प्रधानमंत्री बालेंन शाह के त्यागपत्र की मांग

काठमांडू (नेपाल) – देश के युवाओं ने पुन: सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन प्रारंभ कर दिए हैं। गत ३ दिनों में तीन युवकों ने स्वयं पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। इनमें से दो युवकों की उपचार के समय मृत्यु हो गयी, जबकि एक युवक की गंभीर रूप से जले होने के कारण चिकित्सालय में भर्ती किया गया है। व्यवसायहीनता की समस्या का समाधान न कर पाने के कारण प्रधानमंत्री बालेन शाह के त्यागपत्र की मांग तीव्र हो गयी है। इसी पृष्ठभूमि में नेपाल कांग्रेस, जो मुख्य विपक्षी दल है, ने सरकार पर युवा वर्ग में आशा एवं विश्वास निर्माण करने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
१. प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री बालेंन शाह पर जनविरोधी एवं निरंकुश पद्धति से शासन चलाने का आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि अर्थव्यवस्था एवं नीतियों के अंतर्गत युवाओं के रोजगार एवं आय बढाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
२. नेपाल में निरंतर हो रही इन घटनाओं ने युवाओं की मानसिक स्थिति, व्यवसाय हीनता एवं सरकारी नीतियों को लेकर गंभीर प्रश्न खडे कर दिए हैं। राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि सरकार शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाती है तो विरोध अत्यंत गंभीर हो सकता है।
वर्ष २०२५ के आंदोलन की स्मृति
देश के युवाओं के पुन: सडकों पर उतरने से सितंबर २०२५ में युवाओं द्वारा किए गए सरकार-विरोधी आंदोलन की स्मृति जागृत हो गयी है। ९ सितंबर २०२५ को युवाओं ने संसद भवन के परिसर में घुसकर वहां भीषण उपद्रव किया था । उन्होंने सुरक्षा कर्मियों के शस्त्र भी छीन लिए थे । उस आंदोलन के परिणामस्वरूप तत्कालीन सरकार गिर गयी थी एवं उसके उपरांत की गई चुनाव प्रक्रिया में बालेंन शाह चुने गए थे।
बालेंन शाह का पूर्व वक्तव्य चर्चा में
वर्ष २०२३ में तत्कालीन सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए प्रेम आचार्य नाम के एक युवा ने आत्मदाह किया था। उस समय शाह काठमांडू नगर के नगराध्यक्ष थे। उस आत्मदाह पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा था कि ‘युवक का आत्मदाह करना सरकार की विफलता है’। अब प्रधानमंत्री बन चुके शाह इस बार युवाओं के आत्मदाह पर मौन बने हुए हैं। इसलिए प्रदर्शनकारियों ने उनकी आलोचना की है।
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