सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !

जिस-जिस समय साधक संकट में होता है, उस समय उसे संभालनेवाले हाथ गुरु के ही होते हैं और जब साधक आनंदी होता है, तब उस आनंद का मूल भी गुरु ही होते हैं । इस प्रकार सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी साधकों को दिए गए अपने आशीर्वचन का क्षण-क्षण पालन कर रहे हैं ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी पर जिनकी श्रद्धा है, वे उन्हें ‘अवतारी पुरुष’ मानते हैं । सनातन के साधक उन्हें गुरुस्थान पर मानते हैं तथा ‘उनके समान गुरु कहीं नहीं देखे’, ऐसा उनका भाव है ।

साधकों को स्वभावदोष एवं अहं के निर्मूलन की प्रक्रिया सिखाकर स्वसूचनाओं के द्वारा स्वभावदोषों पर विजय प्राप्त करने का मार्गदर्शन करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी !

मेरे मन पर बचपन में घटित कुछ प्रसंगों का परिणाम हुआ था, इसलिए मेरे मन में असुरक्षा की सुप्त भावना थी । सनातन संस्था के मार्गदर्शन में साधना आरंभ करने पर प्रत्येक प्रसंग में प.पू. डॉक्टरजी ने (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी ने) मुझे सदैव आधार देकर उन प्रसंगों से मुझे संवारा ।

Raja Matangi Yadnya : राष्ट्ररक्षार्थ मुंबई में हुआ ‘श्री राजमातंगी महायज्ञ’ !

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी ने जिस नगरी से धर्मकार्य का श्रीगणेश किया था, वह मुंबापुरी (मुंबई) अधिक ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा को वेदमंत्रों के घोष से गूंज उठी !

शास्त्र धर्म प्रचार सभा द्वारा प्रकाशित ‘ट्रुथ’ एवं ‘भारताजीर’ के 94वें वर्षगांठ के अवसर हिन्दू जनजागृति समिति का सहभाग !

यहां पर स्थित शास्त्र धर्म प्रचार सभा के मुख्यालय में 19 अप्रैल को ‘ट्रुथ’ अंग्रेजी भाषा के एवं ‘भारताजीर’, बांग्ला भाषा के सपताहिक की 94वीं वर्षगांठ मनाई गई । इस अवसर पर हुगली, बंगाल से गौर महाराजजी ने मुख्य अतिथि के रूप में मार्गदर्शन किया ।