मोरगांव (जि. पुणे) के श्री मयुरेश्वर मंदिर में २ प्राचीन ऐतिहासिक ताम्रपट मिले ।
प्राप्त ताम्रपट देवनागरी एवं संस्कृत लिपि में अंकित हैं । इस संपूर्ण लेखन का गहन वाचन करने हेतु राज्य पुरातत्व विभाग अब ‘भारतीय पुरातत्त्व विभाग’ की सहायता लेगा ।
प्राप्त ताम्रपट देवनागरी एवं संस्कृत लिपि में अंकित हैं । इस संपूर्ण लेखन का गहन वाचन करने हेतु राज्य पुरातत्व विभाग अब ‘भारतीय पुरातत्त्व विभाग’ की सहायता लेगा ।
आक्रमणकारियों की क्रूरता को पाठ्यपुस्तकों, धारावाहिकों तथा फिल्मों के माध्यम से नई पीढी तक पहुंचाने का प्रयास करना आवश्यक है ।
वर्ष १८३९ तक भारत में ६.७५ लाख गुरुकुल एवं ९१ प्रतिशत साक्षरता दर !
इस संदर्भ में मूल याचिका अभी भी प्रलंबित है एवं उस पर आगामी सुनवाई ८ जून को होगी, ऐसा न्यायालय ने घोषित किया ।
किले पर ‘ईदगाह’ का निर्णय न्यायप्रविष्ट, फिर भी मार्ग अवरुद्ध कर नमाज पढी !
नमाज पढने के समय हिन्दुओं को किले के दुर्गादेवी मंदिर में प्रवेश निषेध l
इससे सरकार के आदेश पर इस प्रकार निष्क्रिय रहनेवाला प्रशासन जनता के कार्य कैसे करता होगा, इसकी कल्पना ही न करना श्रेयस्कर है ।
नामकरण के दूसरे चरण में पाकिस्तान के सिंध एवं खैबर पक्तूनख्वा प्रांतों में भी मूल नामों की घोषणा संभव है । नगर में नाम परिवर्तन की प्रक्रिया १९९० के दशक में बाबरी ढांचे के गिराने के उपरांत प्रारंभ हुई थी ।
गोवा के अधिकांश मंदिर अन्य राज्यों के मंदिरों की तुलना में अत्यंत प्रशस्त एवं स्वच्छ हैं । गोवा के जो कुछ प्रसिद्ध देवस्थान हैं, उनका इतिहास भी रोमांचकारी है । पुर्तगालियों ने गोवा पर ४५० वर्ष राज्य किया । पुर्तगालियों का जब गोवा में प्रभाव जमना आरंभ हुआ, तब सर्वप्रथम उन्होंने हिन्दुओं के मंदिरों को तोडना प्रारंभ किया ।
खंडपीठ ने कहा, ‘यद्यपि कालचक्र के प्रभाव में इस स्थान पर कुछ नियम आरोपित किए गए थे, तथापि इस स्थान पर पूजा का स्थान होने की निरंतरता दृष्टिगोचर हुई है । इस स्थल पर प्राप्त ऐतिहासिक सामग्रियां यह सिद्ध करती हैं कि यह राजा भोज से संबंधित संस्कृत शिक्षा का एक केंद्र था ।
‘स्वबोध, मित्रबोध एवं शत्रुबोध’, यह त्रिसूत्री मुख्यतः राष्ट्रवाद, संस्कृति एवं भूराजनीतिक संदर्भ में उपयोग की जाती है । किसी भी जीवंत समाज अथवा राष्ट्र को यदि प्रगति करनी हो और अपना अस्तित्व बनाए रखना हो, तो उसे इन ३ बातों का सटीक ज्ञान होना अनिवार्य है ।