साधकों को स्वभावदोष एवं अहं के निर्मूलन की प्रक्रिया सिखाकर स्वसूचनाओं के द्वारा स्वभावदोषों पर विजय प्राप्त करने का मार्गदर्शन करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी !

मेरे मन पर बचपन में घटित कुछ प्रसंगों का परिणाम हुआ था, इसलिए मेरे मन में असुरक्षा की सुप्त भावना थी । सनातन संस्था के मार्गदर्शन में साधना आरंभ करने पर प्रत्येक प्रसंग में प.पू. डॉक्टरजी ने (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी ने) मुझे सदैव आधार देकर उन प्रसंगों से मुझे संवारा ।

‘जहां जाऊं मैं, वहां गुरुदेवजी आप ही हैं !’

इस लेखमाला में ‘ईश्वर साधकों का कैसे ध्यान रखते हैं ?’, इससे संबंधित प्रसंग दे रहे हैं । इससे ‘जहां जाऊं, वहां आप मेरे सहयात्री !’, यह संतवचन कितना सार्थ है, यह ध्यान में आएगा ।

ईश्वर की इच्छा कैसे पहचानें ?

एक बार मैं आंखें बंद कर जप कर रहा था, तभी मेरे मन में विचार आने लगे, ‘आज तक गुरुदेव ने हमें इतना ज्ञान दिया, इतना सिखाया, अनेक अनुभूतियां दीं, ईश्वरप्राप्ति को शीघ्र करने के अनेक मार्ग बताए, तब भी हमें कुछ बातें अभी तक समझ में नहीं आतीं ।’

प.पू. भक्तराज महाराजजी के आनंददायक सान्निध्य की कुछ अविस्मरणीय स्मृतियां तथा अनुभव की गई उनकी कृपा !

प.पू. भक्तराज महाराजजी कटहल की भांति थे ! कटहल जैसे ऊपर से कंटीला; परंतु उसके अंदर जैसे बहुत मीठा मगज होता है, बिलकुल वैसे ही थे ! उसके कारण ही उनका सान्निध्य हमें बहुत अच्छा लगता था ।

प.पू. भक्तराज महाराजजी की कृपा से साधक का विभिन्न व्यसनों से मुक्त होना

प.पू. भक्तराज महाराजजी की समाधि के दर्शन करने हेतु कांदळी जाने पर वहां हुई अनुभूति

सनातन संस्था के तीनों अवतारी गुरुओं के अवतारत्व की स्थूल से हो रही प्रतीति

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की अनेक उपलब्धियां केवल साधक ही नहीं, अपितु समाज के महनीय व्यक्ति भी अचंभित होकर देख रहे हैं । ३० वर्षों की अल्पावधि में इतना विशाल कार्य केवल अवतारी व्यक्ति ही कर सकते हैं  !

अष्टलक्ष्मियों की स्वरूपिणी होने की अनुभूति करानेवालीं श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी !

अष्टलक्ष्मियों के ८ रूपों का आध्यात्मिक रहस्य, साथ ही मैं ‘इन आठों तत्त्वों के उन्हीं में (श्रीसत्शक्ति [श्रीमती] बिंदा नीलेश सिंगबाळजी में) कार्यरत होने की अनुभूति कैसे कर पाई ?’, इसे मैं कृतज्ञभाव से उनके चरणकमलों में समर्पित कर रही हूं ।

श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी के कक्ष में स्थित देवताओं की मूर्तियों में हुए परिवर्तन तथा उनके कक्ष के विषय में प्रतीत हुए सूत्र

श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी के कक्ष में स्थित सभी मूर्तियों का निरीक्षण करते समय कुछ मूर्तियों में मुझे प्रतीत हुए परिवर्तन यहां दिए हैं ।

वरमहालक्ष्मी व्रत के अवसर पर श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी द्वारा दी गई आहुति की ज्वाला बनी कमलपुष्प समान !

‘वरमहालक्ष्मी व्रत’ के उपलक्ष्य में प्रातःकाल श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी अग्निहोत्र करते आहुति दी, उस समय उन्हें अग्नि की ज्वालाओं का आकार कमलपुष्प जैसा दिखाई दिया ।

भारत द्वारा पाकिस्तान पर ‘एयर स्ट्राईक’ करने के विषय में श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळ को मिली पूर्वसूचना

तमिलनाडू के कांचीपूरम् में प्रवास के समय सायंकाल में तीव्र गति से तुफानी हवा बहने लगी थी । इस हवा की तीव्रता इतनी अधिक थी जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि ‘युद्ध आरंभ होगा तथा यह भारत-पाकिस्तान युद्ध के माध्यम से तीसरे महायुद्ध का आरंभ ही है’, ऐसी संभावना लग रही थी ।