केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व अवर सचिव व ‘पद्मश्री’ प्राप्त आर.वी.एस. मणि ने किया दावा
‘पीपल-टू-पीपल कांटेक्ट’ के नाम पर चल रही थी तस्करी
भारत में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को मादक पदार्थों की तस्करी से मिलता था ३० प्रतिशत फंड (निधि)
(भारत-पाकिस्तान के बीच पीपल-टू-पीपल कांटेक्ट यानी दोनों देशों के कलाकार, खिलाडी आदि का आना-जाना)

नई दिल्ली – भारत दौरे पर आई पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कई खिलाडी मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त थे । इस तस्करी से मिलनेवाला पैसा आतंकवादी आक्रमणों के लिए प्रयोग किया जा रहा था, ऐसा सनसनीखेज दावा भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व अवर सचिव आर.वी.एस. मणि ने किया है । मणि ने एक इंटरव्यू में ऐसा दावा करते हुए शोएब अख्तर, मोहम्मद आसिफ, सलीम मलिक, शाहिद अफरीदी तथा हसन रजा इन क्रिकेटरों के नाम लिए । इस कृत्य के पीछे पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी ‘आई.एस.आई.’ होने का आरोप भी उन्होंने किया ।
वर्ष २०२६ में पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त मणि ने इस संदर्भ में एक उदाहरण दिया । उन्होंने कहा कि अक्टूबर २००६ में पाकिस्तान के उच्चायुक्त (हाइ कमिश्नर) के पास अख्तर तथा आसिफ ने भारत के दौरे पर होते समय स्वयं के साथ मादक पदार्थ ले जाने की स्वीकृति (मानी) दी थी । उस समय उच्चायोग ने उन्हें स्वदेश भेज दिया । दोनों ने कहा था कि मादक पदार्थ हमने व्यक्तिगत उपयोग के लिए ले जाए थे; परंतु वह केवल एक चाल या बहाना था । उसके पीछे की पूरी पृष्ठभूमि समझना आवश्यक है ।
🚨 SHOCKING EXPOSÉ: Drugs, Cricket & Terror Funding 🚨
Former MHA Under Secretary & Padma Shri awardee R.V.S. Mani alleges Pakistani cricketers smuggled narcotics during India tours.
He further alleges narcotics were smuggled under the guise of "people-to-people contact"… https://t.co/gD9IYH23Pf pic.twitter.com/DVVYqlVAFE
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) July 15, 2026
पाकिस्तानी कोच बॉब वूल्मर की तस्करी का विरोध करने पर हत्या ! – मणि![]() मणि ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति के व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित नहीं था । अख्तर और आसिफ को १६ अक्टूबर २००६ के दिन वापस भेजा गया । उसके पश्चात महज ६ महीनों में मार्च २००७ में पाकिस्तान के इंग्लैंड के कोच बॉब वूल्मर की संदिग्ध मौत हो गई । उनकी हत्या की गई थी । उन्होंने पाकिस्तानी क्रिकेटरों की इस मादक पदार्थों की तस्करी का विरोध किया था । इन सभी घटनाओं की कडियों को जोडें, तो हमें यह हिस्सा ध्यान में आएगा । |
तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्टों की अनदेखी करते थे !![]() यह सब घटित होते समय क्या गुप्तचर एजेंसियों आदि के इनपुट (सूचनाएं) नहीं मिल रहे थे, इस प्रश्न पर मणि ने कहा कि गुप्तचर एजेंसियों से आई कई रिपोर्टें गृह मंत्रालय में वैसे ही पडी रहतीं; क्योंकि गुप्तचर विभाग का काम केवल हमें सावधान करना या जानकारी देना इतना ही होता है । उसके पश्चात संबंधित विभाग से उस मामले पर कार्रवाई करना अपेक्षित होता है । इस संदर्भ में मणि ने २-३ उदाहरण देते हुए बताया कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के कुछ लोग कुछ घंटों के लिए गायब हो जाते और फिर वापस आ जाते । ये सभी बातें थीं, लेकिन हम उस विषय में कुछ नहीं कर सकते थे; क्योंकि उस समय गुप्तचर एजेंसी की ओर से केवल संदेह व्यक्त किया जा रहा था । यदि मुझे जांच एजेंसी से उनकी पूछताछ करवानी होती, तो गृह मंत्रालय ने अथवा उस-उस समय के गृहमंत्री ने वैसी अनुमति कभी नहीं दी – फिर चाहे वे शिवराज पाटिल हों या पी. चिदंबरम हों । इसके विपरीत चिदंबरम ने पाकिस्तानी प्रतिनिधियों की सहायता करने के लिए पहल की थी । मणि ने कहा कि हम गुप्तचर एजेंसी की सहायता से अत्यंत बारीकियों के साथ रिपोर्ट (डोजियर) बनाते थे, परंतु चिदंबरम उसकी अनदेखी करते थे । वे अपनी पसंदीदा ‘सीबीआई’ से रिपोर्ट बनवा लिया करते थे । (चिदंबरम ही भगवा आतंकवाद के समर्थक थे । इस माध्यम से उन्हें हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को आतंकवादी प्रमाणित करना था । अब मणि के इन दावों से ही सही, मोदी सरकार को चिदंबरम को बंदी बनाकर उनकी कडी पूछताछ कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करनी चाहिए !- संपादक) |
पाकिस्तानी खिलाडी, कवि, लेखक भारत के दौरे पर होते समय करते थे मादक पदार्थों की तस्करी !
मणि ने कहा कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल मादक पदार्थ लाते थे और उस समय के गुप्तचर विभाग के अनुमान के अनुसार भारत में ३० प्रतिशत आतंकवादी आक्रमणों के लिए फंड मादक पदार्थों के व्यापार से ही आता था । भारत में मादक पदार्थ धकेलना या उनकी तस्करी करना, यह पाकिस्तान की आधिकारिक नीति है । इसीलिए हम कहते थे कि यदि अफगानिस्तान के जलालाबाद में अफीम की फसल (उत्पादन) अच्छी हुई, तो यहां अधिक आक्रमण होंगे । हम ऐसा अनुमान लगाते थे, ऐसा मणि ने कहा ।
मणि ने आगे कहा कि पानी के बंटवारे की बातचीत के लिए आनेवाले आधिकारिक (राजनीतिक) प्रतिनिधिमंडलों द्वारा यह तस्करी कभी नहीं होती थी । तथापि ‘लोगों का लोगों से संपर्क’ (पीपल-टू-पीपल कांटेक्ट) यह जो प्रकार होता था, यानी खिलाडी, कवि, लेखक, कलाकार आदि के माध्यम से यह तस्करी होती थी । ‘लोगों का लोगों से संपर्क’ यही सबसे बडा धोखे का प्रकार है ।


श्रीराम मंदिर को सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी की नहीं, रामभक्त की आवश्यकता !
पुणे के येरवडा पुलिस थाने के निरीक्षक अंजुम बागवान द्वारा हिन्दू-द्वेषी एवं समाज-विरोधी कृत्य ! – Milind Ekbote
Telangana AI Training : तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ८० हजार अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा डिजिटल सुरक्षा का निःशुल्क प्रशिक्षण देगी !
पूर्वजों की दिनचर्या पुरानी नहीं, अपितु आश्चर्यजनक रूप से उन्नत है !
Gujarat ATS : भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से पूर्व गुजरात में ५ आतंकवादियों को बंदी बनाया