भारत पहले से ही जिस जीवन-पद्धति का पालन करता आया है, वही अब पाश्चात्य देश खोजकर अपना रहे हैं !

यह स्वास्थ्यविज्ञान मेरे लिए प्रयोगशाला में आरंभ नहीं हुआ था । इसका आरंभ मेरी अपनी दादी की शांत अनुशासित दिनचर्या से हुई थी । प्रतिदिन वे प्रातः ४ बजे से पहले उठ जाती थीं ।

हिन्दू धर्मप्रेमी युवक-युवतियों, ऋषि-मुनियों तथा देवताओं द्वारा की जानेवाली स्थूल कृतियों के पीछेका सूक्ष्म धर्मशास्त्र समझे बिना उनका अनुकरण न करें ! – श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळ

समाज की युवतियों द्वारा ‘दुर्गादेवी ने केश खुले छोडे हैं’, ऐसा कहकर स्वयं के केश भी खुले छोडना

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा साधकों के लिए व्यष्टितथा समष्टि स्तर पर किए आध्यात्मिक उपचारों का अध्यात्मशास्त्र

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा व्यष्टि स्तर पर साधकों के लिए किए गए उपचारों का अध्यात्मशास्त्रीय आधार

‘श्रीसत्‌शक्ति, श्रीचित्‌शक्ति और सच्चिदानंद’ अध्यात्म के शब्दब्रह्म हैं तथा उनमें अत्यधिक शक्ति विद्यमान होती है और उन शब्दों का उच्चारण करने पर उनसे शक्ति, चैतन्य एवं तत्त्व प्राप्त होता है ! – श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी

कोई भी शब्द उच्चारित किया जाए, तो उसके साथ उसकी शक्ति भी आती है । अर्थात प्रकृति के नियमानुसार ‘शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध और शक्ति’ इनका सहअस्तित्व होता है । ‘श्रीसत्शक्ति’ कहने पर उन शब्दों में स्थित चैतन्य तत्काल हमारे शरीर में प्रवेश करता है ।

योग शरीर को ४० वर्ष की आयु में २० वर्ष की आयु से भी अधिक लचीला बनाने में सहायक है ! – PM Narendra Modi

योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है तथा किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं है । यह मानव आत्मा की अभिव्यक्ति है । योग हमें संतुलित जीवन जीना सिखाता है तथा क्या करना चाहिए तथा क्या नहीं करना चाहिए, इसका भी बोध कराता है । यह मार्गदर्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां दिया ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी पर जिनकी श्रद्धा है, वे उन्हें ‘अवतारी पुरुष’ मानते हैं । सनातन के साधक उन्हें गुरुस्थान पर मानते हैं तथा ‘उनके समान गुरु कहीं नहीं देखे’, ऐसा उनका भाव है ।

‘जहां जाऊं मैं, वहां गुरुदेवजी आप ही हैं !’

इस लेखमाला में ‘ईश्वर साधकों का कैसे ध्यान रखते हैं ?’, इससे संबंधित प्रसंग दे रहे हैं । इससे ‘जहां जाऊं, वहां आप मेरे सहयात्री !’, यह संतवचन कितना सार्थ है, यह ध्यान में आएगा ।

‘पितांबरी’ उद्योगसमूह के प्रबंध निदेशक डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई की कृषि विषयक पुस्तकों का राज्यपाल के हाथों विमोचन ।

प्रगतिशील खेती के नए-नए प्रयोगों को समाहित करनेवाली ये पुस्तकें आधुनिक खेती के लिए युवाओं को प्रेरित करनेवाली हैं ।

‘आत्मा एक ही है, केवल उसके रूप भिन्न हैं’, यह ज्ञात होने पर द्वैत समाप्त होकर ‘एकत्व साधना’ संभव हो पाता है !

‘देह भले ही भिन्न हो, तब भी सभी में विद्यमान ‘ब्रह्म’ एक ही है’, यह कहकर भैंसे के मुख से भी वेद बुलवानेवाले संत ज्ञानेश्वरजी कहते हैं, ‘‘आत्मा एक ही है । हमारी भिन्न-भिन्न देह के रूप भले ही उसमें समाहित हों, तब भी हममें विद्यमान ईश्वर का आत्मरूप एक ही है ।’’

धर्म की रक्षा करने हेतु घर-घर में छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्म लेने की आवश्यकता ! – श्रीमंत मुधोजीराजे भोसले

दुर्ग (छत्तीसगढ) में २ दिवसीय अनिवासी ‘शौर्य जागृति प्रशिक्षण शिविर’ का समापन l
१ सहस्र से अधिक युवकों ने स्वरक्षा के साथ राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा का लिया संकल्प !