पुणे के भ्रष्ट उपजिलाधिकारी तथा तहसीलदार सहित १५ अधिकारी निलंबित l

  • राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे की घोषणा

  • आपराधिक प्रकरण प्रविष्ट कर सेवामुक्त भी करेंगे

मुंबई, ११ जुलाई (वार्ता) – भूमि के अधिकारों में अनधिकृत रूप से परिवर्तन करने वाले तथा करोड़ों रुपयों के घोटाले करने वाले राजस्व विभाग के उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार सहित १५ भ्रष्ट अधिकारियों को निलंबित करने की घोषणा राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने १० जुलाई को विधान परिषद में की । दोषियों के विरुद्ध आपराधिक अपराध प्रविष्ट कर कुछ लोगों को शासकीय सेवा से निष्कासित किया जाएगा, ऐसा कहते हुए सरकार ने आगामी ३ महीनों में ‘धारा १५५’ के अंतर्गत हुए सभी आदेशों का गहन सत्यापन करने के निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिए । ठाकरे दल के विधायक अनिल परब ने पिछले सत्र में इस गंभीर घोटाले की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया था । इसके पश्चात पुणे विभाग की जांच समिति के प्रतिवेदन (रिपोर्ट) में उजागर हुए कुल ४२४ संदिग्ध मामलों में से १३ मामलों में इन १५ व्यक्तियों की प्रत्यक्ष संलिप्तता पाई गई ।

क्या है प्रकरण ?

राजस्व अधिनियम की ‘धारा १५५’ का उपयोग केवल शासकीय प्रलेखों (दस्तावेजों) में वर्तनी की अथवा लिपिकीय त्रुटियों को सुधारने के लिए करना अपेक्षित होता है ; किंतु भ्रष्ट अधिकारियों ने इसका दुरुपयोग करके मूल स्वामियों की करोडों रुपयों की संपत्ति दूसरों के नाम कर दी । इसके साथ ही साक्ष्य नष्ट करने के लिए शासकीय संचिकाएं (फाइलें) भी लुप्त कर दीं ।

श्री क्षेत्र तुलजापुर की भूमि हडपने वालों पर भी होगी कार्रवाई !

श्री क्षेत्र तुलजापुर में देवी की भूमि तथा अन्य भूमि को हथियाने सहित वहां के अनधिकृत अतिक्रमणों की शिकायतों को सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लिया है । पुणे विभागीय आयुक्त के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है । अनधिकृत अतिक्रमणों को ध्वस्त किया जाएगा तथा भूमि हथियाने वाले संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध मामले दर्ज किए जाएंगे, ऐसा आश्वासन लोक निर्माण मंत्री की ओर से सदन में दिया गया ।

संपादकीय भूमिका

सरकार को ऐसे व्यक्तियों को केवल निलंबित करके नहीं रुकना चाहिए, अपितु भ्रष्टाचार के कारण हुई क्षति भी उनसे वसूल कर उन्हें कारागार भेजना चाहिए, तभी शासकीय अधिकारी भ्रष्टाचार करने का दुस्साहस नहीं करेंगे !