कि ‘लडाऊ वृत्तिवाले पत्रकारों के शब्द जब अंगारों के समान तेजस्वी होते हैं, तब सत्य को दबाकर नहीं रखा जा सकता !’
२. न्याय एवं धर्म के लिए तत्त्वनिष्ठ एवं निर्भय पत्रकारिता करनेवाली सुश्री डॉ. वैदेही ताम्हण !
सुश्री डॉ. वैदेही वृत्तपत्र में केवल संपादकीय ही नहीं लिखतीं, अपितु उससे वे समाज का आवाहन करती हैं । उन्होंने अपने लेखों से गोरक्षा कानून की आवश्यकता, फेसबुक पर हिन्दू जनजागृति समिति पर लाई गैरकानूनी बंदी, इसके साथ ही ‘भगवा आतंकवाद’ के अस्तित्व पर प्रश्न चिह्न लगानेवाले विषयों पर आवाज उठाई । वे ऐसे लाखों लोगों की आवाज बन गईं, जिनकी आवाज दबा दी गई थी । वर्ष २००८ में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA- united progressive allaince) ने मूल सत्य की अनदेखी करते हुए निर्जल्लता से ‘हिन्दू आतंकवाद’ नामक संकल्पना थोपी । उस समय उसका विरोध करनेवालों में सुश्री वैदेही अग्रणी थीं ।

उनकी पत्रकारिता भी न्याय एवं धर्म के लिए चलाया गया एक युद्ध है । सुश्री वैदेही का कार्य केवल राजनीतिक पक्षों के झूठेपन के विरोध करने तक ही सीमित नहीं है, अपितु उसकी व्याप्ति बहुत बडी है । उन्होंने अपना निजी ‘आफ्टरनून’ एवं ‘द डेमोक्रसी’ नामक समाचारपत्र आरंभ कर स्वतंत्र, निर्भय एवं अडिग समांतर साम्राज्य खडा किया । ऐसे आधुनिक काल में जब प्रसारमाध्यम राजनीतिक पक्षों से समीपता तथा ‘टी.आर.पी.’ के लिए अपने तत्त्व एक ओर रख देते हैं, ऐसे में सुश्री वैदेही ने २० वर्षाें तक बिना किसी की सहायता के अपने खर्च पर अपना समाचारपत्र अकेले चलाया । आज के युग में ‘चापलूसी करना’ एक सामान्य सी बात हो गई है । ऐसे में तत्त्वनिष्ठ एवं निर्भय पत्रकारिता करना, सुश्री वैदेही के दृढ निश्चय का एक अनूठा उदाहरण ही है ।
समाज के लिए अडिग कार्य करनेवाली सुश्री डॉ. वैदेही ताम्हण !

वर्ष २०२५ में महाकुंभ मेले में उन्होंने गुरुदीक्षा लेकर संन्यास लिया । ‘विश्व से दूर जाने के लिए नहीं, अपितु आध्यात्मिक दृष्टि से विश्व की सेवा कर पाएं’, इसलिए उन्होंने संन्यास लिया है । उनका संन्यास विश्व से अलिप्त हुए बिना साधना करके समष्टि सेवा करने के लिए उठाया गया एक कदम है । सुश्री डॉ. वैदेही ताम्हण केवल बोलती नहीं हैं, अपितु वे कृति भी करती हैं । वे अन्याय का विरोध कर, सत्य सामने लाती हैं । जब व्यवस्था सहायता नहीं कर पाती, तब वे सहायता के लिए दौडी आती हैं । सुश्री वैदेही धार्मिक शीतयुद्ध की एक धधकती ज्वाला हैं । सुश्री वैदेही ताम्हण के रूप में विश्व के योग्य नेतृत्व की खोज पूर्ण होती है । आज जब देश अपनी अंतरात्मा को खोज रहा है, तब वे सद्विवेक के रूप में आधार दे रही हैं । सुश्री डॉ. वैदेही ताम्हण केवल एक सत्त्वशील महिला ही नहीं हैं, अपितु समाज के लिए अविरत एवं दृढता से कार्य करनेवाली अविस्मरणीय प्रत्यक्ष शक्तिस्वरूपा हैं ।
३. आयुर्वेद, आध्यात्मिक उपासना एवं प्राचीन वैदिक ज्ञान का पुनरुज्जीवन
समाचारपत्र में लेखन करना ही उनका एकमेव कौशल्य नहीं है, अपितु वे दुःखी अंतःकरणों के प्रति संवेदनशील हैं एवं आत्मशक्ति जागृत करने में भी सहायता करती हैं । वैदेहीजी ने ‘वेद आरोग्यम् पंचकर्म केंद्र’ स्थापित किए हैं । उसकी ओर से वे केवल आयुर्वेदिक उपचार ही नहीं, अपितु संस्कारपूर्ण उपाय करती हैं । इन उपायों के कारण व्यसनाधीन व्यक्ति व्यसनमुक्त होते हैं । इतना ही नहीं, अपितु उनका आध्यात्मिक पुनर्वसन भी होता है । कल्याण के निसर्गरम्य वातावरण में उनके आश्रम में आदिवासी बालक ‘सौंदर्य लहरी (शंकराचार्यजी द्वारा रचा स्तोत्र)’ की उपासना करते हैं । इसलिए अनेक दिशाहीन लोगों को जीवन का उद्देश्य ध्यान में आया है । इस आश्रम में सुश्री वैदेही के मार्गदर्शन में प्राचीन वैदिक ज्ञान का पुनरुत्थान चल रहा है ।
#PahalgamAttack
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४. धर्मांतरण रोकने के लिए किए जा रहे प्रयत्न
धर्मांतरण रोकने के विषय में वे केवल बोलती ही नहीं हैं, अपितु धर्मांतरण न हो, इसके लिए उन्होंने अनेक परिवारों का पुनर्वसन किया है । इस परिवार के बच्चों की शिक्षा का प्रायोजकत्व लेना तथा उनके लिए उपजीविका के साधन निर्माण करना, इस प्रकार सहायता कर उन्होंने दिखा दिया कि हिन्दुत्व सर्वसमावेशक, सुधारवादी तथा अत्यंत करुणामयी है ।
भारत के विविध क्षेत्रों के व्यक्ति, महिला तथा संस्थाओं को पुरस्कार देकर सम्मान !

