France 24 Media : (और इनकी सुनिए…) ‘छत्रपती शिवाजी महाराज की प्रतिमाएं स्थापित कर मुसलमानों को लक्षित किया जा रहा है !’
फ्रांस की ‘फ्रांस २४’ नामक समाचार वेबसाइट के संपादकीय में छत्रपती शिवाजी महाराज के माध्यम से हिन्दुत्वनिष्ठों पर की गई आलोचना ।
फ्रांस की ‘फ्रांस २४’ नामक समाचार वेबसाइट के संपादकीय में छत्रपती शिवाजी महाराज के माध्यम से हिन्दुत्वनिष्ठों पर की गई आलोचना ।
यह घटना नई नहीं है । जनवरी २०२६ में भी नेरेडमेट के विनायक नगर क्षेत्र में बिना अनुमति स्थापित की गई छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को लेकर पुलिस द्वारा कार्यवाही किए जाने से विवाद उत्पन्न हुआ था।
आज से ३५० वर्ष पूर्व, अर्थात १९ जून १६७६ के दिन छत्रपति शिवाजी महाराज ने पराक्रमी सेनापति नेताजी पालकर का ‘शुद्धीकरण’ कर उन्हें पुनः हिन्दू धर्म में सम्मानपूर्वक प्रवेश दिलाया था ।
छत्रपती शिवराय का इतिहास डेढ पृष्ठ से २० पृष्ठों का करने का शासन का सराहनीय प्रयास ! शिवराय सहित अन्य राष्ट्रपुरुषों अथवा क्रांतिकारकों का इतिहास भी विद्यार्थियों तक पहुंचाने का प्रयास भविष्य में किया जाना चाहिए !
मुंबई में इजराइल के महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भेंट की । इस भेंट में प्रतिमा स्थापना के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की गई । मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस उपक्रम का स्वागत करते हुए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक सभी सहयोग देने का आश्वासन दिया ।
औरंगजेब की कब्र की देखभाल के लिए प्रति वर्ष २,५५,१६० रुपये (वर्ष २०२२-२३ ) दिए जा रहे हैं, इसके विरुद्ध छत्रपती शिवाजी महाराज के ‘श्री शिवराजेश्वर मंदिर’ के लिए मात्र १ लाख रुपये दिए जा रहे हैं ।
छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित ‘राजा शिवाजी’, इस चलचित्र के शीर्षक से छत्रपति शिवाजी महाराज का किसी प्रकारसे अनादर नहीं होता अथवा यह शीर्षक उनका अनादर करनेवाला नहीं है, ऐसा निरीक्षण मुंबई उच्च न्यायालय ने प्रविष्ट किया ।
‘स्वबोध, मित्रबोध एवं शत्रुबोध’, यह त्रिसूत्री मुख्यतः राष्ट्रवाद, संस्कृति एवं भूराजनीतिक संदर्भ में उपयोग की जाती है । किसी भी जीवंत समाज अथवा राष्ट्र को यदि प्रगति करनी हो और अपना अस्तित्व बनाए रखना हो, तो उसे इन ३ बातों का सटीक ज्ञान होना अनिवार्य है ।
पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री लगातार हिन्दू राष्ट्र तथा सनातन धर्म का समर्थन कर रहे हैं । ऐसे समय में उनके किसी वक्तव्य का आधार लेकर हिन्दू समाज में फूट डालने का कार्य धर्मविरोधी तत्वों द्वारा रचा जा सकता है, इसे नकारा नहीं जा सकता ।
छत्रपती शिवाजी महाराज का अनादर पूर्वक उल्लेख न हटाने वाले प्रकाशकों तथा संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध आपराधिक अभियोग पंजीकृत करें !