हिन्दुओं को ज्ञानवापी अपने अधिकार में लेना चाहिए ! – तस्लिमा नसरीन

देश के और विदेश के कितने मुसलमान सत्य इतिहास स्वीकार कर ऐसा बताने का साहस कर रहे हैं , ऐसा विचार किया, तो ‘एक भी नहीं’, ऐसा ही उत्तर मिलता है । इसका अर्थ यह है कि धर्मनिरपेक्षता और अन्य धर्मों का आदर केवल हिन्दुओं को करना चाहिए और अन्य हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों पर आघात करें , ऐसा ही होता है, यह बात हिन्दू कम से कम अब तो समझें ?

कुतुब मीनार हिन्दू वास्तुशास्त्रानुसार बनाया गया सूर्यस्तंभ ! – पुरातत्व विशेषज्ञ धर्मवीर शर्मा

कुतुब मीनार स्थित हिन्दू और जैन मंदिरों को गिराकर वहां बनाई गई कुव्वत-उल्-इस्लाम मस्जिद के खंभों पर एक मूर्ति मिली है । यह मूर्ति भगवान नरसिंह और भक्त प्रह्लाद की है, यह जानकारी भी धर्मवीर शर्मा ने दी ।

कुतुब मीनार और ताजमहल केंद्र सरकार हिन्दुओं को सौंपे ! -कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णन् की मांग

काँग्रेस की सरकार के समय काँग्रेस ने ऐसा क्यों नहीं किया और कृष्णन् ने इतने वर्ष यह बताया क्यों नहीं ?

जम्मू-कश्मीर में शारदा मन्दिर के निर्माण का आरंभ !

मन्दिरों के निर्माण के साथ, उनका रक्षण होने के लिए, जिहादी आतंकवादियों के विरुद्ध प्रभावी उपाय करना आवश्यक है । इसके लिए, केन्द्र सरकार को प्रयत्न करना चाहिए ; ऐसी हिन्दुओं की इच्छा है !

उज्जैन के हजारों वर्ष पुराने दो सूर्य मंदिरों से होती थी कालगणना, कृष्ण व अर्जुन ने स्थापित किए थे ये मंदिर जहां से कर्क रेखा गुजरती थी

शस्त्र व शास्त्र के ज्ञाता अर्जुन ने जिस स्थान पर सूर्य की मूर्ति स्थापित की थी उस स्थान से कर्क रेखा होकर गुजरती थी। दोनों मंदिरों के बीच करीब आठ किलोमीटर की दूरी है । मकर संक्रंति व रविवार को इन मंदिरों में श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना करते हैं ।

हिन्दुओं को देवताओं की मूर्तियां स्थापित कर पूजा का अधिकार देने की मांग, न्यायालय ने अस्वीकार की !

अतीत में की गई चूकें, वर्तमान और भविष्य की शांति भंग होने का आधार नहीं बन सकतीं ! ऐसा कह कर साकेत न्यायालय ने ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप १९९१’ इस कानून के आधारे कुतुबमिनार में २७ हिन्दू और जैन मंदिरों में पूजा का अधिकार मांगनेवाली याचिका अस्वीकार की !

पाक अधिकृत कश्मीर में ‘शारदा यात्रा’ पुन: प्रारंभ करने के लिए शारदा सेवा समिती का प्रयास !

यद्यपि यह एक विश्वविद्यालय है, किन्तु मंदिर की वार्षिक तीर्थयात्रा महाराजा प्रताप सिंह और रणबीर सिंह के शासनकाल के समय प्रसिद्ध हुई थी। १९४७ में विभाजन के उपरांत, तीर्थयात्रा बाधित हुई और मंदिर की उपेक्षा की गई।

पूरे विश्व के हिन्दुओं द्वारा हिन्दू धर्म की उचित सैद्धांतिक भूमिका प्रस्तुत करने के कारण ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिन्दुत्व’ परिषद विफल हुई ! – सद्गुरु डॉ. पिंगळे, राष्ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्दू जनजागृति समिति

‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिन्दुत्व’ परिषद के आयोजक और वक्ता केवल हिन्दू धर्मविरोधी नहीं; अपितु नक्सलवादियों के समर्थक तथा भारतीय सैनिकों का विरोध करनेवाले देशद्रोही ही हैं । इस परिषद का पूरे विश्व के हिन्दुओं ने सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों द्वारा प्रतिकार किया ।

दिल्ली के ३६५ गांवों को इस्लामी आक्रांताओं के नाम

इस्लामी आक्रांताओं के नाम पर गांव, शहर तथा मार्ग होना, यह गुलामी का प्रतीक है । इसे हटाने के लिए केंद्र सरकार को तत्परता से कदम उठाना चाहिए, ऐसा ही राष्ट्रप्रेमियों को लगता है !-