गत १८ वर्षाें से वे ‘न्यूजमेकर्स अचीवर्स अवॉर्ड’ एवं ‘पिलर्स ऑफ हिन्दुत्व’ के व्यासपीठ पर प्रसिद्धि से दूर भारत के अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, संस्कृति रक्षक, महिला नेता, आध्यात्मिक गुरु का सम्मान कर रही हैं । उनका मानना है कि ऐसे लोगों का कार्य देश की आत्मा है ! सुश्री वैदेही इस माध्यम से सभी को प्रोत्साहन देती हैं तथा उन्हें सम्मानित करती हैं । इस पुरस्कार के विषय में सुश्री डॉ. वैदेही ताम्हण का कहना है, ‘ये पुरस्कार ऐसे लोगों के लिए हैं, जिन्होंने अपने समाज एवं संस्कृति के लिए अतुलनीय योगदान दिए हैं । उनका सम्मान करना ही इसका उद्देश्य है । यह सम्मान देवभूमि उत्तराखंड की परंपराओं तथा हिन्दुत्व की रक्षा करनेवालों की प्रशंसा करने समान है ।’
५. वैदिक ज्ञान का प्रसार करनेवाला ‘वेदशास्त्र रिसर्च फाउंडेशन’

‘वेदशास्त्र रिसर्च फाउंडेशन’ संस्था स्थापित कर उस वैदिक ज्ञान का प्रसार कर रही हैं । इसलिए नई पीढी के मन में अध्यात्म का बीजरोपण हो रहा है । इससे ‘सनातन धर्म एक जीवनशैली है’, वे यह विचार अंकित करने का कार्य कर रही हैं ।

६. ग्रंथ लेखिका, सम्मान एवं पुरस्कार

सुश्री डॉ. वैदेही विविध प्रकार के कार्य में सहभागी हैं । वे ‘२७ सोल्स : स्पाईन चिलींग स्केरी स्टोरीज’ अंग्रेजी भाषा की इस पुस्तक सहित अत्यंत लोकप्रिय ८ ग्रंथों की लेखिका भी हैं ।

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उन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण उपक्रमों के लिए एक व्यापक व्यासपीठ उपलब्ध करवाया है । उन्हें बहुत सम्मान एवं पुरस्कार मिले हैं । जिनमें ‘फोर्ब्स’ में सहभाग, वैश्विक मान्यता एवं ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रेकॉर्डस’ में उल्लेख, ‘भारत विभूति पुरस्कार’ के साथ अनेक पुरस्कारों का समावेश है । ऐसा होते हुए भी उनका मानना है कि ‘लाखों लोगों के मन में उनके प्रति जो आदर है, वही उनका खरा सम्मान है ।’
दैनिक ‘सनातन प्रभात’ एवं ‘सनातन संस्था’ का सम्मान
सुश्री वैदेही ताम्हण ने १ मई २०१२ को दैनिक ‘सनातन प्रभात’ को ‘उत्कृष्ट मराठी दैनिक’ के लिए ‘न्यूजमेकर्स अचिवर्स अवॉर्ड’ प्रदान किया ।
हमें हिन्दू धर्म के प्रति घृणा के विरोध में दृढतापूर्वक खडा होना चाहिए ! – US Congressman Sanford Bishop
Religious Conversion Love Jihad : पिछले २४ घंटों में सामने आईं लव जिहाद की ४, जबकि धर्मांतरण की २ घटनाएं ।
महिला सदस्यों की समिति द्वारा लैंगिक शोषण विरोधी कानूनों की समीक्षा की जाए । – CM Devendra Fadnavis
(और इनकी सुनिए…) ‘मानवाधिकारों का उल्लंघन होने पर भारत की आलोचना करने से पीछे नहीं हटेंगे !’ – US Lawmakers
New FCRA Rules : ‘धार्मिक कृति’ के नाम पर धर्मांतरण करने वालों के विदेशी दान पर केंद्र सरकार का प्रहार
विधान मंडल के वाहन तल में लावारिस स्थिति में १५ से अधिक वाहन पडे हैं ।