मोरगांव (जि. पुणे) के श्री मयुरेश्वर मंदिर में २ प्राचीन ऐतिहासिक ताम्रपट मिले ।

प्राप्त ताम्रपट देवनागरी एवं संस्कृत लिपि में अंकित हैं । इस संपूर्ण लेखन का गहन वाचन करने हेतु राज्य पुरातत्व विभाग अब ‘भारतीय पुरातत्त्व विभाग’ की सहायता लेगा ।

बाबर, अकबर, हुमायूं आदि आक्रमणकारियों का संग्रहालय बनाकर उनके अत्याचारों को प्रदर्शित किया जाए । – Sangeet Singh Som

आक्रमणकारियों की क्रूरता को पाठ्यपुस्तकों, धारावाहिकों तथा फिल्मों के माध्यम से नई पीढी तक पहुंचाने का प्रयास करना आवश्यक है ।

भारतीयों में गुलामी के रोग को जड से उखाड फेंकनेवाली शिक्षाप्रणाली चाहिए !

वर्ष १८३९ तक भारत में ६.७५ लाख गुरुकुल एवं ९१ प्रतिशत साक्षरता दर !

‘बकरीद’ तथा उर्स के अवसर पर विशाळगढ पर पशुओं की बलि देने के लिए न्यायालय की अनुमति !

इस संदर्भ में मूल याचिका अभी भी प्रलंबित है एवं उस पर आगामी सुनवाई ८ जून को होगी, ऐसा न्यायालय ने घोषित किया ।

Durgadi Fort Thane : ठाणे जिले का दुर्गाडी किला ‘दूसरी भोजशाला’ !

किले पर ‘ईदगाह’ का निर्णय न्यायप्रविष्ट, फिर भी मार्ग अवरुद्ध कर नमाज पढी !
नमाज पढने के समय हिन्दुओं को किले के दुर्गादेवी मंदिर में प्रवेश निषेध l

गढ -किलों पर से अतिक्रमण हटाने के लिए जनवरी मास में निकाले गए परिपत्रक पर ५ मास के उपरांत भी कोई कार्रवाई नहीं !

इससे सरकार के आदेश पर इस प्रकार निष्क्रिय रहनेवाला प्रशासन जनता के कार्य कैसे करता होगा, इसकी कल्पना ही न करना श्रेयस्कर है ।

Lahore Renames Places : लाहौर (पाकिस्तान) के ९ सार्वजनिक स्थानों के इस्लामी नाम बदलकर पुनः हिन्दू नाम रखे गए !

नामकरण के दूसरे चरण में पाकिस्तान के सिंध एवं खैबर पक्तूनख्वा प्रांतों में भी मूल नामों की घोषणा संभव है । नगर में नाम परिवर्तन की प्रक्रिया १९९० के दशक में बाबरी ढांचे के गिराने के उपरांत प्रारंभ हुई थी ।

शून्य से खडे हुए गोवा के वैभवशाली मंदिर !

गोवा के अधिकांश मंदिर अन्य राज्यों के मंदिरों की तुलना में अत्यंत प्रशस्त एवं स्वच्छ हैं । गोवा के जो कुछ प्रसिद्ध देवस्थान हैं, उनका इतिहास भी रोमांचकारी है । पुर्तगालियों ने गोवा पर ४५० वर्ष राज्य किया । पुर्तगालियों का जब गोवा में प्रभाव जमना आरंभ हुआ, तब सर्वप्रथम उन्होंने हिन्दुओं के मंदिरों को तोडना प्रारंभ किया ।

Bhojshala Verdict : भोजशाला मस्जिद नहीं, हिन्दुओं का श्री वाग्देवी मंदिर ! – मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय

खंडपीठ ने कहा, ‘यद्यपि कालचक्र के प्रभाव में इस स्थान पर कुछ नियम आरोपित किए गए थे, तथापि इस स्थान पर पूजा का स्थान होने की निरंतरता दृष्टिगोचर हुई है । इस स्थल पर प्राप्त ऐतिहासिक सामग्रियां यह सिद्ध करती हैं कि यह राजा भोज से संबंधित संस्कृत शिक्षा का एक केंद्र था ।

स्वबोध, मित्रबोध और शत्रुबोध !

‘स्वबोध, मित्रबोध एवं शत्रुबोध’, यह त्रिसूत्री मुख्यतः राष्ट्रवाद, संस्कृति एवं भूराजनीतिक संदर्भ में उपयोग की जाती है । किसी भी जीवंत समाज अथवा राष्ट्र को यदि प्रगति करनी हो और अपना अस्तित्व बनाए रखना हो, तो उसे इन ३ बातों का सटीक ज्ञान होना अनिवार्य है ।