श्री दत्तगुरु के रूप में स्थित सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी को निर्गुण की अनुभूति करानेवाली पाद्यपूजा !

नामजप के माध्यम से श्री दत्तगुरु को पुकारने के उपरांत सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी ने साधकों को श्री दत्तगुरु के रूप में दर्शन देकर कृतकृत्य किया । साधकों ने गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में प्राप्त गुरुदर्शन और उनके पाद्यपूजन को अपने मनमंदिर पर अंकित कर लिया !

रामनाथी (गोवा) के सनातन के आश्रम में चैतन्यमय वातावरण में श्रीराम शालीग्राम की प्रतिष्ठापना !

श्रीविष्णु स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के पावन निवास के कारण सनातन का रामनाथी आश्रम तो भूवैकुंठ ही बन गया है । इस आश्रम को विभिन्न देवताओं के आशीर्वाद प्राप्त हुए हैं । अब सनातन के आश्रम में श्रीराम शालीग्राम के रूप में साक्षात श्री महाविष्णु का आगमन हुआ है !

रथोत्सव पूर्ण होने के उपरांत सप्तर्षियों की प्रीतिमय वाणी से उजागर हुई परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के अवतारी कार्य की महिमा !

श्रीमन्नारायण के अवतार परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का (गुरुदेवजी का) रथ जिस क्षण आश्रम से बाहर निकला, उस क्षण पृथ्वी के सर्व जागृत मंदिर, तीर्थक्षेत्र, ५१ शक्तिपीठ एवं १२ ज्योतिर्लिंग के चैतन्य को नवजागृति मिली ।

साधकजीवों को भक्तिरस में सराबोर करनेवाले श्रीमन्नारायण स्वरूप परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का दिव्य आनंददायी ‘रथोत्सव’ !

रथोत्सव में सम्मिलित साधकों के मुख पर भाव एवं आनंद, उन्होंने धारण की हुई सात्त्विक एवं पारंपरिक वेशभूषा, हाथ में लिया भगवा ध्वज, ध्यान आकर्षित करनेवाले फलक, श्रीराम शालीग्राम की पालकी एवं सभी के मुख में श्रीमन्नारायण का जयघोष, ऐसे भक्तिमय वातावरण में इस रथोत्सव का प्रारंभ हुआ । 

शोभायात्रा में साधक ध्वज फहराते । श्रीमन्नारायण की महिमा गाते ।।

क्या वर्णन करें उन क्षणों का ! जीवन कृतार्थ होने का भान करानेवाले श्रीमन्नारायण के दर्शन के वो क्षण ! एक ओर श्रीमन्नारायण भक्तों से मिलने हेतु आतुर होकर प्रतीक्षारत थे, तो दूसरी ओर श्रीमन्नारायण से मिलने के लिए उनके भक्त हाथ जोडकर खडे थे । यह जीव और शिव की भेंट थी !

‘प्रसंग प्रत्यक्ष हो रहा है’, इसकी अनुभूति देने हेतु सजीव हुए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के रथोत्सव के चैतन्यमय छायाचित्र !

जो साक्षात ईश्वर से संबंधित होता है, वह माया से संलग्न न होकर शाश्वत होता है । वह चिरंतन टिकनेवाला और आत्मानंद देनेवाला होता है । इसलिए सात्त्विक घटकों में सजीवता दिखाई देती है ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का महर्षि के प्रति शिष्यभाव एवं महर्षि का परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के प्रति ‘श्रीमन्नारायण के अवतार’ में आदरभाव !

रथोत्सव के दिन सवेरे सप्तर्षियों का संदेश आया, ‘श्रीमन्नारायण स्वरूप गुरुदेवजी ने हम सभी की प्रार्थना सुन ली है । प्रकृति अनुकूल हो गई है । मेघ पूर्ण रूप से गए नहीं थे; गुरुदेवजी ने उन्हें साधकों की दृष्टि से दूर ले जाकर रखा था । रथोत्सव समाप्त होने पर ये मेघ पुन: बरसेंगे ।

भक्तिमय वातावरण में सपंन्न श्रीविष्णु रूप में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का चैतन्यदायी ‘रथोत्सव’ !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का जन्मोत्सव साधकों के लिए आनंद एवं भक्तिभाव का सुनहरा पर्व ही होता है ! ज्येष्ठ कृष्ण सप्तमी, अर्थात २२ मई २०२२ के मंगल दिन पर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का ८० वां जन्मोत्सव मनाया गया ।

पधारो नाथ पूजा को । हृदयमंदिर सजाया है ।।

जिन्होंने संपूर्ण विश्व की रचना की है, जिनके स्मरण मात्र से मनुष्य जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है, ऐसे भक्तवत्सल श्रीविष्णु को मैं बार-बार नमस्कार करता हूं ।

सप्तर्षियों की जीवनाडीपट्टिका में सनातन के तीन गुरुओं के विषय में गौरवोद्गार !

सनातन संस्था के तीन गुरु, अर्थात सच्चिदानंद परब्रह्म परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवले, श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी ! सनातन के साधकों को मिली ईश्वरीय संपत्ति है ।