थूकने वालों से अब ढाई सहस्र रुपये दंड वसूल करें ! – मुंबई उच्च न्यायालय

हमारे देश में थूकना एक ‘राष्ट्रीय व्यसन ’ ! - न्यायालय की टिप्पणी

मुंबई उच्च न्यायालय

मुंबई – मुंबई में सार्वजनिक मार्गों पर कचरा फेंकने की अनुमति किसी भी नागरिक को नहीं है ; परंतु हमारे देश में थूकना, एक ‘राष्ट्रीय व्यसन’ बन गया है । थूकने पर दंड वर्तमान के नाममात्र २५० रुपयों से बढाकर ढाई सहस्र रुपये करें, ऐसा मुंबई उच्च न्यायालय ने मुंबई महानगरपालिका को निर्देशित किया । कांजुरमार्ग कचरा डंपिंग ग्राउंड परिसर के निवासियों को पीडित करने वाला प्रदूषण, निरंतर की दुर्गंध, गैस उत्सर्जन तथा स्वास्थ्य के संकट, इस विषय में प्रविष्ट की गईं विविध याचिकाओं पर सुनवाई के समय न्यायालय ने यह मत व्यक्त किया ।

न्यायालय ने आगे कहा कि यदि इंदौर को ‘सर्वोत्तम स्वच्छ नगर’ का पुरस्कार मिल सकता है, तो मुंबई को वह क्यों नहीं मिल सकता ? वहां के महानगरपालिका अधिकारियों की निष्ठा के कारण ही यह साध्य हो सका । मुंबई के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता ? यदि इच्छाशक्ति हो, तो इसे साध्य करना कठिन नहीं है । सार्वजनिक मार्गों को कचरामुक्त रखना, यह महानगरपालिका के अधिकारियों का कर्तव्य है । सार्वजनिक मार्गों पर स्थित कचरा तत्काल हटाने के लिए प्रत्येक विभाग अधिकारी को आयुक्त आदेश दें । महानगरपालिका तथा नागरिक दोनों में इच्छाशक्ति का अभाव दिखाई देता है । यदि इच्छाशक्ति हो, तो कचरामुक्त मार्गों का स्वप्न संभव है । उसके न होने के कारण ही नगर में मार्गों पर सर्वत्र कचरा पडा रहता है । परिणामस्वरूप वर्षा ऋतु में जलभराव होना, खुले नालों में गिरकर नागरिकों की मृत्यु होना जैसी घटनाएं घटने के साथ ही स्वास्थ्य से संबंधित अन्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं ।

कांजुरमार्ग में मोशी के समान घटना घटित न हो । नागरिक सार्वजनिक मार्गों पर कचरा तथा ठोस कचरा न फेंकें, साथ ही कचरे का वर्गीकरण करें, इस विषय में उनमें जागरूकता निर्माण की जानी चाहिए । ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का कड़ाई से अनुपालन करने का प्रयास किया जाना चाहिए । जब तक जमीनी स्तर पर ऐसे उपाय नहीं किए जाते, तब तक ठोस कचरा संकलन तथा उसके निस्तारण की जटिलता केवल एक उपक्रम ही सिद्ध नहीं होगी, अपितु उसके प्रभावी प्रबंधन में भी बाधाएं आएंगी, ऐसा भी खंडपीठ ने इस समय स्पष्ट किया ।

संपादकीय भूमिका

विगत ७८ वर्षों के सर्वदलीय शासकों द्वारा जनता को अनुशासित न करने का ही यह परिणाम है !