सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी का ८४वां जन्मोत्सव विशेषांक
हे करुणानिधान, ईश्वर । दें कृपा का दान हमें ।।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के विविध रूप साधकों के हृदय-मंदिर में बसे हैं । गत वर्ष सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के ८३वें जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में अनेक जिज्ञासुओं, साधकों एवं हितचिंतकों को गुरुदेवजी के दर्शन प्राप्त हुए । गुरुदेवजी को देखकर सभी भावविभोर हो गए । उसी प्रकार, सभी को सामने देखकर गुरुदेवजी के मुखमंडल पर भी आनंद एवं कृतज्ञभाव दिखाई दे रहा था । महोत्सव अंतर्गत गुरुदेवजी की यह अत्यंत मनमोहक भावमुद्रा है ! सिर पर फेटा बांधे उनका स्वरूप राजसी दिखाई दे रहा है; तथापि सामने साधकों के माध्यम से अपने गुरु प.पू. भक्तराज महाराजजी के समष्टि रूप को देखकर उन्होंने जो नमस्कार की मुद्रा की है तथा उनकी दृष्टि में जो भाव है, उससे उनका भाव प्रकट हो रहा है ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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