छत्तीसगढ उच्च न्यायालय का निर्णय ।

रायपुर (छत्तीसगढ़) – छत्तीसगढ उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक स्थान पर ‘हिन्दू एक गाली है तथा इसका अर्थ चोर, डाकू, लुटेरा तथा गुलाम होता है’ ऐसा वक्तव्य देने वाले ईसाई संगठन से जुडे ११ कार्यकर्ताओं के विरुद्ध प्रविष्ट अपराध को निरस्त करने से मना कर दिया है ।
न्यायालय ने कहा कि इस प्रकरण में ऐसे प्रश्न सम्मिलित हैं, जिनका निर्णय केवल संपूर्ण मुकदमे के समय साक्ष्यों की जांच के पश्चात ही किया जा सकता है । प्रारंभिक स्तर पर यह निर्धारित नहीं किया जा सकता । इसलिए अपराध निरस्त नहीं किया जा सकता ।
The Chhattisgarh High Court refused to quash criminal proceedings against social activists accused of calling the word "Hindu" an abuse meaning "thieves" and "dacoits" at a 2024 public gathering.
The Court held that issues of free speech, intent, and legality must be decided… pic.twitter.com/Bqdc4FkMYy
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) July 12, 2026
यह प्रकरण फरवरी २०२४ का है । उस समय छत्तीसगढ के जशपुर में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में हिन्दू धर्म के विरुद्ध विवादास्पद तथा आपत्तिजनक वक्तव्य दिए गए थे । इसका आयोजन ‘भारत मुक्ति मोर्चा’ तथा ‘राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा’ इन संगठनों द्वारा किया गया था ।
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