
मुंबई – ‘पितांबरी’ उद्योगसमूह के प्रबंध निदेशक डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई द्वारा लिखित ‘आधुनिक शेतीचे मॉडेल’ तथा ‘आपलं कोकण-अणुस्कुरा ते साखळोली स्वप्नपूर्तीचा अद्भुत प्रवास’ इन पुस्तकों का विमोचन महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा के हाथों किया गया । २० मई को राजभवन में यह विमोचन समारोह संपन्न हुआ । प्रगतिशील खेती के नए-नए प्रयोगों को समाहित करनेवाली ये पुस्तकें आधुनिक खेती के लिए युवाओं को प्रेरित करनेवाली हैं ।
इस समारोह में श्री. मधुकर पुजारी, सौ. प्रिया प्रभुदेसाई, शैलेजा शेट्टी तत्स प्रियांका पावसकर ये ‘पितांबरी’ उद्योगसमूह के पदाधिकारी, साथ ही पद्मश्री सम्मानित रमेश पतंगे, ‘विवेक प्रकाशन’ के आदिनाथ पाटिल आदि मान्यवर उपस्थित थे ।

खेती में किए गए नवीन प्रयोगों के अपने अनुभवों को डॉ. प्रभुदेसाई ने इन पुस्तकों में शब्दबद्ध किया है । बांस, कनकचंपा, आयुर्वेदिक वनस्पतियां, विभिन्न फलदार वृक्ष, सब्जियां तथा गन्ने की खेती में किए गए प्रयोगों का इन पुस्तकों में समावेश है । विशेष बात यह है कि खेती में नए प्रयोग करते समय जिनमें असफलता मिली, उन प्रयोगों का भी उन्होंने इन पुस्तकों में उल्लेख किया है । इसलिए “खेती करते समय किन बातों से बचना चाहिए”, यह भी इन पुस्तकों से समझा जा सकेगा । डॉ. प्रभुदेसाई ने अपने स्वयं के अनुभव लिखे हैं, इसलिए पुस्तक की जानकारी अधिक वस्तुनिष्ठ है ।
नई पीढी के लिए मार्गदर्शक पुस्तकें – राज्यपाल
नई पीढी के आधुनिक किसानों तथा कृषि क्षेत्र में आने के इच्छुक युवाओं के लिए डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई द्वारा लिखित दोनों पुस्तकें अत्यंत प्रेरणादायी एवं मार्गदर्शक सिद्ध होंगी ।
ये पुस्तकें किसानों को प्रेरणा देंगी – डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई
राज्यपाल के हाथों मेरी पुस्तकों का लोकार्पण होना, मेरे लिए अत्यंत सम्मान का क्षण था । कोकण के कृषि विकास तथा आधुनिक खेती पद्धतियों के विषय में अनेक वर्षों के समर्पित कार्य, अनुभव तथा दूरदृष्टि का परिणाम इन पुस्तकों में समाहित है । पुस्तकों के माध्यम से किसानों को प्रेरणा देनेवाले तथा उन्हें सक्षम बनानेवाले व्यावहारिक अनुभव तथा प्रगतिशील खेती के मॉडल प्रस्तुत करने का मैंने प्रयास किया है ।
भारत पहले से ही जिस जीवन-पद्धति का पालन करता आया है, वही अब पाश्चात्य देश खोजकर अपना रहे हैं !
हिन्दू धर्मप्रेमी युवक-युवतियों, ऋषि-मुनियों तथा देवताओं द्वारा की जानेवाली स्थूल कृतियों के पीछेका सूक्ष्म धर्मशास्त्र समझे बिना उनका अनुकरण न करें ! – श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळ
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा साधकों के लिए व्यष्टितथा समष्टि स्तर पर किए आध्यात्मिक उपचारों का अध्यात्मशास्त्र
‘श्रीसत्शक्ति, श्रीचित्शक्ति और सच्चिदानंद’ अध्यात्म के शब्दब्रह्म हैं तथा उनमें अत्यधिक शक्ति विद्यमान होती है और उन शब्दों का उच्चारण करने पर उनसे शक्ति, चैतन्य एवं तत्त्व प्राप्त होता है ! – श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी
NCERT : पुस्तक में वैदिक काल में महिलाओं को सम्मान प्राप्त होने वाले मनु-स्मृति के एक श्लोक का उल्लेख किया गया है ।
योग शरीर को ४० वर्ष की आयु में २० वर्ष की आयु से भी अधिक लचीला बनाने में सहायक है ! – PM Narendra Modi