परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘ईश्वर पर तथा साधना पर विश्वास न हो, तब भी चिरंतन आनंद की आवश्यकता प्रत्येक व्यक्ति को होती है । वह केवल साधना से ही प्राप्त होता है । एक बार यह ध्यान में आ जाए, तो साधना का कोई पर्याय न होने के कारण, मानव साधना की ओर प्रवृत्त होता है ।’

१२ से १८ जून की अवधि में गोवा में होनेवाले दशम ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ के उपलक्ष्य में …

इस्लामी अथवा ईसाई देशों की भांति हिन्दू राष्ट्र कोई संकीर्ण अवधारणा (संकल्पना) नहीं है, अपितु वह विश्वकल्याण का विचार करनेवाली, प्रत्येक नागरिक की लौकिक एवं पारलौकिक उन्नति का विचार करनेवाली एक सत्त्वप्रधान व्यवस्था है ।

सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ आठवलेजी के ८० वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में संतों से मिली शुभकामनाएं !

महर्षि अध्यात्म विश्विद्यालय की स्थापना कर उन्होंने (परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने) हिन्दू राष्ट्र की बात को केवल राजकीय रूप न देते हुए हमारी अध्यात्म विद्या को पुनः उजागर करने का और उसके भीतर अनेक प्रयोग कर, अनेक साधकों को तैयार करने का एक महनीय कार्य किया है ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का महर्षि के प्रति शिष्यभाव एवं महर्षि का परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के प्रति ‘श्रीमन्नारायण के अवतार’ में आदरभाव !

रथोत्सव के दिन सवेरे सप्तर्षियों का संदेश आया, ‘श्रीमन्नारायण स्वरूप गुरुदेवजी ने हम सभी की प्रार्थना सुन ली है । प्रकृति अनुकूल हो गई है । मेघ पूर्ण रूप से गए नहीं थे; गुरुदेवजी ने उन्हें साधकों की दृष्टि से दूर ले जाकर रखा था । रथोत्सव समाप्त होने पर ये मेघ पुन: बरसेंगे ।

मध्य प्रदेश में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों के लिए सनातन संस्था द्वारा प्रवचन

प्रवचन के समापन में कमांडेंट महोदय श्री. सूरजपाल वर्मा ने जवानों को बताए अनुसार करने के लिए प्रोत्साहित किया । १०० से अधिक जवानों ने इसका लाभ लिया और उन्हें अध्यात्मशास्त्र की जानकारी बहुत अच्छी लगी ।

सनातनकी ग्रंथमाला : परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीद्वारा आयोजित अभ्यासवर्ग

सनातनके साधक श्री. विवेक पेंडसेने परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीद्वारा वर्ष १९९२ और वर्ष १९९३ में लिए अभ्यासवर्गोंके सूत्र लिख लिए थे । इस ग्रन्थमें परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीद्वारा लिए गए अभ्यासवर्गोंमें जिज्ञासुओंद्वारा पूछे गए प्रश्न और परात्पर गुरु डॉक्टरजीद्वारा दिए उत्तर अन्तर्भूत हैं ।

सूक्ष्म से मिलनेवाले ज्ञान में अथवा नाडीपट्टिका में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का उल्लेख ‘संत’ न करते हुए ‘विष्णु का अंशावतार’ होने के विविध कारण !

अन्य संप्रदायों में उनके द्वारा बताई साधना करते समय उस साधक को कुछ न कुछ बंधन पालने पडते हैं; परंतु सनातन में साधना करते समय साधना के अतिरिक्त अन्य कोई भी बंधन नहीं बताए जाते ।

ग्रंथलेखन का अद्वितीय कार्य करनेवाले एकमात्र परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी !

हिन्दू राष्ट्र-स्थापना हेतु प्रयास करना कालानुसार आवश्यक समष्टि साधना ही है । इसके संदर्भ में समाज का मार्गदर्शन होने हेतु परात्पर गुरु डॉक्टरजी ने ‘ईश्वरीय राज्य की स्थापना’, ‘हिन्दू राष्ट्र क्यों आवश्यक ?’, ‘हिन्दू राष्ट्र : आक्षेप एवं खण्डन’ जैसे समष्टि साधना सिखानेवाले ग्रंथों की रचना की ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

सच्चिदानंद ईश्वर की प्राप्ति कैसे करें, यह अध्यात्मशास्त्र बताता है । इसके विपरीत ‘ईश्वर हैं ही नहीं’, ऐसा कुछ विज्ञानवादी अर्थात बुद्धिप्रमाणवादी चीख-चीखकर कहते हैं !

हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने आगरा (उत्तर प्रदेश) के हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार गुप्ता से की भेंट !

हिन्दू जनजागृति समिति का कार्य बहुत अच्छा एवं व्यापक है । अब समाज को जागृत कर एकसंघ करने का उचित समय आ गया है । सर्व आधुनिक चिकित्सकों का एक व्यासपीठ बनाकर यह विचार वहां प्रस्तुत करने के साथ ही क्रियाशील योजना का आयोजन करना चाहिए ।