अध्यात्म और जलवायु परिवर्तन : क्या इनमें कोई संबंध है ?
MAV के शोध से सिद्ध हुआ है कि नामजप, यज्ञ और सात्विक जीवन शैली जैसी साधनाएं न केवल मनुष्य के सप्तचक्रों और ऊर्जा-क्षेत्र को शुद्ध करती है, बल्कि उसके आसपास के वातावरण में भी सकारात्मक स्पंदन बढ़ाती हैं। वर्तमान समय में संतों ने विशेष रूप से “श्री राम जय राम जय जय राम” के जाप का मार्गदर्शन दिया है।