श्रीराम मंदिर को सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी की नहीं, रामभक्त की आवश्यकता !

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान की चोरी को लेकर संतों ने की मांग

लक्ष्मणपुरी (उत्तर प्रदेश) – अयोध्या के श्रीराम मंदिर के व्यवस्थापन (प्रबंधन) के लिए किसी (सरकार द्वारा नियुक्त) मुख्य कार्यकारी अधिकारी की आवश्यकता नहीं है । मंदिर को एक ‘दास’ (सेवक/भक्त) की आवश्यकता है । उस भक्त की जीवनशैली सेवाभाव पर, अर्थात नम्र भक्ति की भावना पर आधारित होनी चाहिए, ऐसा वक्तव्य जगद्गुरु सतीश आचार्य महाराज ने यहां एक प्रसार माध्यम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में दिया । श्रीराम मंदिर में हुई दान की चोरी के प्रकरण में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था । इस कार्यक्रम में निर्वाणी अखाडे के महंत धर्मदास, हनुमानगढी के महंत राजू दास, स्वामी करपात्रीजी महाराज आदि संतों की सहभागिता थी ।

जगद्गुरु सतीश आचार्य महाराज ने आगे कहा कि, हमें ‘अखाडा’ परंपरा अथवा ‘रामानंदी’ संप्रदाय के एक ऐसे विद्वान एवं ज्ञानी साधु की आवश्यकता है, जिसे धर्म का गहन ज्ञान हो । यहां आवश्यकता है, तो धर्म की, धर्म की रक्षा करने की तथा धर्माधारित प्रशासन की !

श्रद्धा महत्वपूर्ण है, मुख्य कार्यकारी अधिकारी नहीं ! – महंत धर्मदास

इस अवसर पर महंत धर्मदास ने कहा कि श्रीराम मंदिर को मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वहां स्वयं श्रीराम वास करते हैं । श्रद्धा के बिना भक्ति एवं उपासना संभव नहीं है । श्रद्धा महत्वपूर्ण है, मुख्य कार्यकारी अधिकारी नहीं ।

यदि व्यवस्थापन का दायित्व अखाडों के पास होता, तो चोरी न होती ! – महंत राजू दास

महंत राजू दास ने कहा कि, प्रभु श्रीराम किसी विशिष्ट दल अथवा संगठन के नहीं हैं । उन पर किसी का भी ‘कॉपीराइट’ (स्वामित्व अधिकार) नहीं है । यदि श्रीराम मंदिर का व्यवस्थापन अखाडों के पास होता, तो ऐसी चोरी न होती । संत परंपरा में ईश्वर की सेवा व्यवसाय नहीं है । यहां लोग श्रद्धा भाव से सेवा करते हैं ।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कोई अन्याय नहीं होगा ! – महंत धर्मदास

महंत धर्मदास ने कहा कि, यदि योगीजी ने उत्तरदायित्व न संभाला होता, तो इतने अपराधियों को पकडा नहीं जा सकता था । वे एक उत्तम व्यक्ति हैं । योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कोई अन्याय नहीं होगा ।