यज्ञसंस्कृति को पुनर्जीवित करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी !

किसी भी कार्य को गति देने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है । रामराज्य की स्थापना की प्रक्रिया मुख्य रूप से आध्यात्मिक स्तर से संबंधित होने के कारण रामराज्य की स्थापना को गति देने के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा ही आवश्यक है ।

मुंबई में ‘शंखनाद महोत्सव’ करने समान ही फल श्री राजमातंगी महायज्ञ से प्राप्त हुआ है !

देश की सुरक्षा के लिए किया गया यह यज्ञ, एक प्रकार से महामृत्युंजय यज्ञ ही था; क्योंकि इस यज्ञ के माध्यम से गुरुदेवजी ने आनेवाले युद्धकाल के लिए साधकों को आवश्यक मृत्युंजय कवच प्रदान किया और राष्ट्र को भी कवच प्रदान किया । मुंबई में ‘शंखनाद महोत्सव’ करने समान ही फल इस यज्ञ से प्राप्त हुआ है ।

१२ ज्योतिर्लिंगों में प्रथम मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंश सनातन संस्था को अर्पित !

श्रीचित्शक्ति श्रीमती अंजली मुकुल गाडगीळजी द्वारा लाए गए ४ शिवलिंगों का साधकों ने भोलेनाथ के जयघोष एवं वेदमंत्रोच्चार के साथ भावपूर्ण स्वागत किया । इस समय श्रीसत्शक्ति श्रीमती बिंदा सिंगबाळजी ने शिवलिंगों का पूजन एवं औक्षण किया ।

ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी

गुरु का वास्तविक स्वरूप केवल उनके मानवी अथवा सगुण देह तक सीमित नहीं होता । गुरु मूलतः एक ‘निर्गुण’ तत्त्व हैं । निर्गुण रूप में गुरु आकाश के समान अथाह, अनंत एवं सर्वव्यापी होते हैं । उन्हें स्थल, काल अथवा समय की कोई मर्यादा नहीं होती ।

सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !

जिस-जिस समय साधक संकट में होता है, उस समय उसे संभालनेवाले हाथ गुरु के ही होते हैं और जब साधक आनंदी होता है, तब उस आनंद का मूल भी गुरु ही होते हैं । इस प्रकार सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी साधकों को दिए गए अपने आशीर्वचन का क्षण-क्षण पालन कर रहे हैं ।

‘श्री गुरु पर श्रद्धा’, यही भवसागर से पार होने की एकमात्र गुरुकुंजी !

ऐसे महान अवतारी गुरु के श्री चरणों में साधकों की श्रद्धा कैसी होनी चाहिए ? गुरु के अस्तित्व अथवा उनके कार्य पर तनिक भी संदेह न करते हुए, ‘मेरे गुरु जो कर रहे हैं, वह मेरे कल्याण के लिए ही है’, ऐसा दृढ भाव मन में रखना ही श्रद्धा है ।

श्री राजमातंगी महायज्ञ के निर्विघ्न संपन्न होने हेतु श्री सिद्धिविनायक के चरणों में सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरुओं तथा संतों द्वारा प्रार्थना !

‘वर्तमान युद्धकाल में तपोभूमि भारत को संरक्षण कवच प्राप्त हो तथा भारत की सर्वांगीण उन्नति हो’, इस हेतु सनातन संस्था की ओर से १७ मई को मुंबई के प्रभादेवी स्थित नर्दुल्ला टैंक मैदान में ‘श्री राजमातंगी महायज्ञ’ का भव्य आयोजन किया गया ।

श्री राजमातंगी महायज्ञ के निर्विघ्न संपन्न होने हेतु श्री सिद्धिविनायक के चरणों में सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरुओं तथा संतों द्वारा प्रार्थना !

‘वर्तमान युद्धकाल में तपोभूमि भारत को संरक्षण कवच प्राप्त हो तथा भारत की सर्वांगीण उन्नति हो’, इस हेतु सनातन संस्था की ओर से १७ मई को मुंबई के प्रभादेवी स्थित नर्दुल्ला टैंक मैदान में ‘श्री राजमातंगी महायज्ञ’ का भव्य आयोजन किया गया ।

Raja Matangi Yadnya : राष्ट्ररक्षार्थ मुंबई में हुआ ‘श्री राजमातंगी महायज्ञ’ !

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी ने जिस नगरी से धर्मकार्य का श्रीगणेश किया था, वह मुंबापुरी (मुंबई) अधिक ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा को वेदमंत्रों के घोष से गूंज उठी !

Shri Rajamatangi Mahayagya : राष्ट्र की अभिवृद्धि के लिए १७ मई को मुंबई में होगा श्री राजमातंगी महायज्ञ !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी तथा श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी की दिव्य उपस्थिति में होनेवाले इस महायज्ञ का लाभ सहस्रों देवीभक्त प्राप्त करेंगे ।