देश के मंदिरों के लिए एक स्वतंत्र ‘सनातन संरक्षण मंडल’ या समिति का गठन किया जाना चाहिए ! – Shankaracharya Sadanand Saraswati

श्रीराम मंदिर में दान की चोरी के संबंध में शंकराचार्य सदानंद सरस्वती की मांग

साधकों को स्वभावदोष एवं अहं के निर्मूलन की प्रक्रिया सिखाकर स्वसूचनाओं के द्वारा स्वभावदोषों पर विजय प्राप्त करने का मार्गदर्शन करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी !

मेरे मन पर बचपन में घटित कुछ प्रसंगों का परिणाम हुआ था, इसलिए मेरे मन में असुरक्षा की सुप्त भावना थी । सनातन संस्था के मार्गदर्शन में साधना आरंभ करने पर प्रत्येक प्रसंग में प.पू. डॉक्टरजी ने (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी ने) मुझे सदैव आधार देकर उन प्रसंगों से मुझे संवारा ।

‘जहां जाऊं मैं, वहां गुरुदेवजी आप ही हैं !’

इस लेखमाला में ‘ईश्वर साधकों का कैसे ध्यान रखते हैं ?’, इससे संबंधित प्रसंग दे रहे हैं । इससे ‘जहां जाऊं, वहां आप मेरे सहयात्री !’, यह संतवचन कितना सार्थ है, यह ध्यान में आएगा ।

मंदिरों के प्रतिनिधियों एवं हिन्दुओं का संगठन आवश्यक ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति

अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के पश्चात अब तक २३ करोड ८२ लाख भक्तों ने श्रीराम के दर्शन किए हैं । इससे मंदिर को १२ सहस्र करोड रुपये की आय प्राप्त हुई है । इससे मंदिर की क्षमता को सभी को ध्यान में रखना चाहिए ।

Maharashtra Mandir Nyas Parishad : गढ-किलों पर किए गए अतिक्रमर बुलडोजर लगाकर ध्वस्त करेंगे ! – रोजगार आश्वस्तता एवं फलोत्पादन मंत्री भरतशेठ गोगावले

छत्रपति शिवाजी महाराज ने जिस भूमि में अफजलखान की आंतरियां बाहर निकाली, उसी पावन सातारा में आयोजित इस परिषद में १ सहस्र १०० से अधिक मंदिरों के प्रतिनिधि एकत्रित हुए हैं ।

घर-घर में रामराज्य आने पर देश में रामराज्य की स्थापना होगी ! – श्रीमद् विद्याधीश तीर्थ श्रीपाद वडेर स्वामीजी

श्री संस्थान गोकर्ण पुर्तगाली जीवोत्तम मठ के २४ वें पू. पीठाधिपति तथा श्रीराम के नि:स्सीम भक्त श्रीमद् विद्याधीश तीर्थ श्रीपाद वडेर स्वामीजी का सनातन आश्रम को मंगलमय चरणस्पर्श हुआ ।

विश्व में केवल आध्यात्मिक मार्ग से ही शांति स्थापित होना संभव है ! – श्री शिवरात्रि देशीकेंद्र महास्वामीजी, सुत्तुरू मठ, कर्नाटक

वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व युद्ध की छाया में जी रहा है । ईरान, इजरायल एवं अमेरिका के मध्य का संघर्ष चरम पर पहुंच गया है । इस पृष्ठभूमि पर सुत्तुरू मठ के श्री शिवरात्रि देशीकेंद्र महास्वामीजी ने विश्वशांति के लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण संदेश दिया है ।

मन को स्वस्थ, प्रसन्न एवं समर्थ बनाने हेतु मन के व्यायाम करना अर्थात साधना करना आवश्यक !

‘व्यायाम का अर्थ शारीरिक व्यायाम करना’, ऐसा हम मानते हैं । इसके प्रति अधिकांश लोग जागरूक भी होते हैं । शरीर सुदृढ एवं स्वस्थ रहे, इस हेतु हम शारीरिक व्यायाम करते हैं । व्यायाम नियमित तथा विशिष्ट समय पर ही करना पडता है ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा सत्संग में साधकों को नामजप के संदर्भ में किया गया अनमोल मार्गदर्शन !

काल की महिमा के कारण मन में आनेवाले माया के विचारों से बाहर निकलने के लिए नामजप बढाएं !

‘अपने मन के प्रति अपना दृष्टिकोण कैसा हो ?’, इस विषय पर ज्ञानयोगी पू. अनंत आठवलेजी द्वारा किया अनमोल मार्गदर्शन !

सनातन की साधिका डॉ. (श्रीमती) मधुवंती पिंगळे ने सनातन के १०१वें संत ज्ञानयोगी पू. अनंत आठवलेजी को जिज्ञासावश एक प्रश्न पूछा । वह प्रश्न और उस पर पू. अनंत आठवलेजी का उत्तर आगे दिया है ।