व्यक्ति को छींकें आने के संदर्भ में आध्यात्मिक विश्लेषण !

छींक आने के विषय में जालस्थल पर उपलब्ध जानकारी, उक्त संदर्भ में सूक्ष्म से प्राप्त ज्ञान !

नामजप एवं आध्यात्मिक स्तर के उपाय करना तनाव दूर करने का सर्वाेत्तम उपाय !

‘एक बार मैंने एक लेख में पढा कि किसी आर्थिक अथवा शारीरिक बलवान व्यक्ति ने बलहीन व्यक्ति के साथ अन्याय किया, तो बलहीन व्यक्ति उसका विरोध नहीं कर सकता ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘नेता जनता को पैसा देकर अथवा वाहन की सुविधा देकर सभा में बुलाते हैं । इसके विपरीत, संतों के पास तथा धार्मिक उत्सव में बिना बुलाए लाखों की संख्या में भक्त आते हैं और धन अर्पण करते हैं । इससे यह ध्यान में आता है कि संतों की तुलना में नेताओं का महत्त्व शून्य है ।’

योग एवं आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर ले जानेवाले हरिद्वार (उत्तराखंड) के योगऋषि रामदेवबाबा !

भारत को एक बलशाली एवं विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हमें उसे अपनी जडों से जोडकर हमारी संस्कृति संजोनी चाहिए । हमारा भारत एक ऐसा राष्ट्र बने, जो संपूर्ण विश्व के लिए एक उदाहरण हो !

सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव : झारखंड एवं बंगाल संत एवं मान्यवर संपर्क अभियान !

सनातन संस्था की ओर से १७ से १९ मई २०२५ की अवधि में फोंडा, गोवा में संपन्न ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के उपरांत कुछ कारणों से जो संत एवं मान्यवर महोत्सव में सहभागी नहीं हो सके थे, उन्हें महोत्सव में हुए महाधन्वंतरि यज्ञ का प्रसाद, ‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का संक्षिप्त चरित्र’ ग्रंथ भेंट देने के  लिए हिन्दू जनजगृति समिति के पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत राज्य संगठक श्री. शंभू गवारे ने संपर्क कर संतों के आशीर्वचन प्राप्त किए एवं मान्यवरों से भेंट की ।

स्वदेशी उत्पादों की निर्मिति, देव-देश-धर्म को श्रेष्ठ मानकर धर्मकार्य हेतु कार्यरत ठाणे के समर्पित उद्योगपति डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई !

गोपालन, गोरक्षा, गो-उत्पादन ये सभी डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई के आत्मीय विषय हैं ।  नि:स्वार्थ सेवाभाव से गोमाताओं की सेवा एवं सुरक्षा करने हेतु रवींद्रजी कटिबद्ध हैं ।

‘यदि कृतज्ञभाव में रहें, तो निराशा नहीं आएगी और मन आनंदी होकर साधना और अच्छे से कर सकेंगे !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

‘साधक स्वभावदोषों की सूची लिखते हैं । वे स्वभावदोष दूर हों, इसलिए स्वसूचनाएं देते हैं । यदि साधकों ने केवल इतना ही किया होता, तो वह उपयुक्त होता; परंतु बहुत-से साधक उन स्वभावदोषों का पूरे दिन स्मरण करते रहते हैं और दुःखी होते हैं ।
कुछ साधक दूसरों के गुणों से या प्रगति से तुलना कर ‘हम उनके पीछे हैं’, ऐसा सोचकर दुःखी होते रहते हैं ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

विनाश की ओर बढते हिन्दू !

‘आई.एम.ए.’ की फोंडा शाखा की ओर से डॉ. पांडुरंग मराठे को किया गया सम्मानित !

‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आई.एम.ए.) फोंडा शाखा’ की ओर से ‘डॉक्टर्स डे’ के उपलक्ष्य में ३ डॉक्टरों को सम्मानित किया गया । इसमें सनातन के साधक डॉ. पांडुरंग मराठे, साथ ही डॉ. गजानन नाइक एवं सूरज काणेकर का समावेश था ।

जीवन को आनंदमय बनाने का गुरुमंत्र देनेवाली ‘सनातन संस्था’ !

ईश्वर ने परात्पर गुरुदेवजी के रूप में जन्म लिया तथा उन्होंने हमें उनके चरणों में लिया । इससे अन्य हमारा अन्य कोई सौभाग्य नहीं है; इसीलिए ‘सनातन संस्था’ का अर्थ है केवल ‘कृतज्ञता, कृतज्ञता एवं कृतज्ञता…!’ यही सत्य है !